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Political Clash: राजसमंद में सांसद और SP आमने-सामने… मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला

MP vs SP dispute: राजसमंद जिले में प्रशासन, पुलिस और राजनीति के बीच तनाव जैसा माहौल हैं। राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ और जिले की पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है।

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सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ और एसपी ममता गुप्ता, पत्रिका फोटो

सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ और एसपी ममता गुप्ता, पत्रिका फोटो

MP vs SP dispute: राजसमंद जिले में प्रशासन, पुलिस और राजनीति के बीच तनाव जैसा माहौल हैं। राजसमंद सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ और जिले की पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। सांसद और एसपी के बीच लंबे समय से दूरियां बनी हुई है, वे किसी भी कार्यक्रम में एक साथ शामिल होने से भी बचते रहे हैं। अब मामला इतना गंभीर हो गया कि सांसद ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को दो पत्र लिखकर एसपी को निलंबित करने और विभागीय जांच की मांग कर दी।

सांसद का पत्र 24 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री को भेजा गया। इसमें उन्होंने जिले की कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। सांसद का आरोप है कि एसपी की कार्यप्रणाली से न सिर्फ प्रशासनिक संतुलन बिगड़ रहा है, बल्कि जिले की कानून-व्यवस्था भी खतरे में पड़ गई है। उनका कहना है कि आमजन में असंतोष बढ़ रहा है और अपराधियों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। सांसद ने दूसरा पत्र जनवरी में लिखा है, जिसमें उन्होंने जिले की कानून व्यवस्था से जुड़े अनेक आरोप पुलिस पर लगाए हैं।

मार्ग नामकरण विवाद से शुरू हुई खटास

सांसद और एसपी के बीच टकराव की शुरुआत राणा राजसिंह मार्ग के नामकरण को लेकर हुई। नगर परिषद ने महाराणा राजसिंह मार्ग का नाम बदलकर आचार्य महाश्रमण अहिंसा मार्ग कर दिया था। इसी को लेकर 19 दिसंबर 2025 को बालकृष्ण स्टेडियम में चल रहे निर्माण कार्य का निरीक्षण करने पहुंचे आयुक्त बृजेश रॉय और सभापति के सामने विवाद खड़ा हो गया। मार्ग का नाम बदले जाने से नाराज मंगल सिंह और भरत दवे मौके पर पहुंचे और आयुक्त बृजेश रॉय पर स्याही फेंक दी।

घटना के बाद मंगल सिंह मौके से फरार हो गया, जबकि भरत दवे को मौके पर ही पकड़ लिया गया। आरोप है कि उसके साथ मारपीट भी की गई, जिसका कथित वीडियो सामने आया। मामला तब और तूल पकड़ गया, जब भरत दवे पर एससी-एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया। इसमें सांसद ने इसे एकपक्षीय कार्रवाई माना और मामले में हस्तक्षेप किया, लेकिन पुलिस ने अपने स्तर पर कार्रवाई की। यहीं से सांसद और पुलिस अधीक्षक के बीच दूरियां और तनाव बढ़ता चला गया।

जोशी हत्याकांड से और गहराया विवाद

धोइंदा निवासी हरीश जोशी की हत्या के बाद जिले में आक्रोश फैल गया। इस मामले में सांसद ने जिला कलेक्टर से बात कर त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए, लेकिन पुलिस की कार्यशैली को लेकर उन्होंने सवाल उठाए। परिजनों ने पहले हरिश जोशी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने समय पर कार्रवाई नहीं की।

बाद में जब दबाव बढ़ा तो पुलिस ने कदम उठाए, लेकिन तब तक हरीश जोशी की हत्या हो चुकी थी। इस प्रकरण ने सांसद और एसपी के बीच तनाव को और बढ़ा दिया। यही नहीं, मावली के पूर्व विधायक धर्मनारायण जोशी ने भी इस मामले में एसपी ममता गुप्ता को खुले तौर पर फटकार लगाई थी।

24 दिसंबर का पत्र: निलंबन और जांच की मांग

सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ का 24 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को लिखा गया पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पत्र में उन्होंने बिंदुवार तरीके से एसपी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए तत्काल निलंबन और विभागीय जांच की मांग की है।

पत्र में लगाए गए तीन प्रमुख आरोप

  • पहला आरोप:

एसपी ममता गुप्ता नाथद्वारा विधानसभा क्षेत्र में स्थानीय जनप्रतिनिधियों, विधायक और स्वयं सांसद की जानकारी के बिना स्वेच्छा से नियुक्तियां कर रही हैं।

  • दूसरा आरोप:

जनप्रतिनिधियों की मांगी सूचनाओं का पुलिस अधीक्षक की ओर से कोई जवाब नहीं दिया जाता। जनप्रतिनिधियों की समस्याओं के समाधान में भी रुचि नहीं ली जा रही, जिसकी लगातार शिकायतें मिल रही हैं।

  • तीसरा आरोप:

क्षेत्र में प्रशासनिक शिथिलता बरती जा रही है। राजसमंद के संवेदनशील प्रकरणों में एसपी द्वारा की गई एकपक्षीय कार्रवाई से जनाक्रोश बढ़ा है और जिले की स्थिति तनावपूर्ण होती जा रही है।

इनका कहना है…

जनप्रतिनिधि सरकार का हिस्सा होते हैं, हम उनकी सभी बातों को सुनते हैं। जो भी अच्छा होता है वो नियमानुसार कार्रवाई करते हैं। राजसमंद में यही कोशिश की है कि यथासंभव जनप्रतिनिधियों की बात सुनूं और कार्रवाई करें। कानून व्यवस्था और अपराध नियंत्रण के लिए बहुत अच्छे से काम किया है। मेरे कार्य को यहां का जनप्रतिनिधियों और जनता ने भी सराहा है।

ममता गुप्ता, पुलिस अधीक्षक, राजसमंद