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भारत, Jun 06, 2026

Financial Crisis: कंगाली के कगार पर पाकिस्तान! पानी और बिजली प्रोजेक्ट्स के बजट में 80% की भारी कटौती, क्या ठप होंगी योजनाएं

Pakistan economic crisis: पाकिस्तान के जल और बिजली क्षेत्र में आया यह 80% बजट संकट देश की भविष्य की ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के लिए एक बड़ा 'अलार्म' है। वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के बीच, सरकार की विकास की गति को धीमा करना एक मजबूरी बन गया है, जिसका असर आम जनता की बुनियादी जरूरतों पर पड़ना तय है।

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भारत

Jun 06, 2026

diamer bhasha dam funding crisis

पाकिस्तान में जल संकट गहराया । ( फोटो : ANI)

Bankruptcy: 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली का सबसे बड़ा असर अब उसके जल क्षेत्र की विकास योजनाओं पर पड़ने जा रहा है। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए सरकार ने चालू और भविष्य की पानी से जुड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के बजट में भारी कटौती का प्रस्ताव रखा है। जल संसाधन मंत्रालय ने अपनी विभिन्न जरूरी योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार से करीब 969 अरब पाकिस्तानी रुपये की मांग की थी। हालांकि, खस्ताहाल माली हालत को देखते हुए सरकार ने केवल 179 अरब पाकिस्तानी रुपये देने का ही मन बनाया है, जिससे इस क्षेत्र में एक बहुत बड़ा वित्तीय अंतर पैदा हो गया है।

अटकीं 41 परियोजनाएं, नए प्रोजेक्ट के नाम पर खानापूर्ति

रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि अगले वित्तीय वर्ष के विकास एजेंडे में कुल 41 पुरानी चालू परियोजनाएं शामिल हैं, जबकि नई पहल के नाम पर सिर्फ एक ही प्रोजेक्ट को जगह मिल सकी है। यह एकमात्र नई योजना बहुचर्चित दियामेर-भाशा बांध से जुड़ी जलविद्युत उत्पादन सुविधा है, लेकिन इसके लिए भी सरकार ने केवल 500 मिलियन पाकिस्तानी रुपये का बेहद मामूली आवंटन प्रस्तावित किया है। इसके अलावा, मुख्य दियामेर-भाशा बांध के निर्माण कार्य के लिए बजट में 25 अरब पाकिस्तानी रुपये और वहां भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों के लिए 7 अरब पाकिस्तानी रुपये रखने का प्रस्ताव है, जो जरूरत के मुकाबले बेहद कम हैं।

ठप हो सकती है बुनियादी ढांचे की रफ्तार

बजट के ये हैरान करने वाले आंकड़े साफ बताते हैं कि पाकिस्तान का जल क्षेत्र इस समय कितने खतरनाक संसाधन संकट से गुजर रहा है। जरूरत की कुल राशि का पांचवां हिस्सा (20% से भी कम) मिलने के कारण अब देश में बड़े बांधों का निर्माण, पनबिजली उत्पादन, सिंचाई व्यवस्था और जल प्रबंधन से जुड़ी अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजनाओं की रफ्तार पर ब्रेक लगना तय माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि बजट की इस भारी कमी की वजह से प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में सालों की देरी होगी, जिससे पाकिस्तान की लगातार बढ़ती पानी और बिजली की जरूरतों को पूरा करना नामुमकिन हो जाएगा।

अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा विनाशकारी असर

यह वित्तीय तंगी पाकिस्तान के सामने खड़ी व्यापक आर्थिक चुनौतियों को एक बार फिर दुनिया के सामने उजागर करती है। कृषि प्रधान देश होने के नाते पाकिस्तान के लिए सिंचाई, उद्योग और बिजली उत्पादन के वास्ते जल अवसंरचना का मजबूत होना बेहद जरूरी है। इसके बावजूद वित्तीय दबावों ने सरकार के हाथ पूरी तरह बांध दिए हैं। आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि जल भंडारण और नहर प्रणालियों में निवेश न होने से देश का मौजूदा संकट और गहरा जाएगा, जिससे पाकिस्तान की दीर्घकालिक आर्थिक योजनाएं पूरी तरह पटरी से उतर जाएंगी। कुल मिलाकर, इस्लामाबाद की विकास संबंधी इच्छाएं उसकी जमीनी वित्तीय हकीकतों के आगे दम तोड़ती दिख रही हैं।

पाकिस्तानी विशेषज्ञों और अवाम का रुख

पाकिस्तान के आर्थिक विश्लेषकों ने इस बजट प्रस्ताव पर चिंता जताते हुए कहा है कि पानी के बजट पर कैंची चलाने का सीधा मतलब है कि देश को आने वाले समय में भयंकर सूखे और अकाल जैसी स्थिति के लिए तैयार रहना होगा। सोशल मीडिया पर लोग अपनी ही सरकार को कोस रहे हैं कि बुनियादी जरूरतों को छोड़कर बाकी सब जगह पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है।

क्या होगा शहबाज शरीफ का अगला कदम

सूत्रों के मुताबिक, जल संसाधन मंत्रालय इस कम आवंटन के खिलाफ प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के सामने दोबारा गुहार लगाने की तैयारी कर रहा है। यदि बजट में संशोधन नहीं किया गया, तो चीन और अन्य विदेशी कंपनियों के सहयोग से चल रहे कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स का काम बीच में ही रोकना पड़ सकता है।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) पर असर

पाकिस्तान में बन रहे कई बड़े बांध चीनी निवेश और तकनीकी सहायता पर निर्भर हैं। पाकिस्तान के पास अपने हिस्से का फंड न होने के कारण चीनी कंपनियां भी काम की रफ्तार धीमी कर रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में पाकिस्तान का विदेशी कर्ज और इसके ऊपर लगने वाला ब्याज और ज्यादा बढ़ जाएगा।






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