
ट्रंप और पीएम मोदी (फोटो- एएनआई)
अमेरिका और भारत के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर तस्वीर अब भी पूरी तरह साफ नहीं है। करीब दस दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते की घोषणा की थी, लेकिन अंतिम साइनिंग से पहले शर्तों में अहम बदलाव जारी हैं। व्हाइट हाउस द्वारा जारी फैक्ट शीट में हालिया संशोधनों ने संकेत दिया है कि बैकचैनल बातचीत अब भी चल रही है और भारत ने कुछ संवेदनशील मुद्दों पर अपनी स्थिति मजबूत की है।
ट्रेड डील की पहली फैक्ट शीट में कहा गया था कि भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और कई कृषि उत्पादों पर टैरिफ खत्म या कम करेगा, जिनमें दाले भी शामिल थीं। लेकिन संशोधित दस्तावेज में दालों का जिक्र हटा दिया गया है। यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि दाले भारत के कृषि क्षेत्र के लिए संवेदनशील विषय हैं। भारत दुनिया में करीब 25 से 28 प्रतिशत दालों का उत्पादन करता है और सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है।
पहले अमेरिका के कुछ सीनेटरों ने भारत से 30 प्रतिशत आयात शुल्क हटाने का दबाव बनाया था। यह शुल्क नवंबर से लागू हुआ था और इसे अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ के जवाब के रूप में देखा गया था। अब समझौते के तहत यह शुल्क घटकर 18 प्रतिशत हो चुका है, लेकिन पूरी तरह हटाने की बाध्यता नहीं दिखाई दे रही। दूसरा बड़ा संशोधन भारत की प्रस्तावित खरीद से जुड़ा है। पहले फैक्ट शीट में कहा गया था कि भारत पांच साल में 500 बिलियन डॉलर के अमेरिकी उत्पाद और सेवाएं खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। अब संशोधित दस्तावेज में प्रतिबद्ध की जगह इंटेंड शब्द इस्तेमाल किया गया है। यह छोटा बदलाव आर्थिक रूप से बड़ा फर्क पैदा करता है।
साथ ही, पहले संस्करण में कृषि उत्पादों का स्पष्ट उल्लेख था, जिसे अब हटा दिया गया है। इसका मतलब है कि भारत पर किसी विशेष सेक्टर से अनिवार्य खरीद का दबाव कम हुआ है। इससे भारत को ऊर्जा, आईसीटी और अन्य क्षेत्रों में लचीलापन मिल सकता है। फैक्ट शीट के पुराने संस्करण में कहा गया था कि भारत अपना डिजिटल सर्विस टैक्स हटाएगा। यह बयान विवाद का कारण बना क्योंकि भारत की आधिकारिक संयुक्त घोषणा में ऐसा कोई वादा नहीं था। अब संशोधित दस्तावेज में टैक्स हटाने का जिक्र पूरी तरह हटा दिया गया है।
नए बदलावों के अनुसार, भारत और अमेरिका डिजिटल ट्रेड नियमों पर मजबूत द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। डिजिटल सर्विस टैक्स विदेशी टेक कंपनियों जैसे गूगल और मेटा पर लगाया जाता है, जो बिना भौतिक मौजूदगी के भी देश से राजस्व कमाती हैं। भारत पहले ही 1 अप्रैल 2025 से 6 प्रतिशत इक्वलाइजेशन लेवी खत्म कर चुका है।
Published on:
11 Feb 2026 01:23 pm
