
Sunita Williams(Image-Twitter)
Iconic Space Career: अंतरिक्ष की दुनिया में जब भी किसी जांबाज महिला का नाम लिया जाएगा, सुनीता विलियम्स का जिक्र सबसे पहले होगा। मौत को मात देकर अंतरिक्ष से सुरक्षित लौटने वाली और ब्रह्मांड के अनसुलझे रहस्यों को सुलझाने वाली भारतवंशी सुनीता विलियम्स ने अब नासा (Sunita Williams NASA retirement 2026) से अपनी लंबी और शानदार पारी को विराम दे दिया है। उनके संन्यास की खबर ने न केवल अमेरिका, बल्कि उनके पैतृक देश भारत में भी करोड़ों लोगों को भावुक कर दिया है। 21 जनवरी 2026 को नासा (NASA) ने आधिकारिक तौर पर उनके रिटायरमेंट की घोषणा की, जो 27 दिसंबर 2025 से प्रभावी माना गया है। सुनीता विलियम्स (Sunita Williams Indian origin record) न केवल एक वैज्ञानिक और पायलट रही हैं, बल्कि वे करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा का वो चेहरा हैं, जिन्होंने अंतरिक्ष में भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों (भगवद गीता और समोसे) को जीवित रखा। 608 दिन अंतरिक्ष में बिताने और 9 बार स्पेस वॉक (Most spacewalks by a woman astronaut) करने वाली सुनीता अब अपनी नई पारी की शुरुआत कर रही हैं।
सुनीता विलियम्स का नाम हाल के दिनों में तब सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, जब उनके अंतरिक्ष यान में आई तकनीकी खराबी से पूरी दुनिया की सांसें रुक गई थीं। एक समय ऐसा लग रहा था कि उनका वापस आना नामुमकिन है, लेकिन सुनीता ने हार नहीं मानी। उन्होंने महीनों अंतरिक्ष स्टेशन पर बिताए और विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखा। उनकी यह सुरक्षित वापसी किसी चमत्कार से कम नहीं थी, जिसने साबित कर दिया कि वे वास्तव में एक 'सुपरवुमन' हैं।
भले ही सुनीता विलियम्स का जन्म अमेरिका के ओहियो में हुआ, लेकिन उनका दिल हमेशा भारत के लिए धड़कता रहा। उनके पिता डॉ. दीपक पंड्या गुजरात के झूलासन गांव के रहने वाले थे। सुनीता ने कभी भी अपनी जड़ों को नहीं भुलाया।
वह जब भी अंतरिक्ष यात्रा पर गईं, अपने साथ 'भगवद गीता', भगवान गणेश की मूर्ति और समोसे जैसी भारतीय चीजें लेकर गईं।
वे कई बार गुजरात आईं और अपने गांव के लोगों से मुलाकात की। भारत के लिए वे केवल एक अंतरिक्ष यात्री नहीं, बल्कि एक 'घर की बेटी' जैसी हैं।
सुनीता विलियम्स के नाम अंतरिक्ष जगत के कई बड़े रिकॉर्ड दर्ज हैं। उन्होंने एक महिला अंतरिक्ष यात्री के रूप में सबसे ज्यादा समय तक 'स्पेस वॉक' (Space Walk) करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने अपने करियर में 608 दिन अंतरिक्ष में बिताए हैं। वे एक अनुभवी नेवी कैप्टन और पायलट भी रही हैं, जिन्होंने कई जटिल मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
27 साल तक नासा से जुड़ी रहने वाली सुनीता विलियम्स का रिटायरमेंट एक युग का अंत है। उन्होंने न केवल विज्ञान की सेवा की, बल्कि दुनिया भर की उन लड़कियों को सपने देखना सिखाया जो छोटे शहरों से आती हैं। उन्होंने साबित किया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो आसमान की ऊँचाई भी कम पड़ जाती है। रिटायरमेंट के बाद अब वे अपना समय अगली पीढ़ी के अंतरिक्ष यात्रियों को प्रशिक्षित करने और सामाजिक कार्यों में बिताने की योजना बना रही हैं।
सुनीता विलियम्स का सफर यहीं खत्म नहीं होता। भारत के लिए वे हमेशा गौरव का प्रतीक रहेंगी। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद, भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी (ISRO) भी उनके अनुभवों से लाभ उठाने की उम्मीद कर सकती है। वे एक ऐसी लीजेंड हैं जिन्होंने अंतरिक्ष में तिरंगे की आन, बान और शान को हमेशा ऊँचा रखा।
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Updated on:
21 Jan 2026 04:01 pm
Published on:
21 Jan 2026 04:00 pm
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