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Union Budget 2026: केंद्रीय बजट में छात्राओं को बड़ी सौगात, छत्तीसगढ़ के हर जिले में बनेगा गर्ल्स हॉस्टल

STEM Education: केंद्रीय बजट 2026 में हर जिले में गर्ल्स हॉस्टल बनाने के ऐलान से छत्तीसगढ़ की छात्राओं को बड़ी राहत मिलेगी।

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केंद्रीय बजट में बेटियों को बड़ी सौगात (photo source- Patrika)

केंद्रीय बजट में बेटियों को बड़ी सौगात (photo source- Patrika)

Union Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए 9वें केंद्रीय बजट में गर्ल्स एजुकेशन को लेकर किया गया ऐलान छत्तीसगढ़ के लिए खास मायने रखता है। बजट में हर जिले में लड़कियों के लिए हॉस्टल बनाने की योजना घोषित की गई है, जिससे राज्य की छात्राओं को उच्च शिक्षा में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

Union Budget 2026: लड़कियों को मिलेगा सुऱिक्षत माहौल

छत्तीसगढ़ के कई ज़िलों में अभी भी मेडिकल, इंजीनियरिंग और साइंस कॉलेज हैं, लेकिन छात्राओं के लिए सुरक्षित और आरामदायक रहने की जगह की बहुत कमी है। खासकर रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, अंबिकापुर और जगदलपुर जैसे एजुकेशन सेंटर्स में, दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से आने वाली लड़कियों को हॉस्टल की कमी के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ती है।

अपने भाषण में, फाइनेंस मिनिस्टर ने कहा कि STEM इंस्टीट्यूशन्स में लंबे क्लास घंटे और लैब का काम लड़कियों के लिए मुश्किल होता है। इसलिए, हर ज़िले में गर्ल्स हॉस्टल बनाने से छत्तीसगढ़ की लड़कियों को एस्ट्रोफिजिक्स, एस्ट्रोनॉमी, मेडिसिन और इंजीनियरिंग जैसे मुश्किल फील्ड्स में आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।

बेटियों को मिलेगी उड़ान

राज्य के आदिवासी बहुल जिलों जैसे बस्तर, कांकेर, कोरिया, सुकमा और नारायणपुर में यह योजना गेमचेंजर साबित हो सकती है। यहां की छात्राएं अब जिला स्तर पर ही सुरक्षित आवास पाकर उच्च शिक्षा से जुड़ सकेंगी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना छत्तीसगढ़ में ड्रॉप-आउट रेट कम करने, बेटियों की उच्च शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने और भविष्य में महिला वैज्ञानिकों व रिसर्चरों की संख्या बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।

Union Budget 2026: जानें गर्ल्स एजुकेशन पर फोकस क्यों ज़रूरी?

देश में आज भी बड़ी संख्या में लड़कियां उच्च शिक्षा के स्तर पर पहुंचने से पहले पढ़ाई छोड़ देती हैं।

STEM और रिसर्च संस्थानों में आवास की कमी लड़कियों के लिए सबसे बड़ी बाधाओं में से एक रही है।

ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों की छात्राओं को दूसरे शहरों में सुरक्षित रहने की सुविधा नहीं मिल पाती।

सुरक्षित हॉस्टल मिलने से लड़कियां लंबे समय तक लैब वर्क, प्रोजेक्ट्स और रिसर्च में शामिल हो सकेंगी।