
shree ram ki vanshavali: क्या सच में राजस्थान के इस परिवार का राम से है कनेक्शन? (छविः एआई)
Ram ke Vanshaj Kaun Hai : राजस्थान की गुलाबी नगरी अपने किलों और महलों के लिए तो विश्व प्रसिद्ध है ही, साथ ही आपको जानकर हैरानी होगी कि यहां का इतिहास सीधे त्रेतायुग से जुड़ा माना जाता है। जयपुर के कछवाहा (कुशवाह) राजवंश को लेकर कहते हैं कि वे भगवान श्री राम के बड़े बेटे कुश के सीधे वंशज हैं। यही कारण है कि इस राजवंश को 'कछवाहा' कहा जाता है, जो 'कुशवाहा' शब्द का ही दूसरा रूप है। आज "राम" सीरिज के दूसरे आर्टिकल में समझिए, क्या है मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम का जयपुर के राजघराने से संबंध।
इतिहासकारों और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम के बाद उनके पुत्र कुश ने दक्षिण कोसल पर शासन किया। उनके वंशज धीरे-धीरे आगे बढ़े। मध्यप्रदेश के ग्वालियर और नरवर के क्षेत्रों में आए। वहां से 11वीं शताब्दी के आसपास दुलहराय जी ने राजस्थान के ढूंढाण क्षेत्र में कदम रखा और आमेर (Amer) में कछवाहा यानी कुशवाहा वंश की नींव डाली। बाद में महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने 1727 में जयपुर शहर को बसाया और यहां राज किया।
जयपुर राजपरिवार के पास मौजूद प्राचीन साक्ष्यों और वंशावली में श्री राम का जिक्र साफ तौर पर मिलता है। राजपरिवार के पुराने ध्वज, जिसे पचरंगा कहते हैं और राजचिह्न पर 'यतो धर्मस्ततो जयः' लिखा हुआ है। दिलचस्प बात यह है कि जयपुर की पूर्व महारानी पद्ममिनी देवी ने एक साक्षात्कार (Interview) में उनकी वंशावली का हवाला दिया था। पद्ममिनी देवी ने बताया कि, उनके परिवार के पास 309वें वंशज तक का रिकॉर्ड है, जो उन्हें सीधे अयोध्या के रघुकुल से जोड़ता है।
जब अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि का विवाद चल रहा था, तब भी जयपुर राजपरिवार ने अपनी वंशावली को साक्ष्य के तौर पर प्रस्तुत किया था। राजकुमारी दीया कुमारी (वर्तमान में राजस्थान की उप-मुख्यमंत्री) ने भी सोशल मीडिया पर अपनी वंशावली साझा की थी, जिसमें कुश से लेकर सवाई जयसिंह और वर्तमान महाराज पद्मनाभ सिंह तक का क्रमवार विवरण दिखता है।
कहना अतिश्योक्ति नहीं होगा कि जयपुर का इतिहास केवल युद्धों और शौर्य की गाथाओं से ही भरा नहीं है, बल्कि ये सनातन परंपराओं और रघुकुल की मर्यादाओं को आज भी जीवंत रखे हुए हैं।
{अस्वीकृति (Disclaimer): उपरोक्त लेख मान्यताओं पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता का दावा नहीं करते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए धार्मिक विशेषज्ञ और इतिहासकार से संपर्क करें।}
Updated on:
20 Jan 2026 03:54 pm
Published on:
20 Jan 2026 02:43 pm
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