
साइबर अपराध पर वाराणसी पुलिस का बड़ा प्रहार, 9.5 करोड़ रुपये पीड़ितों को लौटाकर रचा इतिहास (Source: Police Media Cell)
Cyber Crime Control: तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों के बीच वाराणसी पुलिस ने वर्ष 2025 में ऐसी मिसाल पेश की है, जिसने न केवल अपराधियों के हौसले पस्त किए हैं, बल्कि हजारों पीड़ितों के चेहरों पर राहत और भरोसे की मुस्कान भी लौटाई है। साइबर अपराध नियंत्रण, शिकायतों के त्वरित निस्तारण और तकनीक के प्रभावी उपयोग के बल पर वाराणसी पुलिस ने अब तक साइबर फ्रॉड के शिकार लोगों को 9.5 करोड़ रुपये की राशि वापस कराकर एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है।
इसी क्रम में पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट वाराणसी मोहित अग्रवाल की अध्यक्षता में कैम्प कार्यालय पर साइबर अपराधों की रोकथाम और समीक्षा को लेकर एक विस्तृत गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस समीक्षा बैठक में साइबर थाना, साइबर सेल तथा जनपद के सभी थानों के साइबर हेल्प डेस्क प्रभारियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य बीते वर्ष की कार्रवाइयों का मूल्यांकन करने के साथ-साथ आने वाले समय में साइबर अपराधियों पर और अधिक प्रभावी शिकंजा कसना था।
समीक्षा के दौरान पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वाराणसी पुलिस अब साइबर अपराध के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि तकनीक, सतत निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के जरिए साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क को जड़ से समाप्त किया जाएगा। पुलिस आयुक्त ने यह भी रेखांकित किया कि साइबर अपराध अब केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि लोगों के मानसिक और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है, इसलिए इससे सख्ती से निपटना समय की मांग है।
गोष्ठी में वर्ष 2025 के दौरान वाराणसी पुलिस द्वारा की गई कई बड़ी और प्रभावी कार्रवाइयों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया। आंकड़े बताते हैं कि साइबर अपराध के खिलाफ यह साल वाराणसी पुलिस के लिए अब तक का सबसे सफल वर्ष रहा है।
साइबर अपराध में सबसे बड़ी चुनौती पीड़ितों की मेहनत की कमाई को वापस दिलाना होती है। वाराणसी पुलिस ने इस दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। 9.5 करोड़ रुपये की वापसी न केवल प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि समय पर की गई शिकायत और त्वरित कार्रवाई से नुकसान की भरपाई संभव है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर फ्रॉड की रकम को समय रहते फ्रीज कर बैंकिंग चैनलों के माध्यम से पीड़ितों तक पहुंचाया गया। इसके लिए साइबर सेल, बैंकिंग संस्थानों और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया गया।
गोष्ठी के दौरान पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए, ताकि साइबर अपराध पर और अधिक प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा सके-
पुलिस आयुक्त ने बताया कि साइबर अपराध से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण में वाराणसी कमिश्नरेट का डिस्पोजल रेट 83 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, जो एक सराहनीय उपलब्धि है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्य की प्रशंसा करते हुए इसे और बेहतर करने के निर्देश दिए।
इस महत्वपूर्ण समीक्षा गोष्ठी में अपर पुलिस उपायुक्त साइबर अपराध नीतू, सहायक पुलिस आयुक्त साइबर अपराध विदुष सक्सेना, साइबर थाना प्रभारी, साइबर सेल के अधिकारी एवं कर्मचारी तथा जनपद के सभी थानों के साइबर हेल्प डेस्क प्रभारी उपस्थित रहे।
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Published on:
16 Jan 2026 01:20 pm
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