
बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना (Photo-IANS)
Democracy: बांग्लादेश की राजनीति में मचे घमासान के बीच पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना (Sheikh Hasina) के बेटे सजीब वाजेद जॉय (Sajeeb Wazed Joy) ने अंतरिम सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जॉय ने साफ शब्दों में कहा है कि बांग्लादेश में जो कुछ हो रहा है, वह 'इलेक्शन' (Bangladesh Election) नहीं, बल्कि 'सलेक्शन' (चयन) है। उनके मुताबिक, देश की सत्ता पर पकड़ मजबूत करने के लिए एक सोची-समझी साजिश रची जा रही है, जिसका असली मकसद लोकतंत्र को खत्म करना है।
सजीब वाजेद जॉय ने एक साक्षात्कार में दावा किया कि मौजूदा अंतरिम सरकार निष्पक्ष चुनाव करवाने में कोई दिलचस्पी नहीं रखती। उनका आरोप है कि प्रशासन यह तय करने में लगा है कि कौन सत्ता में आएगा और कौन विपक्ष में रहेगा। उन्होंने कहा, "जब आप देश की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी (अवामी लीग) को ही चुनाव से बाहर रखने की कोशिश कर रहे हैं, तो इसे लोकतंत्र कैसे कहा जा सकता है? यह जनता का वोट नहीं, बल्कि कुछ खास लोगों द्वारा किया गया सलेक्शन है।" जॉय का मानना है कि सुधारों के नाम पर चुनाव को जानबूझ कर टाला जा रहा है, ताकि अवामी लीग को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
जॉय ने सबसे बड़ी चिंता कट्टरपंथी संगठन जमात-ए-इस्लामी को लेकर जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि बांग्लादेश का भविष्य अब कट्टरपंथियों के हाथ में जाने वाला है। उनके अनुसार, आने वाले समय में भले ही चेहरा किसी और का हो, लेकिन सरकार का रिमोट कंट्रोल जमात-ए-इस्लामी के पास ही रहेगा। उन्होंने कहा, "जमात अब वह ताकत बन चुकी है जो पर्दे के पीछे से सब कुछ नियंत्रित करेगी। यह न केवल बांग्लादेश के उदारवादी समाज के लिए, बल्कि पड़ोसी देशों की सुरक्षा के लिए भी खतरनाक संकेत है।"
जॉय ने नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। उनका कहना है कि "भीड़ का न्याय" (Mob Justice) अब देश का कानून बन गया है। पुलिस प्रशासन पंगु हो चुका है और अवामी लीग के कार्यकर्ताओं को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है। जॉय ने सवाल उठाया कि एक अलोकतांत्रिक सरकार आखिर कब तक सुधारों की आड़ में सत्ता पर कब्जा जमाए रखेगी ?
शेख हसीना के भारत जाने के बाद से अवामी लीग नेतृत्वहीनता के संकट से जूझ रही है। ऐसे में जॉय के बयान से यह संकेत मिलता है कि पार्टी अब आक्रामक रुख अपनाने की तैयारी में है। उन्होंने साफ किया कि अवामी लीग को राजनीति से मिटाना नामुमकिन है, क्योंकि यह बांग्लादेश की आजादी से जुड़ी हुई पार्टी है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि मौजूदा हालात में निष्पक्ष चुनाव की उम्मीद करना बेमानी है।
बीएनपी (BNP) का पक्ष: खालिदा जिया की पार्टी बीएनपी इसे "हताशा का बयान" बता सकती है। उनका कहना हो सकता है कि अवामी लीग ने अपने शासनकाल में जो किया, यह उसी का परिणाम है।
अंतरिम सरकार: मोहम्मद यूनुस का प्रशासन इस आरोप को खारिज करते हुए इसे "सुधार प्रक्रिया को बाधित करने की कोशिश" करार दे सकता है। वे तर्क देंगे कि निष्पक्ष चुनाव के लिए पहले सिस्टम को ठीक करना जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय: पश्चिमी देश और मानवाधिकार संगठन इस पर नजर बनाए रखेंगे कि क्या वाकई अवामी लीग को चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है, क्योंकि समावेशी चुनाव के बिना लोकतंत्र की बहाली संभव नहीं है।
चुनाव की तारीख: क्या अंतरिम सरकार दबाव में आकर चुनाव की कोई समय सीमा(Deadline) घोषित करती है?
जमात की गतिविधि: क्या जमात-ए-इस्लामी की रैलियों और बयानों में और आक्रामकता आती है?
अवामी लीग का कदम: क्या जॉय के बयान के बाद अवामी लीग के छिपे हुए कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे?
विदेशी राजनयिकों की बैठकें: ढाका में मौजूद अमेरिकी और यूरोपीय संघ के राजदूत इस "सलेक्शन वर्सेस इलेक्शन" के दावे पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
सुरक्षा और सीमा जॉय का यह दावा कि "जमात सब कुछ कंट्रोल करेगी", भारत के लिए खतरे की घंटी है। अगर बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतें हावी होती हैं, तो इसका सीधा असर भारत की पूर्वोत्तर सीमा (North-East border) की सुरक्षा पर पड़ेगा। घुसपैठ की समस्या बढ़ सकती है और भारत विरोधी गुटों को बांग्लादेश में फिर से पनाह मिल सकती है। नई दिल्ली को अब यह देखना होगा कि वह ढाका की नई सत्ता के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को कैसे संतुलित करती है, ताकि अपने सामरिक हितों की रक्षा की जा सके।
Updated on:
03 Feb 2026 01:18 pm
Published on:
03 Feb 2026 01:14 pm
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