भिलाई. जिला अस्पताल, दुर्ग district hospital in Durg में फेरी वालों पर कोई रोक टोक नहीं है। अलग-अलग समय में फेरी वाले अस्पताल में प्रवेश करते हैं। इसके बाद वार्ड में जाकर वे महिला मरीजों को वहां कपड़ा दिखाने लगते हैं। साडिय़ां और सूट देखने में महिला स्टाफ भी जुट जाते हैं। Even female staff members join in to look at the sarees and suits इस तरह से वे हर दिन यहां व्यापार business कर रहे हैं। चाय लेकर भी अलग अलग लोग अस्पताल के भीतर चले आते हैं। इसको लेकर अब शिकायत Complaints आने लगी है।
किसकी है जिम्मेदारी
अस्पताल में प्रवेश करने वालों पर सबसे पहली नजर सुरक्षा कर्मियों security guards की पड़ती है। वे मरीजों और अनजान लोगों पर भी नजर रखते हैं। इस तरह से चाय और कपड़े लेकर फेरी वाले प्रवेश करते हैं, तो उनको रोकने का काम सुरक्षा कर्मियों को करना है। इसके साथ-साथ अस्पताल में हर जगह सीसीटीवी कैमरा CCTV cameras लगा है। इस पर नजर रखने की जिनकी ड्यूटी है, वे इस पर ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं। यहां भी सवाल उठ रहा है।
मोबाइल चोरी होना आम बात
अस्पताल के स्टाफ बताते हैं कि मोबाइल अक्सर अस्पताल से चोरी होता है। इसको लेकर शिकायत नहीं के बराबर होती है। 100 मोबाइल चोरी होता है, तो कोई एक ही शिकायत करने जाता है। इसके अलावा अस्पताल से बाइक चोरी होने की शिकायत भी होती है। अनजान लोगों के अस्पताल में प्रवेश करने से यह तो होना ही है।
फेरी वालों को प्रवेश करने की इजाजत नहीं
अस्पताल में प्रवेश करने वालों पर सबसे पहली नजर सुरक्षा कर्मियों की पड़ती है। वे मरीजों और अनजान लोगों पर भी नजर रखते हैं। इस तरह से चाय और कपड़े लेकर फेरी वाले प्रवेश करते हैं, तो उनको रोकने का काम सुरक्षा कर्मियों को करना है। इसके साथ-साथ अस्पताल में हर जगह सीसीटीवी कैमरा लगा है। इस पर नजर रखने की जिनकी ड्यूटी है, वे इस पर ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं। यहां भी सवाल उठ रहा है।
फेरी वालों को प्रवेश करने की इजाजत नहीं
डॉक्टर आशीष कुमार मिंज, सीएस, जिला अस्पताल, दुर्ग, जिला अस्पताल ने बताया कि फेरी वालों को कपड़े बेचने की इजाजत नहीं है। ऐसा हो रहा है, तो उस पर रोक लगाया जाएगा। सुरक्षा कर्मियों को निर्देश देते हैं। https://www.patrika.com/videos/exclusive/watch-the-video-amazing-work-of-corporation-officers-they-did-not-even-construct-the-building-but-issued-a-tender-of-rs-13-lakh-in-the-name-of-maintenance-20096700