
World Cancer Day: एडवांस तकनीक से इलाज के कारण कैंसर मरीजों का जीवन बढ़ रहा है, लेकिन लगातार मिल रहे नए मरीज चिंता का कारण बन रहा है। पिछले 10 साल में आंबेडकर व निजी अस्पतालों में 20 हजार मरीज मिले हैं। इनमें नए व पुराने दोनों मरीज हैं।
इन सालों में मौतों का आंकड़ा स्पष्ट नहीं है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार इस बीमारी से 100 में 60 मरीजों की मौत हो जाती है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्थिति कितनी भयावह है। डॉक्टरों के अनुसार जीवनशैली व डाइट से कई मरीज इलाज के बाद 20 से 25 साल बाद भी सामान्य जीवन जी रहे हैं। हालांकि ऐसे मरीजों की संख्या गिनती में है। वल्ड कैंसर डे 4 फरवरी को मनाया जाएगा।
इस मौके पर पत्रिका ने आंबेडकर व निजी अस्पतालों का डेटा लिया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। आंबेडकर अस्पताल में 2026 से 2025 तक यानी 10 साल में 15165 मरीजों का इलाज किया गया। इनमें 2016 में 48224 मरीजों का इलाज किया गया, जो 2025 में बढ़कर 63389 हो गया। इनमें नए 3596 व पुराने 53386 मरीज थे। निजी अस्पतालों में 5 हजार से ज्यादा मरीजों का इलाज किया गया। 2003 से 2025 तक 240517 मरीजों का इलाज किया गया।
इसमें आंको यानी कैंसर सर्जरी के मरीज भी शामिल हैं। आंबेडकर में पिछले साल सभी उम्र के 3596 कैंसर मरीजों ने इलाज करवाया।एक साल में 160 बच्चों को कैंसर इनमें ज्यादातर ब्लड कैंसर वालेआंबेडकर अस्पताल में पिछले साल 115 समेत 160 कैंसर पीड़ित बच्चों का इलाज किया गया। इनमें 50 बालक व 65 बालिका शामिल है। निजी अस्पतालों में 45 मरीजों का इलाज किया गया। बच्चों में ब्लड कैंसर के केस रहते हैं, जिसे ल्यूकेमिया कहा जाता है।
यह जेनेटिक म्यूटेशन के कारण होता है।ब्लड कैंसर व बोन मैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. विकास गोयल व आंबेडकर में कैंसर विभाग की एचओडी डॉ. मंजूला बेक के अनुसार बच्चों में 31 फीसदी ल्यूकेमिया यानी ब्लड कैंसर के होते हैं। थकान, चक्कर आना, त्वचा पर चकत्ते,और मसूड़ों से खून आने जैसे लक्षण हो सकते हैं। जरूरी जांच के बाद बीमारी की पुष्टि होती है।......
कैंसर से बचने के ये उपाय-
तंबाकू व इसके उत्पाद से दूर रहें।
मोटापा से बचाव।
जंक फूड से दूर रहना।
फल व सब्जियों का सेवन।
नियमित रूप से एक्सरसाइज करना।
शराब का सेवन न करना।
पराबैंगनी विकिरण के संपर्क से बचना।
प्रदूषण से बचने मॉस्क लगाना।
सस्ते सनस्क्रीन व ब्यूटी प्रोडक्ट से बचना।
कैंसर के लक्षणों में ये- बिना वजह वजन कम होना।
शरीर में कहीं पर गांठ- थकान और कमजोरी।
दर्द और असहजता- खून का बहना या असामान्य स्राव- खांसी में खून निकलना।
स्वस्थ जीवनशैली व एचपीवी वैक्सीनेशन से कैंसर को रोका जा सकता है।
इंटरनेट पर जानकारी की उपलब्धता बढ़ी है, लेकिन अफवाहें भी बढ़ गई हैं। ये चिंताजनक स्थिति है। कैंसर का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों से कराएं न कि इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारियों के अनुसार। यह खतरनाक हो सकता है। अस्पताल में सभी सुविधा उपलब्ध है।
डॉ. विवेक चौधरी, डीन व सीनियर कैंसर रोग विशेषज्ञ नेहरू मेडिकल कॉलेजतंबाकू व इससे बने उत्पाद के अलावा शराब सेवन कैंसर होने की सबसे बड़ी वजह है। अनियमित खानपान खासकर जंक फूड व बढ़ता प्रदूषण भी कैंसर मरीजों की संख्या बढ़ा रहा है। बचपन से तंबाकू व गुड़ाखू की लत से किशोर भी कैंसर का शिकार हो रहे हैं। एडवांस तकनीक उपलब्ध है, लेकिन बीमार होने के बचाय बचाव पर फोकस करने की जरूरत है। डॉ. युसूफ मेमन, डायरेक्टर संजीवनी कैंसर अस्पताल......
Published on:
03 Feb 2026 07:52 pm
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