
New Trend: टॉप 10 के छात्रों को रेडियो डायग्नोसिस मेडिसिन और पीडियाट्रिक विषय पसंद
प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एमडी-एमएस कोर्स में प्रवेश के लिए जारी कंबाइंड आवंटन सूची में टॉप-10 में 3 को रेडियो डायग्नोसिस, 6 को मेडिसिन और एक छात्र ने पीडियाट्रिक विषय पसंद किया है। इनमें 3 टॉपरों को नेहरू मेडिकल कॉलेज में रेडियो डायग्नोसिस की सीटें मिली हैं। सिम्स बिलासपुर व अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में भी सीटें मिली है, जो पहली बार है। पहले टॉप 10 के सभी छात्रों को नेहरू मेडिकल कॉलेज में सीट मिलती रही है।
रेडियो डायग्नोसिस व मेडिसिन पिछले 10 साल से नीट पीजी के टॉप-10 छात्रों की पसंद रही है। हाईकोर्ट के फैसले के पहले टॉप 10 में 6 छात्रों ने मेडिसिन व चार छात्रों ने रेडियोलॉजी की सीटें पसंद की थी। पहले ऑब्स एंड गायनी व पीडियाट्रिक विषय भी रहते थे। दूसरी ओर कंबाइंड आवंटन सूची में टॉप 20 में 20 छात्रों ने प्रदेश में पढ़ने में रुचि नहीं दिखाई है। यही कारण है कि टॉप-20 में स्टेट रैंक के 40वें तक के छात्रों को स्थान मिला है। इसका फायदा स्थानीय छात्रों को ही होगा, क्योंकि उन्हें अच्छी सीटें मिल गई हैं। इन छात्रों के नाम मेरिट सूची में थी, लेकिन च्वॉइस फिलिंग में रुचि नहीं दिखाई। इसका मतलब ये है कि इन छात्रों को दूसरे राज्यों व एम्स में पीजी की सीटें मिल गई होंगी। कुछ छात्रों ने ऑल इंडिया कोटे से प्रदेश में या अन्य राज्यों में प्रवेश लिया है। छात्र संबंधित कॉलेजों में 2 फरवरी तक प्रवेश ले सकते हैं।
पीजी में प्रवेश के लिए पहले व दूसरे राउंड की कंबाइंड काउंसलिंग में गुरुवार को प्रवेश शुरू हो गया। आवंटन सूची के अनुसार टॉप टेन में 12 व टॉप 20 तक 20 छात्रों को कोई भी सीट आवंटित नहीं की गई है। हाईकोर्ट के फैसले के पहले पहले राउंड में टॉप 10 में 15 व टॉप 20 में 26 छात्रों को सीटें अलॉट नहीं की गई है थी। टॉप 10 में स्टेट रैंक के 4, 7, 9, 10, 11, 13, 15, 17, 18, 19 व 21वीं रैंक वाले छात्र स्टेट कोटे से बाहर हो गए हैं। इससे पहले जारी आवंटन सूची में टॉप 10 में 5, 6, 7, 8, 10, 11,12, 14, 16, 17, 18, 19, 20, 23 और 24 वें छात्रों को कोई सीटें नहीं मिली थीं। इसका मतलब ये है कि इन छात्रों ने कोई च्वॉइस फिलिंग नहीं की थी।
आवंटन सूची की सबसे खास बात ये है कि दूसरे राज्यों से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले 13 छात्रों को केवल निजी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की सीटें आवंटित की गई हैं। ये छत्तीसगढ़ के रहने वाले हैं। हाईकोर्ट में यही केस चल रहा था कि प्रदेश के मूल निवासी छात्र, जिन्होंने दूसरे राज्यों से एमबीबीएस किया है, उन्हें पीजी की सीटें नहीं मिल पा रही थीं। पहले आखिरी में सीट बचने पर उन्हें आवंटन में प्राथमिकता देने का नियम था, लेकिन तब तक नॉन क्लीनिकल की सीटें बच जाती थीं, जिसमें ज्यादातर छात्र प्रवेश के लिए इच्छुक नहीं रहते थे।
Published on:
30 Jan 2026 06:40 pm
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