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झुंझुनू, Apr 03, 2026

Hobby to Hit Startup : सीए राजकुमारी का ‘यार्निकॉर्न’ बना सफल बिजनेस मॉडल

करीब तीन साल तक पढ़ाई के साथ-साथ ऑनलाइन बिजनेस की बारीकियों को समझा। इस दौरान उन्होंने डिजिटल मार्केटिंग, प्रोडक्ट प्रेजेंटेशन और ग्राहक व्यवहार जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया। वर्ष 2022 में सीए इंटर की परीक्षा से ठीक एक महीने पहले उन्होंने ‘यार्निकॉर्न’ की शुरुआत की। सीमित संसाधनों और छोटे स्तर से शुरू हुआ यह काम धीरे-धीरे एक संगठित बिजनेस मॉडल में बदल गया।

आज के दौर में जहां युवा पारंपरिक कॅरियर विकल्पों के बीच उलझे रहते हैं। वहीं शहर के चंवरा हाल, श्याम नगर निवासी सीए राजकुमारी पारीक ने अपनी हॉबी को बिजनेस में बदलकर एक नई मिसाल कायम की है। सबसे कम उम्र में चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने के साथ ही उन्होंने ‘यार्निकॉर्न’ नाम से अपना स्मॉल स्टार्टअप शुरू किया, जो आज ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए हजारों ग्राहकों तक पहुंच रहा है।

पढ़ाई के साथ बिजनेस की नींव

राजकुमारी पारीक बताती हैं कि उन्होंने करीब तीन साल तक पढ़ाई के साथ-साथ ऑनलाइन बिजनेस की बारीकियों को समझा। इस दौरान उन्होंने डिजिटल मार्केटिंग, प्रोडक्ट प्रेजेंटेशन और ग्राहक व्यवहार जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया। वर्ष 2022 में सीए इंटर की परीक्षा से ठीक एक महीने पहले उन्होंने ‘यार्निकॉर्न’ की शुरुआत की। सीमित संसाधनों और छोटे स्तर से शुरू हुआ यह काम धीरे-धीरे एक संगठित बिजनेस मॉडल में बदल गया।

क्या है ‘यार्निकॉर्न’ का कॉन्सेप्ट

यार्निकॉर्न एक क्रिएटिव क्राफ्ट आधारित बिजनेस है, जिसमें ऊन (यार्न) से विभिन्न सजावटी और उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इसमें घर की सजावट के आइटम, हैंडमेड खिलौने, गिफ्ट आइटम और कस्टमाइज्ड प्रोडक्ट शामिल हैं। खास बात यह है कि हर प्रोडक्ट हस्तनिर्मित होता है, जिससे ग्राहकों को यूनिक और पर्सनलाइज्ड अनुभव मिलता है।

मित्र का सहयोग बना ताकत

राजकुमारी अपनी सफलता का श्रेय अपनी मित्र प्रासी अग्रवाल को भी देती हैं। प्रासी ने बिजनेस की शुरुआत से लेकर मार्केटिंग रणनीति बनाने तक हर स्तर पर सहयोग दिया। दोनों की टीमवर्क और स्पष्ट विजन ने इस छोटे से प्रयास को सफल स्टार्टअप में बदल दिया।

युवाओं के लिए स्टार्टअप संदेश

राजकुमारी पारीक की कहानी यह दर्शाती है कि अगर सही योजना, डिजिटल समझ और निरंतर प्रयास हो तो हॉबी भी सफल बिजनेस बन सकती है। उनका मानना है कि आज के युवा यदि अपनी रुचि को पहचानकर उसे प्रोफेशनल रूप दें, तो वे न केवल आत्मनिर्भर बन सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकते हैं।

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