India Diplomatic Crisis: बांग्लादेश की राजनीति में साल 2026 एक ऐतिहासिक अध्याय (Bangladesh Election Result 2026) लेकर आया है। ढाका में सत्ता के गलियारों का रंग पूरी तरह बदल चुका है। आम चुनाव के नतीजे घोषित होते ही यह साफ हो गया कि देश में अवामी लीग का दौर खत्म हो चुका है और इतिहास ने एक बार फिर करवट ली है। करीब दो दशक (20 साल) के लंबे इंतजार के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने सत्ता में धमाकेदार वापसी की है। बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष तारिक रहमान की अगुवाई में पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। यह जीत इसलिए भी मायने रखती है क्योंकि खालिदा जिया के सत्ता से हटने के बाद पहली बार उनकी पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। इसके अलावा अब शेख हसीना के प्रत्यर्पण (Sheikh Hasina Exile) की संभावना प्रबल हो गई है।
जहां एक तरफ ढाका की सड़कों पर बीएनपी समर्थक हरे झंडे लहराकर जश्न मना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ नई दिल्ली में निर्वासन (Exile) का जीवन काट रहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इन नतीजों को सिरे से खारिज कर दिया है। भारत में शरण लिए हुए शेख हसीना ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में बेहद तल्ख टिप्पणी की है। उन्होंने कहा, "यह चुनाव पूरी तरह से एक नाटक और फर्जीवाड़ा है। एक अवैध प्रक्रिया के जरिए यह जनादेश तैयार किया गया है, जिसमें बांग्लादेश की आम जनता की आवाज शामिल नहीं है।" हसीना ने साफ कर दिया है कि वह इस नई सरकार को मान्यता नहीं देतीं।
बीएनपी की यह जीत शेख हसीना के लिए कानूनी और निजी तौर पर नई मुसीबतें लेकर आई है। चुनाव प्रचार के दौरान तारिक रहमान ने जनता से वादा किया था कि सत्ता में आते ही वे "कानून से भागने वाले नेताओं" को वापस लाएंगे और उन पर मुकदमा चलाएंगे। अब जबकि बीएनपी सरकार बनाने जा रही है, तो राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण (Extradition) की आधिकारिक मांग कर सकती है। बीएनपी प्रवक्ता ने भी अपने बयान में कहा है, "अत्याचारी शासन का अंत हो चुका है। अपराधी चाहे देश के अंदर हो या बाहर, कानून अपना काम जरूर करेगा।" यह बयान संकेत देता है कि नई सरकार हसीना के खिलाफ पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खोलने की तैयारी में है।
ढाका में सत्ता परिवर्तन ने नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक (विदेश मंत्रालय) की चिंताएं बढ़ा दी हैं। भारत के लिए यह स्थिति कूटनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील है।
एक तरफ मित्रता: शेख हसीना भारत की पुरानी और भरोसेमंद सहयोगी रही हैं। भारत उन्हें सुरक्षा देने के अपने वादे से पीछे नहीं हट सकता।
दूसरी तरफ कूटनीति: बांग्लादेश भारत का एक अहम पड़ोसी है। वहां की नई सरकार (BNP) के साथ रणनीतिक रिश्ते बनाए रखना भारत की मजबूरी भी है और जरूरत भी।
अगर ढाका की नई सरकार आधिकारिक तौर पर हसीना को सौंपने की मांग करती है, तो भारत सरकार एक अजीब धर्मसंकट में फंस जाएगी। विश्लेषकों का मानना है कि यह भारत-बांग्लादेश रिश्तों की सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
चुनाव नतीजों के बाद ढाका में हलचल तेज हो गई है। अगले 48 घंटों के भीतर बीएनपी गठबंधन सरकार बनाने का दावा पेश करेगा और तारिक रहमान के शपथ ग्रहण की तारीख तय की जाएगी। वहीं, किसी भी तरह की हिंसा की आशंका को देखते हुए ढाका और चटगांव जैसे बड़े शहरों में सेना को 'हाई अलर्ट' पर रखा गया है। बांग्लादेश की जनता ने बदलाव के लिए वोट दिया है, लेकिन अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नई सरकार गिरती हुई अर्थव्यवस्था को कैसे संभालती है और भारत के साथ अपने रिश्तों को किस दिशा में ले जाती है।
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लव सोनकर
लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...
Published on:
13 Feb 2026 03:35 pm
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