
लक्ष्य कुमावत (फोटो: पत्रिका)
Lakshy Kumawat Nimbahera: उदयपुर के निम्बाहेड़ा के लक्ष्य कुमावत की कहानी आज के युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों, पारिवारिक संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने हुनर के दम पर पहचान बना रहे हैं। सांवरिया सेठ और बाबा महाकाल के प्रति असीम आस्था रखने वाले लक्ष्य ने 12वीं के बाद महज टाइमपास के लिए कंटेंट क्रिएशन शुरू किया। उस वक्त न कोई बड़ा सपना था और न ही यह अंदाजा कि यही शौक एक दिन उसका प्रोफेशन बन जाएगा।
कॉमेडी, धार्मिक और ट्रैवल जैसे अलग-अलग विषयों पर उसने वीडियो बनाए, पर शुरुआती दौर में खास रिस्पॉन्स नहीं मिला। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य थी। पिता कंस्ट्रक्शन का काम करते हैं और घर की ज़िम्मेदारियां पहले से ही भारी थीं। ऐसे में कंटेंट क्रिएशन को लेकर परिवार को भी कोई जानकारी नहीं थी। धीरे-धीरे वीडियो बनाना उसकी आदत और फिर जुनून बन गया।
साल 2021 में मां के निधन ने लक्ष्य को अंदर से तोड़ दिया। यह उसके जीवन का सबसे कठिन दौर था। उस समय उसके सामने दो ही रास्ते थे, या तो हालात के आगे हार मान लें या फिर अपने शौक को ही अपनी ताकत बनाए। लक्ष्य ने दूसरा रास्ता चुना। उसने तय किया कि कंटेंट क्रिएशन को प्रोफेशन के रूप में अपनाएगा, ताकि परिवार पर आर्थिक बोझ न पड़े और वह आत्मनिर्भर बन सके।
लक्ष्य ने दोस्तों के साथ मिलकर ऐसे वीडियो बनाने शुरू किए, जो समाज में प्रेम, समरसता और सकारात्मक सोच का संदेश देते हों। उसने अपने कंटेंट को शॉर्ट मूवी का रूप दिया, जिसमें भावनाएं, सामाजिक सरोकार और आस्था का मेल दिखाई देता है। यही प्रयोग उसकी पहचान बन गया। खासतौर पर भक्ति से जुड़े वीडियो बनाना उसे सुकून देता है।
धीरे-धीरे उसके वीडियो पर अच्छा रिस्पॉन्स आने लगा। फॉलोअर्स बढ़े तो आत्मविश्वास भी बढ़ा। थोड़ी-सी आय शुरू हुई, जिसने उसे और बेहतर काम करने के लिए प्रेरित किया। लक्ष्य का कहना है कि वह वीडियो की संख्या बढ़ाने के बजाय गुणवत्ता पर ध्यान देता है। शायद यही वजह है कि आज उसकी फेस वैल्यू बन चुकी है और क्षेत्र में लोग उसे पहचानने लगे हैं।
लक्ष्य की मेहनत रंग लाई। उसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे। महज पांच साल में उसके फॉलोअर्स की संख्या पांच लाख से अधिक हो गई। खास बात यह है कि वह सप्ताह में केवल दो वीडियो ही पोस्ट करता है, लेकिन उनकी रीच लाखों में रहती है।
कंटेंट से होने वाली आय में भी तेजी से इजाफा हुआ। खुद के पैसों से उसने कार खरीदी, जो उसके संघर्ष और आत्मविश्वास का प्रतीक है। लक्ष्य मानता है कि अगर खुद पर भरोसा हो और काम में ईमानदारी हो तो सफलता जरूर मिलती है।
लक्ष्य ने सिर्फ सोशल मीडिया पर ही भरोसा नहीं किया। उसने बैकअप प्लान के तौर पर पढ़ाई भी जारी रखी है और वह वर्तमान में बी-फार्मेसी कर रहा है। उसका कहना है कि जीवन में कभी जरूरत पड़े तो उसके पास एक और हुनर होना चाहिए।
लक्ष्य का सपना सिर्फ पैसा कमाना नहीं है। वह लोगों की मदद करना चाहता है और अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करना चाहता है। उसका कहना है कि ईश्वर उसे इतनी काबिलियत दे कि वह समाज के काम आ सके। इसी भावना के साथ वह लगातार मेहनत कर रहा है।
लक्ष्य की लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सांवरिया सेठ पर बनाया गया उसका एक वीडियो विदेशों तक वायरल हुआ। दुबई से एक भक्त सांवरिया सेठ के दर्शन करने राजस्थान आया। उस भक्त ने लक्ष्य से मुलाकात कर वीडियो के माध्यम से भगवान के दर्शन कराने के लिए धन्यवाद भी दिया।
यह घटना लक्ष्य के लिए सिर्फ एक सफलता नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि अगर कंटेंट में सच्ची भावना और आस्था हो, तो उसकी पहुंच सरहदें पार कर जाती है।
Published on:
31 Jan 2026 02:06 pm
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