
वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले की ईरान ने निंदा की है। (स्क्रीन शॉट: X Handle/ Oil London)
Us Venezuela attack: वेनेजुएला पर अमेरिकी सेना की भीषण बमबारी (Trump Venezuela Airstrike) ने खाड़ी देशों से लेकर एशिया तक हड़कंप मचा गया है। जहाँ एक तरफ राजधानी काराकास मिसाइल हमलों से दहल रही (Caracas Explosions Today) है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने इस हमले (Us Venezuela attack) की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'खुली डकैती और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद' करार दिया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर अमेरिका को आगाह किया है कि लैटिन अमेरिका में छिड़ी यह आग पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकती है।
ईरान ने वेनेजुएला के साथ अपनी एकजुटता दिखाते हुए कहा है कि वाशिंगटन ने एक संप्रभु राष्ट्र की गरिमा पर प्रहार किया है। तेहरान ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि वेनेजुएला पर हमला केवल एक देश पर हमला नहीं, बल्कि उन सभी राष्ट्रों के लिए चेतावनी है, जो अमेरिकी वर्चस्व को स्वीकार नहीं करते। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा:"हम वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिकी सैन्य आक्रमण की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। यह हमला संयुक्त राष्ट्र के चार्टर का उल्लंघन है। अमेरिका को यह समझ लेना चाहिए कि 'धौंस की राजनीति' का दौर अब खत्म हो चुका है।"
ईरान और वेनेजुएला के गहरे रिश्ते हैं। दोनों देश ओपेक (OPEC) के सदस्य हैं और लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहे हैं। ईरान ने अतीत में वेनेजुएला को तेल टैंकर भेज कर और तकनीकी मदद देकर अमेरिका को चुनौती दी है। अब अमेरिका की ओर से वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर नियंत्रण करने की कोशिशों के कारण ईरान ने इसे 'वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर हमला' बताया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस संकट में वेनेजुएला को सैन्य और खुफिया सहायता प्रदान कर सकता है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले से पहले निकोलस मादुरो को 'अल्टीमेटम' दिया था कि वे देश छोड़ कर चले जाएं, वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहें। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, मादुरो ने 'सेफ पैसेज' के ऑफर को ठुकरा दिया, जिसके बाद ट्रंप ने 'सर्जिकल स्ट्राइक' के आदेश दे दिए। शनिवार तड़के काराकास के सैन्य ठिकानों पर गिरी मिसाइलों ने यह स्पष्ट कर दिया कि ट्रम्प अब 'सद्दाम हुसैन स्टाइल' में मादुरो के शासन का अंत करना चाहते हैं।
वेनेजुएला की रक्षा के लिए वहां तैनात रूसी $S-300VM$ मिसाइल सिस्टम और चीनी रडार तकनीक इस वक्त सक्रिय हैं। ईरान भी इस तकनीकी मोर्चे पर वेनेजुएला की मदद करता रहा है। यदि अमेरिका इन सुरक्षा घेरों को तोड़ने में सफल रहता है, तो यह रूस और चीन के लिए बहुत बड़ा रणनीतिक झटका होगा। उधर, तेहरान में भी इस बात को लेकर हलचल तेज है कि क्या अमेरिका इस बहाने ईरान के तेल टैंकरों को भी निशाना बनाएगा?
संयुक्त राष्ट्र में ईरान, रूस और चीन ने एक संयुक्त मोर्चा बनाकर अमेरिका की घेराबंदी की है। ईरान ने माँग की है कि अमेरिका को इस 'अपराध' के लिए जवाबदेह ठहराया जाए। वहीं, अमेरिका का तर्क है कि वह केवल अपनी सीमा की सुरक्षा के लिए 'नार्को-टेररिज्म' के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। लेकिन दुनिया इसे 'कोल्ड वार 2.0' की शुरुआत मान रही है, जहाँ लैटिन अमेरिका एक बड़ा रणक्षेत्र बन गया है।
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लव सोनकर
लव सोनकर - 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई संस्थानों में अपना योगदान दि है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता ए...और पढ़ें...
Updated on:
03 Jan 2026 07:15 pm
Published on:
03 Jan 2026 04:41 pm

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