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गुरू की मर्जी के बिना शंकराचार्य बने हैं अविमुक्तेश्वरानंद? कोर्ट में क्यों लंबित है मामला? जानें सबकुछ

Shankracharya Avimukteshwaranand Controversy: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के बीच उनकी नियुक्ति का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। इस लेख में विस्तार से समझिए, अविमुक्तेश्वरानंद का शंकराचार्य बनना विवादित क्यों रहा है? क्यों यह मामला कोर्ट में लंबित है? शंकराचार्य बनने की शर्ते क्या हैं? उनके ABVP से कनेक्शन क्या थे और राहुल गांधी को उन्होंने सनातन से बेदखल क्यों किया।

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भारत

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Adarsh Thakur

Jan 27, 2026

Shankracharya Swami Avimukteshwaranand

Shankracharya Avimukteshwaranand Controversy: शंकराचार्य कैसे बनते हैं?

Shankracharya Avimukteshwaranand Controversy: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। ज्योतिष पीठ (ज्योतिर्मठ/जोशीमठ) का शंकराचार्य पद का मामला बीते कुछ सालों से अदालती गलियारों और संत समागमों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इसी बीच समझिए, सनातन धर्म में सर्वोच्च पद माने जाने वाले शंकराचार्य पद पर कोई कैसे नियुक्त होता है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य कैसे बने, इस पर बवाल क्यों मचा था और उनके गुरु कौन थे? साथ ही शंकराचार्य के ABVP से कनेक्शन और राहुल गांधी को सनातन से बेदखल करने की पूरी इनसाइड स्टोरी।

अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य कैसे बने? | Shankracharya Avimukteshwaranand Recruitment

जानकारी के मुताबिक, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने लगभग 22 वर्षों तक अपने गुरु की सेवा की। उनकी नियुक्ति के मुख्य रूप से दो आधार रहे:

  1. गुरु की वसीयत: उनके निजी सचिव सुबोद्धानंद के अनुसार, स्वामी स्वरूपानंद ने अपनी वसीयत में अविमुक्तेश्वरानंद को उत्तराधिकारी नामित किया था।
  2. पट्टाभिषेक: 12 सितंबर 2022 को मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर में उन्हें विधिवत ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य घोषित किया गया।

शंकराचार्य की नियुक्ति पर बवाल क्यों उठा?

अविमुक्तेश्वरानंद के शंकराचार्य बनने पर इन कारणों से विवाद खड़ा हुआ...खबरों के अनुसार,

  • पुराना कानूनी विवाद: ज्योतिषपीठ पर 1953 से ही विवाद चल रहा है। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती भी इस पीठ पर अपना दावा ठोकते रहे हैं।
  • उत्तराधिकार का विवाद: स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के बाद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य पद को लेकर उत्तराधिकार की जंग शुरू हुई। विरोधियों का कहना है कि अविमुक्तेश्वरानंद स्वघोषित और गलत दावे कर बने हुए शंकराचार्य हैं, जबकि मामला कोर्ट में था। आलोचकों का यह भी कहना है कि उनके गुरू ने उन्हें शंकराचार्य पद नहीं सौंपा।

शंकराचार्य पद का मामला कोर्ट कैसे पहुंचा?

  • शंकराचार्य विवाद कोर्ट मेंः खबरों के मुताबिक, यह विवाद मुख्य रूप से प्रतिद्वंद्वी गुटों और अन्य दावेदारों द्वारा उनकी नियुक्ति की वैधता को चुनौती देने और स्थापित परंपराओं के उल्लंघन के आरोपों के कारण सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। मामला 2022 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसने पट्टाभिषेक की प्रक्रिया पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने कहा।
  • अन्य शंकराचार्यों की असहमति: पुरी के गोवर्धन मठ के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने इस नियुक्ति को शास्त्रों के विरूद्ध बताया। उनका तर्क था कि नियुक्ति में तय नियमों और अन्य पीठों की सहमति नहीं थी।
  • प्रशासनिक और राजनीतिक टकराव: राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को अधूरे मंदिर का हवाला देकर न जाना और केंद्र की मोदी सरकार की आलोचना करने के कारण उन्हें विरोधियों ने राजनीतिक (Political) करार दिया। हाल ही में माघ मेले में प्रशासन ने उनके शंकराचार्य लिखे बोर्ड लगाने पर भी आपत्ति जताई।

शंकराचार्य कैसे बनते हैं? Shankracharya Recruitment Process

शंकराचार्यों की नियुक्ति शंकराचार्य जी द्वारा रचित मठाम्नाय अनुशासन (महानुशासन) के नियमों के अनुसार होती है।

  1. अनिवार्य योग्यता: अभ्यर्थी का दशनामी परंपरा का संन्यासी होना जरूरी होता है। उसे वेदों, उपनिषदों, ब्रह्मसूत्र और शंकरभाष्य का पूर्ण ज्ञान होना चाहिए। त्याग और वैराग्य उसके जीवन के आधार होने चाहिए।
  2. चयन प्रक्रिया: गुरु-शिष्य परंपरा के तहत वर्तमान शंकराचार्य अपने जीवित रहते ही योग्य शिष्य का चुनाव करते हैं। इसमें काशी विद्वत परिषद जैसी संस्थाओं की राय और अन्य पीठों के शंकराचार्यों की सहमति भी मायने रखती है।
  3. पट्टाभिषेक: योग्यता सिद्ध होने पर धार्मिक विधि-विधान से पट्टाभिषेक किया जाता है। इसके बाद उन्हें पीठाधीश्वर (शंकराचार्य) घोषित किया जाता है।

अब शंकराचार्य के गुरु स्वरूपानंद सरस्वती के बारे में जान लेते हैं

उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के गुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती थे, जिन्हें क्रांतिकारी साधु कहा जाता था। वे द्वारका शारदा पीठ और ज्योतिषपीठ, दोनों के शंकराचार्य रहे। स्वरुपानंद जी ने स्वतंत्रता संग्राम में हिस्सा लिया और राम मंदिर आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर योगदान दिया। सितंबर 2022 में उनके ब्रह्मलीन होने के बाद उनके दो प्रमुख शिष्यों को उत्तराधिकारी चुना गया: स्वामी सदानंद सरस्वती (द्वारका पीठ) और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (ज्योतिषपीठ)।

शंकराचार्य ने जब राहुल गांधी को सनातन से बेदखल किया

शंकराचार्य ने संसद में राहुल गांधी के भाषण का पहले बचाव किया था, लेकिन बाद में मनुस्मृति का अपमान करने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी को हिंदू धर्म से निष्कासित करने की घोषणा कर दी। यह विवाद भी काफी चर्चा में रहा था।

RSS और ABVP से रहा है पुराना रिश्ता

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर कुछ लोग भाजपा विरोधी होने का आरोप लगाते हैं, लेकिन उनका अतीत हिंदुत्व की राजनीति से गहराई से जुड़ा है। खबरों के अनुसार, उत्तरप्रदेश के प्रतापगढ़ में जन्मे उमाशंकर उपाध्याय (स्वामी जी का बचपन का नाम) बनारस में पढ़ाई के दौरान ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) के सक्रिय सदस्य रहे। उन्होंने 1994 में ABVP के समर्थन से छात्र संघ चुनाव में भी जीत हासिल की। यहां तक की शंकराचार्य साल 2014 में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए भी खुला समर्थन दे चुके हैं। हालांकि बाद में, गोवंश संरक्षण के मुद्दे पर वे केंद्र सरकार के आलोचक के रूप में सामने आए।

वर्तमान में चल रहा अविमुक्तेश्वरानंद विवाद क्या है? | Shankracharya Avimukteshwaranand Controversy

अभी चल रहा अविमुक्तेश्वरानंद विवाद 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शुरु हुआ। जब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी प्रयागराज के माघ मेले में पालकी से स्नान करने के लिए जा रहे थे। इसी दौरान, पुलिस ने उन्हें स्नान करने से रोक दिया।प्रशासन का कहना है कि नियम है, कोई भी पालकी से गंगा के संगम तक स्नान करने नहीं जा सकता। शंकराचार्य ने नियमों का उल्लंघन किया, इसीलिए उन्हें स्नान से रोका गया। तभी से स्वामी जी उनके शिष्यों के साथ शिविर के बाहर धरने पर बैठे हैं। अब सरकार, प्रशासन और शंकराचार्य जी में ठनी हुई है। विवाद थमने की बजाय, शंकराचार्य के शिविर में घुसकर नारेबाजी होने और प्रशासन के दो नोटिसों के बाद से और बढ़ गया है। इसी बीच, ज्यादातर लोग सोशल मीडिया पर अविमुक्तेश्वरानंद के सपोर्ट और शासन-प्रशासन के विरोध में पोस्ट और कॉमेंट्स कर रहे हैं। हालांकि, कुछ यूजर्स शंकराचार्य के खिलाफ भी लिख रहे हैं।

छविः प्रशासन का शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस

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