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हल्के बुखार में एंटीबायोटिक गटकना खतरनाक, रेजिस्टेंस बढ़ा तो भविष्य का इलाज होगा मुश्किल, जानें क्या हैं इसके नुकसान

सोशल मीडिया और मेडिकल स्टोर की आसान पहुंच अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन एक खतरनाक ट्रेंड बन चुका है।

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बरेली। सोशल मीडिया और मेडिकल स्टोर की आसान पहुंच अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन एक खतरनाक ट्रेंड बन चुका है।

सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि एंटीबायोटिक का गलत और अनियंत्रित उपयोग शरीर में दवा प्रतिरोधक क्षमता (एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस) विकसित कर देता है, जिससे भविष्य में गंभीर बीमारियों के इलाज में ये दवाएं असर करना बंद कर सकती हैं।

मामूली सर्दी-जुकाम में भी ले रहे एंटीबायोटिक

सीएमओ ने बताया कि आम लोग हल्के बुखार, सर्दी-जुकाम या साधारण संक्रमण में भी मेडिकल स्टोर से बिना जांच और परामर्श के एंटीबायोटिक खरीदकर सेवन करने लगते हैं। कई लोग सोशल मीडिया या परिचितों की सलाह पर भी दवा ले लेते हैं। यह प्रवृत्ति बेहद खतरनाक है और लंबे समय में जानलेवा साबित हो सकती है।

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बन रहा बड़ा खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार एंटीबायोटिक दवाएं केवल चिकित्सक की सलाह, सही जांच और निर्धारित अवधि तक ही लेनी चाहिए। अधूरा इलाज या मनमाने ढंग से दवा बंद करने से शरीर में बैक्टीरिया मजबूत हो जाते हैं और भविष्य में सामान्य दवाओं से नियंत्रित नहीं होते। ऐसी स्थिति में गंभीर संक्रमण, लंबे इलाज और अधिक खर्च की आशंका बढ़ जाती है।

जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश

सीएमओ ने बताया कि जनपद के सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाएं। लोगों को समझाया जाए कि स्वयं दवा लेने की आदत छोड़ें और बीमारी की स्थिति में योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें। स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी और समाज की सुरक्षा के लिए एंटीबायोटिक का उपयोग जिम्मेदारी से करें, क्योंकि आज की लापरवाही भविष्य में बड़ी चिकित्सा चुनौती बन सकती है।