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Peepal Tree Worship: पीपल में होता है त्रिदेवों का वास, सूर्योदय से पहले पूजा क्यों मानी गई निषिद्ध, जानिए पूजा नियम

Shani Dosh Remedies: शास्त्रों में पीपल को अक्षय और देववृक्ष माना गया है। जानिए अश्वत्थ वृक्ष में त्रिदेवों के वास, शनि दोष से जुड़े उपाय और पूजा से जुड़े जरूरी नियम।

Peepal Tree Benefits, Peepal Tree Worship Rules

Peepal Tree Worship Rules : पीपल पूजा के नियम: Ashvattha Tree में क्यों माना जाता है त्रिदेवों का वास (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Peepal Tree Worship: सनातन परंपरा में पीपल या अश्वत्थ वृक्ष को देववृक्ष माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महादेव का वास होता है। धार्मिक मान्यताओं में पीपल पूजा को शनि दोष, पितृदोष और वास्तु दोष से मुक्ति का माध्यम माना गया है। हालांकि, इसकी पूजा और पत्तियां तोड़ने (Peepal Puja Niyam) से जुड़े कुछ कठोर नियम भी बताए गए हैं। आचार्य श्री कौशिक महाराज ने अपने प्रवचन में पीपल पूजा के महत्व का वर्णन किया है।।

त्रैलोक्य का वास: जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं पर महादेव

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल का पेड़ केवल एक वनस्पति नहीं, बल्कि साक्षात देवों का भूतल पर वास है। पद्म पुराण और श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं उद्घोष किया है "अश्वत्थः सर्ववृक्षाणाम्" अर्थात् समस्त वृक्षों में मैं पीपल हूं। इसके मूल (जड़) में सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा, मध्य (तने) में जगतपालक विष्णु और अग्रभाग व शाखाओं पर देवाधिदेव महादेव का निवास होता है। केवल यही नहीं, इसकी पत्तियों में श्रीहरि और फलों में समस्त तैंतीस कोटि देवताओं की शक्ति समाहित मानी गई है। यही कारण है कि इस महावृक्ष की विधि-विधान से सेवा करने वाले परिवार पर तीनों लोकों के स्वामियों की असीम अनुकंपा बनी रहती है।

अश्वत्थः सर्ववृक्षाणां देवर्षीणां च नारदः।
गन्धर्वाणां चित्ररथः सिद्धानां कपिलो मुनिः॥

श्रीमद्भगवद्गीता 10.26

पीपल वृक्ष की दैवीय संरचना:

पीपल वृक्ष का भागदेवताधार्मिक मान्यता
जड़ (मूल)भगवान ब्रह्मासृष्टि के रचयिता
तना (मध्य भाग)भगवान विष्णुजगत के पालनकर्ता
शाखाएं और पत्तेभगवान शिव व समस्त देवगणदिव्य शक्तियों और देवताओं का वास

शनि दोष में पीपल पूजा का महत्व

यदि आपकी कुंडली में शनि दोष, साढ़ेसाती या ढैय्या के कारण बनते काम बिगड़ रहे हैं, तो पीपल की शरण से बड़ा कोई रक्षा कवच नहीं है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब पीपलाद मुनि ने बाल्यकाल में घोर कष्ट झेलने के बाद शनिदेव को ब्रह्मांडीय दंड दिया था, तब ब्रह्मा जी के हस्तक्षेप पर एक समझौता हुआ। इसके तहत शनिदेव ने वचन दिया था कि जो भी व्यक्ति पीपल के वृक्ष की सेवा करेगा, उसे शनि की क्रूर दृष्टि का सामना नहीं करना पड़ेगा। धार्मिक मान्यताओं में माना जाता है कि पीपल सेवा करने वालों पर शनिदेव की कृपा बनी रहती है।

शनिवार के अचूक तांत्रिक उपाय:

दीपक और परिक्रमा: शनिवार की शाम को सूर्यास्त के बाद पीपल के नीचे सरसों या तिल के तेल का दीपक जलाएं और सात बार परिक्रमा करें।

पर्ण माला अर्पण: पीपल के 11 साबुत पत्ते तोड़कर उन पर चंदन से 'श्री राम' लिखें और इसकी माला बनाकर हनुमान जी को पहनाएं।

अमावस्या का जागरण: सोमवती अमावस्या या सामान्य अमावस्या को पीपल के नीचे बैठकर 10-15 मिनट समय बिताने और हरि-जागरण करने से घर के समस्त वास्तु दोष दूर होते हैं।

पीपल पूजा के नियम और सावधानियां

देववृक्ष होने के कारण पीपल के रख-रखाव को लेकर शास्त्रों में बेहद कड़े नियम बताए गए हैं:

सूर्योदय से पहले पूजा निषेध: शास्त्रों के अनुसार, सूर्योदय से पूर्व पीपल के वृक्ष पर 'दरिद्रता' (अलक्ष्मी) का वास होता है, जबकि सूर्योदय के बाद माता लक्ष्मी का आगमन होता है। इसलिए भोर के अंधेरे में कभी भी पीपल की पूजा न करें।

टहनियों को तोड़ना वर्जित: बिना किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या जरूरत के इसकी डालियों या पत्तों को नुकसान पहुंचाना महापाप की श्रेणी में आता है।

अपवित्रता से बचें: पीपल की जड़ों के समीप कभी भी मलमूत्र का विसर्जन या गंदगी न फैलाएं, ऐसा करने से पितृदोष और देव प्रकोप का सामना करना पड़ सकता है।

मनोकामना पूर्ति और वंश वृद्धि का वरदान

जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं, उनके लिए पीपल की सेवा एक ईश्वरीय वरदान है। इसके एक साफ पत्ते को प्रतिदिन सुबह एक घंटे के लिए स्वच्छ जल में डुबोकर रखें, फिर उस पत्ते को ससम्मान किसी पौधे के नीचे रख दें और दंपत्ति उस अभिमंत्रित जल का सेवन करें। धार्मिक मान्यताओं में पीपल सेवा को संतान सुख से जोड़कर देखा जाता है। इसके साथ ही, मनोकामना पूर्ति के लिए इसकी परिक्रमा करते हुए तने पर सात बार सूत का लाल या पीला धागा बांधने से अटके हुए कार्य शीघ्र पूरे होने की मान्यता भी प्रचलित है।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहाँ दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।

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