7 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बांग्लादेश जेल में बंद हिंदू सिंगर की मौत से मचा बवाल, यूनुस सरकार पर लगे गंभीर आरोप

बांग्लादेश जेल में मशहूर गायक और अवामी लीग नेता की मौत हो गई है। परिवार ने समय पर इलाज न मिलने और राजनीतिक प्रतिशोध के गंभीर आरोप लगाए हैं।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Devika Chatraj

Jan 12, 2026

बांग्लादेश में एक और हिंदू की मौत (ANI)

बांग्लादेश में एक बार फिर हिरासत में मौत का मामला सामने आया है, जिसने देश में अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा और मानवाधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मशहूर गायक और अवामी लीग के वरिष्ठ नेता प्रोलय चाकी की पुलिस और जेल हिरासत के दौरान मौत हो गई। रविवार देर शाम उन्होंने राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल में अंतिम सांस ली।

कौन है सिंगर?

प्रोलय चाकी अवामी लीग की पाबना जिला इकाई में सांस्कृतिक सचिव के पद पर कार्यरत थे। इसके अलावा वे जिला अवामी शिल्पी गोष्ठी के महासचिव और बनमाली शिल्पकला केंद्र के संयुक्त सांस्कृतिक सचिव जैसे अहम पदों पर भी अपनी सेवाएं दे चुके थे। सांस्कृतिक जगत में उनकी पहचान एक प्रतिष्ठित गायक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में थी।

दिसंबर में हुई थी गिरफ्तारी

परिजनों के अनुसार, प्रोलय चाकी को दिसंबर महीने में पाबना से गिरफ्तार किया गया था। उन पर जुलाई में हुए एक कथित विस्फोट मामले में संलिप्तता का आरोप लगाया गया था, जिसमें अवामी लीग के कई अन्य नेताओं के नाम भी शामिल थे। परिवार का दावा है कि यह मामला राजनीतिक प्रतिशोध के तहत दर्ज किया गया और उन्हें जानबूझकर फंसाया गया।

समय पर इलाज न मिलने का आरोप

परिजनों ने बताया कि प्रोलय चाकी पहले से ही कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे, जिनमें हृदय संबंधी समस्याएं प्रमुख थीं। रविवार शाम उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें दिल का दौरा पड़ा। इसके बाद पुलिस हिरासत में ही उन्हें राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

हिरासत में लापरवाही और दुर्व्यवहार

परिवार ने आरोप लगाया है कि हिरासत के दौरान प्रोलय चाकी को समय पर और उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। एक परिजन ने कहा, “अगर समय रहते सही इलाज मिल जाता, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी।” परिजनों ने हिरासत में दुर्व्यवहार, लापरवाही और स्वास्थ्य को नजरअंदाज करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल

यह घटना बांग्लादेश में हो रही मौतों और हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस का विषय बन गई है। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जबकि परिवार ने न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।