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सीवर लाइन के भुगतान पर भड़के एसीएस ने कहा ‘स्वाहा कर दिया पूरा पैसा’

सतना। मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) नगरीय विकास एवं आवास संजय दुबे ने सतना नगर निगम के विभिन्न निर्माण कार्यों और परियोजनाओं की गहन समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने सीवरेज निर्माण पर गंभीर नाराजगी जाहिर की और पूरे प्रोजेक्ट में अनियमितताओं की जांच के सख्त निर्देश दिए। एसीएस ने अधिकारियों को फटकार लगाते […]

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सतना। मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) नगरीय विकास एवं आवास संजय दुबे ने सतना नगर निगम के विभिन्न निर्माण कार्यों और परियोजनाओं की गहन समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने सीवरेज निर्माण पर गंभीर नाराजगी जाहिर की और पूरे प्रोजेक्ट में अनियमितताओं की जांच के सख्त निर्देश दिए। एसीएस ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि ठेकेदारों को पहले ही 50 प्रतिशत अधिक राशि देकर काम सौंपा गया था, फिर भी वे अतिरिक्त धनराशि की मांग कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'पूरा पैसा स्वाहा कर दिया आप लोगों ने।' बढ़ी हुई निर्माण लागत पर सवाल उठाते हुए उन्होंने अपनी टीम को ठेका शर्तों के अनुरूप पूरी जांच करने के आदेश दिए। समीक्षा बैठक में कमिश्नर रीवा बी.एस. जामोद, कलेक्टर सतना डॉ. सतीश कुमार एस, एमपीयूडीसी के अतिरिक्त प्रबंध संचालक दिव्यांक सिंह, नगर निगम आयुक्त शेर सिंह मीना सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

समीक्षा के दौरान सीवर लाइन कार्य की बारीकियों पर चर्चा हुई। एसीएस ने ठेकेदारों द्वारा प्रस्तुत जानकारी पर सवाल उठाया कि टेंडर छूटे कार्यों पर आधारित था, जिसके लिए कंपनी ने स्वयं सर्वे किया होगा। उन्होंने कहा, 'पहले ही इस कार्य को 50 प्रतिशत ज्यादा पर दे चुके हैं। जब 150 प्रतिशत में काम दिए हैं तो अब फिर लागत कैसे बढ़ रही है?' अधिकारियों ने बताया कि गहरी खुदाई और स्ट्रेटा चेंज के कारण लागत बढ़ी है, लेकिन एसीएस ने तुरंत खारिज करते हुए कहा कि कंटूर मैप और ड्राइंग में गहराई पहले से स्पष्ट थी। उन्होंने साफ कहा, 'हम कोई पैसा ज्यादा नहीं देंगे।' अपनी टीम से ठेके की शर्तों की गहन जांच करने और कार्य की समीक्षा करने को कहा, क्योंकि उन्हें यह सही नहीं लग रहा।

इंडस्ट्री को रॉ वाटर पर नाराजगी

एसीएस ने इंडस्ट्रीज को दिए जा रहे रॉ वाटर पर भी गंभीर आपत्ति जताई। सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले ट्रीटेड वाटर की उपयोगिता पर चर्चा में उन्होंने पूछा कि इंडस्ट्रीज को कौन सा पानी दिया जा रहा है। बताया गया कि रॉ वाटर दिया जा रहा है, जिसका चार्ज 40 रुपये प्रति किलोलीटर है। एसीएस ने आश्चर्य जताते हुए कहा, 'यह तो अकेले पंपिंग कॉस्ट होगी।' उन्होंने निर्देश दिए कि इंडस्ट्रीज को ट्रीटेड वाटर दिया जाए और रॉ वाटर की वास्तविक लागत निकाली जाए, जो वर्तमान में काफी कम है। एसीएस ने कहा, 'ट्रीटेड वाटर देने से रॉ वाटर बचेगा, जो जनता को मिलेगा। ग्राउंड वाटर भी बचेगा, जो शहर के लिए फायदेमंद होगा। वर्तमान स्थिति खराब है, इसे प्लान करके सही करें।'

रेमकी को बताया 'बदमाश' कंपनी

कचरा निस्तारण कंपनी रेमकी के कामकाज पर भी एसीएस ने कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कंपनी को 'बदमाश' करार देते हुए कहा कि ट्रांसफर स्टेशन और कॉम्पेक्टर बनाने के मामले में दिए गए झूठे बयानों को उन्होंने पकड़ लिया। एसीएस ने अधिकारियों से कहा, 'रेमकी के प्रतिनिधियों को मेरे सामने प्रस्तुत करिए।' स्वच्छ भारत मिशन के तहत सतना की 7 स्टार रेटिंग की दावेदारी के लिए एसीएस ने प्रोत्साहित किया, लेकिन कहा कि जीतने के लिए ठोस प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा, 'रीवा को हराना है तो यह करना होगा। मैं चाहता हूं कि सतना रीवा से जीते।'

ठेके की लागत पर सवाल

अमृत 2 प्रोजेक्ट के ठेके की बढ़ी लागत पर सवाल उठाते हुए कहा, 'इतना ज्यादा आप लोग कैसे दे देते हैं?' ठेका कंपनी द्वारा अभी तक डिजाइन नहीं सौंपने पर आपत्ति जताई और कहा कि आगे काम कैसे होगा। अधिकारियों को सलाह दी कि वे खुद फील्ड पर जाएं और काम सीखें, वरना ठेकेदार और इंजीनियर बेवकूफ बनाते रहेंगे। एसीएस ने शहर के विकास पर भी सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि नया गीता भवन बनाने से बेहतर है कि पुराने टाउन हॉल को सुधारें। इसमें लाइब्रेरी, एयर कंडीशनिंग और कैफेटेरिया बनाएं। बताया गया कि विंध्य चैंबर गीता भवन इस कार्य में रुचि ले रहा है और पीपीपी मोड में काम करना चाहता है। एसीएस ने कहा, 'पहले राइटिंग में सबकुछ लें, लेकिन क्षमता का ध्यान रखें कि उतने लोग हैं या नहीं।'

क्लब का रूप दें स्पोर्ट्स काम्पलेक्स को

स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स पर एसीएस ने कहा, "यहां का स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बहुत बढ़िया है। इसे क्लब का रूप देकर अधिकारियों और उद्योग जगत की मेंबरशिप तय करें। कुछ हिस्से अकादमियों को दें, कुछ प्राइवेट लोगों को शामिल करें। जब अधिकारी यहां जाएंगे तो लोग भी आना शुरू करेंगे। इसकी सालाना फीस तय करें। कहा इतनी बड़ी संरचना आज की स्थिति में शासन ही बना सकता है। किसी प्राइवेट के इतना दम नहीं है।

जियो मिलर को टर्मिनेट करने के निर्देश

टंकियों के लंबित काम को लेकर जियो मिलर कंपनी पर नाराजगी जताई। एसीएस ने कहा, 'इसका काम कुछ है नहीं, बस शिकायतें करता है।' जानकारी लेने पर पता चला कि काम काफी बाकी है और मजदूर भी नहीं लगाए जा रहे। केवल एक साइट पर काम हो रहा है। एसीएस ने सख्ती से कहा, 'इसका ठेका टर्मिनेट करो।'

राजस्व वसूली पर नाराजगी

राजस्व वसूली की समीक्षा में एसीएस ने पाया कि इस साल 23 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध केवल 8 करोड़ वसूले गए हैं, जबकि पुराना बकाया मात्र 9 करोड़। उन्होंने नगर निगम आयुक्त से कहा, 'क्या मतलब है आपका देखने का? आपकी रिकवरी कुछ नहीं है।' निर्देश दिए कि बड़े उद्योगों का पानी बंद करें, रेलवे से वसूलें और यदि जरूरी हो तो तालाबंदी करें। एसीएस ने चेतावनी दी, 'अगर वसूली नहीं कर पाते तो मार्च माह का आप लोगों का वेतन नहीं मिलेगा।' उन्होंने कहा कि वसूली इतनी सख्ती से करें कि शिकायतें उनके पास तक पहुंचें और कोई बड़ा बकायादार न बचे।