
बांग्लादेश का भारत को न्योता (इमेज सोर्स: AI जनरेटेड)
Bangladesh Elections: बांग्लादेश ने 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों के लिए भारत को अन्तर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षक के रूप में आमंत्रित किया है। हालांकि, भारत सरकार की ओर से अभी कोई भी आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।
बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद युनुस ने एक पोस्ट में बताया कि अब तक 330 अन्तर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने चुनावों में शामिल होने की पुष्टि की है। हालांकि, भारत, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया समेत कुछ देशों ने अभी पुष्टि नहीं की है ब्राजील, कनाडा, मिस्र, फ्रांस , कुवैत, मोरक्को, नाइजीरिया और रोमानिया से भी जवाब का इंतजार है।
बकौल यूनुस, इस्लामिक सहयोग संगठन सहित छह अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने बांग्लादेश के 13वें आम चुनाव और जुलाई नेशनल चार्टर पर होने वाले जनमत संग्रह के लिए कम से कम 63 पर्यवेक्षक भेजने पर सहमति जताई है। अब तक यूरोपीय संघ के अलावा विभिन्न वैश्विक संस्थाओं और देशों ने कुल 330 अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक भेजने की पुष्टि की है।
बयान में आगे कहा गया कि इस बार अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की संख्या 7 जनवरी 2024 को हुए विवादित चुनाव की तुलना में दोगुनी से भी ज्यादा है। 12वें, 11वें और 10वें आम चुनाव के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की संख्या क्रमशः 158, 125 और 4 थी। इसके अलावा, कई पर्यवेक्षक अमेरिका और यूरोप से भी होंगे।
बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले 13वें संसदीय चुनावों ने राजनीतिक दलों के सुधार के वादों की हकीकत सामने ला दी है। पिछले साल हुए कथित जन-आंदोलन के बाद सभी दलों ने यह वादा किया था कि वे अपने कुल उम्मीदवारों में कम से कम 5% महिलाएं शामिल करेंगे। यह वादा 'जुलाई नेशनल चार्टर 2025' में किया गया था। लेकिन असली तस्वीर इससे बिल्कुल अलग है। चुनाव में कुल 2,568 उम्मीदवार खड़े हैं, जिनमें सिर्फ 109 महिलाएं हैं, यानी सिर्फ 4.24%। इनमें से पार्टियों ने 72 महिलाओं को टिकट दिया है, जबकि 37 महिलाएं निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ रही हैं। खास बात यह है कि इन्हीं चुनावों में इसी चार्टर पर मतदान भी होना है।
इस पर बांग्लादेश के 12 से अधिक महिला संगठनों के गठबंधन महिला राजनीतिक अधिकार मंच (FWPR) ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि 51 में से 30 राजनीतिक दलों ने तो किसी भी महिला को टिकट ही नहीं दिया। हैरानी की बात यह है कि जिन नई राजनैतिक पार्टियों का जन्म हाल ही के जन-आंदोलन से हुआ है, वे भी महिलाओं को मौका देने में पीछे रह गई हैं।
Published on:
03 Feb 2026 02:28 am
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