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जब प्रेमानंद जी को अपने साथ ले उड़ा शराबी! महाराज श्री ने सुनाया चौंका देने वाला किस्सा

Premanand ji Maharaj: प्रेमानंद जी ने अपनी युवास्था से जुड़े एक मजेदार किस्से को साझा किया है। आप भी पढ़िए, क्या हुआ जब एक शराबी महाराज जी से मिला?

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भारत

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Adarsh Thakur

Jan 25, 2026

pREMANAND JI MAHARAJ LATEST PRAVACHAN IN HINDI

PREMANAND JI MAHARAJ PRAVACHAN: प्रेमानंद जी से जब मिला शराबी (PC:AI)

Premanand ji Maharaj: अध्यात्म की राह पर चलते हुए अक्सर हम यही सोचते हैं कि सच्चा ज्ञान तो केवल हिमालय की गुफाओं या बड़े संतों के प्रवचनों से ही मिलेगा, लेकिन यह पूरा सत्य नहीं है। यदि ग्रहण करने की क्षमता हो, तो ज्ञान का झरना कहीं भी फूट सकता है। ऐसा ही एक अद्भुत वाकया सबके चहीते संत प्रेमानंद जी के साथ घटित हुआ। महाराज श्री अपनी युवा अवस्था में 22-24 साल की उम्र में, जब गंगा किनारे मंत्र जाप में लीन थे, तब एक शराबी ने उन्हें जीवन का सबसे बड़ा दर्शन समझा दिया। आइए, ये दिलचस्प किस्सा आपको विस्तार से बताते हैं।

जब प्रेमानंद जी से टकराया शराबी | A Drunkard Meets Premananda ji

प्रेमानंद जी महाराजअपने वीडियो में कहते हैं, जब मैं गंगा की लहरों का आनंद ले रहा था, तभी एक नशे में धुत व्यक्ति आया और मुुझे वैकुंठ धाम ले जाने की जिद करने लगा। लोग अक्सर ऐसे लोगों से दूर भागते हैं, लेकिन मैं उसके साथ चल दिया। वह शराबी मुझे एक प्रतिमा के पास ले गया और नशे की हालत में ही एक ऐसी बात कही, जो प्रायः बड़े-बड़े विद्वान भी नहीं कह पाते।

प्रेमानंद जी से शराबी ने क्या कहा? | Drunkard Message to Premanand ji

शराबी ने वैकुंठ धाम नाम की जगह पर स्थापित प्रतिमा की ओर इशारा करते हुए महाराज जी से पूछा, "इसे देख रहे हो? यह आज भगवान बनकर क्यों पूजा जा रहा है?" खुद ही जवाब देते हुए उसने कहा, "क्योंकि जब इसे छेनी और हथौड़े से तिल-तिल काटा जा रहा था, तब यह पत्थर टूटा नहीं। इसने हर चोटें सहीं, खुद को गढ़ा, लेकिन बिखरने से इन्कार कर दिया। जो चोट खाकर नहीं टूटता, दुनिया उसे ही भगवान मानकर पूजती है।"

उपदेश कहीं से भी मिले, ग्रहण करें | Accept Teachings Wherever You Get

प्रेमानंद जी कहते हैं, शराबी की बातों ने मुझे झकझोर दिया। समझ आया कि जीवन में आने वाली मुश्किलें और कष्ट हमें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि तराशने के लिए आते हैं। महाराज श्री ने उस शराबी को वैसे ही पंचांग प्रणाम किया, जैसे किसी सिद्ध संत को किया जाता है।

जो टूटा कंकर बना, जिसने सहा वो शंकर | Life Problem Solution by Premanand Maharaj ji

यह कहानी सिखाती है, हमें उपदेश देने वाले का चेहरा या उसकी अवस्था नहीं देखनी चाहिए, बल्कि उसकी बात की गहराई देखनी चाहिए। हम मिठाई का भी स्वाद देखते हैं, दुकानदार का हुलिया नहीं। वैसे ही, शिक्षा चाहे शराबी से मिले या विद्वान से, यदि वह सच्ची है; तो उसे जीवन में उतारना चाहिए। कहते हैं, जीवन की चोटों से जो टूट जाता है वह कंकर बनता है और जो न टूटकर धैर्य से सहता चला जाता है, वह एक दिन शंकर बन जाता है।

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