
Union Budget 2026 (सोर्स- पत्रिका)
Finance Minister : आम बजट (Budget 2026) में देश के करदाताओं (Taxpayers) के लिए वित्त मंत्रालय से एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टैक्स के मोर्चे पर आम जनता और कारोबारी जगत को बड़ा सुकून दिया है। सरकार ने 'सोर्स पर टैक्स' यानी टीसीएस (Tax Collected at Source) और टीडीएस (TDS) की दरों में भारी कटौती करते हुए इसे 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया है। यह फैसला सीधे तौर पर आपकी जेब में ज्यादा पैसे बचने का रास्ता साफ करेगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का यह कदम टैक्स सिस्टम को सरल बनाने और करदाताओं के हाथ में लिक्विडिटी (नकदी) बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। अक्सर देखा जाता था कि 5 फीसदी की दर से टैक्स कटने के कारण लोगों का एक बड़ा हिस्सा सरकारी खजाने में लॉक हो जाता था, जिसे वापस पाने के लिए उन्हें रिफंड (Refund) का लंबा इंतजार करना पड़ता था। अब दर घटकर 2 फीसदी होने से यह पैसा तुरंत टैक्सपेयर्स के पास ही रहेगा।
किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
इस कटौती का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो विभिन्न सेवाओं या खरीदारी पर टैक्स देते थे। चाहे वह इंश्योरेंस कमीशन हो, रेंट का भुगतान हो या फिर अन्य निर्दिष्ट श्रेणियां, 5 से 2 प्रतिशत की कटौती का मतलब है कि अब आपके हाथ में खर्च करने या निवेश करने के लिए अधिक पूंजी होगी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जब लोगों के हाथ में पैसा बचता है, तो बाजार में मांग बढ़ती है, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
सरलीकरण की ओर एक बड़ा कदम
बजट भाषण और वित्त विधेयक में संशोधनों के दौरान वित्त मंत्री ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि सरकार का मकसद टैक्स आतंक (Tax Terrorism) को खत्म करना और अनुपालन (Compliance) को आसान बनाना है। 2 प्रतिशत की यह नई दर न केवल मध्यम वर्ग के लिए राहत है, बल्कि छोटे व्यापारियों और सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए भी किसी बूस्टर डोज़ से कम नहीं है।
अब आपको रिफंड क्लेम करने के लिए साल के अंत तक इंतजार नहीं करना होगा, क्योंकि शुरुआत में ही कटने वाली राशि अब आधे से भी कम हो गई है। यह मोदी सरकार के 'ईज ऑफ लिविंग' (Ease of Living) के वादे को पूरा करने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।
इस फैसले पर टैक्स एक्सपर्ट्स और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। जाने-माने टैक्स सलाहकार राजेश गुप्ता का कहना है, "यह एक बहुत ही व्यावहारिक कदम है। 5 फीसदी की दर कई मामलों में ज्यादा थी, जिससे वर्किंग कैपिटल जाम हो जाती थी। 2 फीसदी की दर से अनुपालन बढ़ेगा और टैक्स चोरी की संभावना भी कम होगी।" वहीं, आम टैक्सपेयर्स ने सोशल मीडिया पर इसे 'मिडिल क्लास के लिए संजीवनी' बताया है।
यह नई दरें कब से प्रभावी होंगी, इसे लेकर वित्त मंत्रालय जल्द ही विस्तृत अधिसूचना (Notification) जारी करेगा। आम तौर पर बजट प्रस्तावों के लागू होने की तारीख 1 अप्रैल या 1 अक्टूबर होती है, लेकिन कई बार राहत देने वाले प्रावधान तत्काल प्रभाव से या अगली तिमाही से लागू कर दिए जाते हैं। करदाताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने सीए से संपर्क करें और जानें कि उनके लेन-देन पर यह 2% का नियम कब से लागू हो रहा है।
इस खबर का एक दूसरा पहलू यह भी है कि सरकार अब डिजिटलाइजेशन और हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन पर नजर रख रही है। टैक्स की दर कम करने का एक मनोवैज्ञानिक असर यह होता है कि लोग खुशी-खुशी टैक्स चुकाते हैं और सिस्टम से बाहर (ब्लैक मनी) जाने की कोशिश नहीं करते। यानी, रेट कम करके सरकार टैक्स का दायरा (Tax Base) बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
Updated on:
01 Feb 2026 01:44 pm
Published on:
01 Feb 2026 12:18 pm
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