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Naval Power: खाड़ी में उतरा अमेरिकी काल, ईरान की सीमा पर मंडरा रहे परमाणु युद्धपोत

Warships-Deployment:मिडल ईस्ट में ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपना परमाणु विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन तैनात किया है। इस कदम से क्षेत्र में युद्ध की आशंका बढ़ गई है और अमेरिकी सैन्य शक्ति मजबूत हुई है।

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भारत

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MI Zahir

Jan 27, 2026

US-Iran Conflict

अमेरिकी नौसेपा का युद्धपोत यूएसएस लिंकन। ( फोटो: US Navy )

Combat-Power: मिडल ईस्ट में जारी भारी तनाव और ईरान के साथ बढ़ते टकराव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन (CVN-72) अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ मध्य पूर्व क्षेत्र में पहुंच चुका है। इस कदम को ईरान और उसके समर्थित समूहों की ओर से मिलने वाली संभावित धमकियों के खिलाफ एक मजबूत जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने इस तैनाती की पुष्टि करते हुए संकेत दिया है कि क्षेत्र में इजराइल और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। USS अब्राहम लिंकन अकेला नहीं है; इसके साथ विध्वंसक युद्धपोत और उन्नत लड़ाकू विमानों का एक पूरा बेड़ा तैनात है, जो किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत कार्रवाई करने में सक्षम है।

USS अब्राहम लिंकन: समुद्र में अमेरिका की अजेय शक्ति

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यूएसएस अब्राहम लिंकन अमेरिकी नौसेना का एक निमित्ज़-क्लास (Nimitz-class) परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विमानवाहक पोत है। यह वर्तमान में दुनिया के सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में गिना जाता है। इसे आधिकारिक तौर पर 11 नवंबर 1989 को अमेरिकी नौसेना की सेवा में शामिल किया गया था। यह लगभग 35 वर्षों से अधिक समय से सक्रिय सेवा में है और इसने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया है।

अभूतपूर्व क्षमताएं और ताकत

परमाणु शक्ति: यह युद्धपोत दो परमाणु रिएक्टरों (Nuclear Reactors) द्वारा संचालित होता है, जिससे यह बिना ईंधन भरे लगभग 20 से 25 सालों तक लगातार समुद्र में रह सकता है।

विमानों का बेड़ा: इस पर 85 से 90 लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं। इसमें आधुनिक F-35C लाइटनिंग II और F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट जैसे घातक लड़ाकू विमान शामिल हैं।

विशाल आकार: इसकी लंबाई लगभग 1,092 फीट (333 मीटर) है और इसका वजन करीब 1,00,000 टन (Full Load) है।

चालक दल: इस जहाज पर एक साथ 5,000 से अधिक नौसैनिक और वायुसेना कर्मी रह सकते हैं।

सुरक्षा प्रणाली: यह पोत उन्नत रडार सिस्टम, मिसाइल डिफेंस सिस्टम (जैसे सी-स्पैरो मिसाइल) और पानी के भीतर टारपीडो से बचने वाली तकनीक से लैस है।

अब्राहम लिंकन की ताकत: समुद्र में तैरता किला

USS अब्राहम लिंकन अमेरिकी नौसेना के सबसे आधुनिक विमानवाहक पोतों में से एक है। यह परमाणु ऊर्जा से संचालित होता है और इस पर दर्जनों F-35C लाइटनिंग II और F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट जैसे घातक लड़ाकू विमान तैनात रहते हैं। इसकी उपस्थिति का सीधा मतलब यह है कि अमेरिका अब इस क्षेत्र में हवाई और समुद्री प्रभुत्व बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।

ईरान और इजराइल के बीच है 'सस्पेंस'

पिछले कुछ हफ्तों में ईरान की ओर से इजराइल पर हमले की चेतावनियां लगातार बढ़ी हैं। अमेरिका का प्राथमिक उद्देश्य इजराइल की सुरक्षा सुनिश्चित करना और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी सैन्य उपस्थिति का मकसद दुश्मन को हमला करने से पहले सोचने पर मजबूर करना है।

अमेरिका की मारक क्षमता दुगुनी

सुरक्षा का दोहरा घेरा अब्राहम लिंकन के पहुंचने से पहले ही अमेरिका ने इस क्षेत्र में USS जॉर्जिया नामक गाइडेड मिसाइल पनडुब्बी और अतिरिक्त लड़ाकू विमानों की तैनाती कर दी थी। अब इस नए स्ट्राइक ग्रुप के पहुंचने से अमेरिका की मारक क्षमता दुगुनी हो गई है।

"युद्ध रोकने की अंतिम कोशिश"

अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक हलकों में इस तैनाती को "युद्ध रोकने की अंतिम कोशिश" माना जा रहा है। जबकि ईरान ने इसे उकसावे वाली कार्रवाई बताया है, इजरायल ने अमेरिकी सहयोग का स्वागत किया है। सोशल मीडिया पर भी रक्षा विशेषज्ञों के बीच चर्चा तेज है कि क्या यह तैनाती किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन की शुरुआत है या केवल एक रणनीतिक दबाव।

युद्धाभ्यास कर सकती है अमेरिकी नौसेना

आने वाले दिनों में अमेरिकी नौसेना क्षेत्र में अपने सहयोगियों के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास कर सकती है। पेंटागन की गतिविधियों पर नजर रखने वाले सूत्रों का कहना है कि यदि तनाव कम नहीं हुआ, तो भूमध्य सागर से और अधिक युद्धपोतों को लाल सागर की ओर मोड़ा जा सकता है।

तेल की आपूर्ति सुरक्षित रखना मिशन का अघोषित हिस्सा

इस सैन्य हलचल का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ने की आशंका है। खाड़ी क्षेत्र से होने वाली तेल की आपूर्ति सुरक्षित रखना भी इस मिशन का एक अघोषित हिस्सा है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई भी अवरोध पैदा होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है।