7 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भारतीय भाषाएं संवाद ही नहीं संस्कृति की विरासत

Ahmedabad. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को ‘भारतीय भाषा परिवार’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ हुआ। शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा समिति के सहयोग से आयोजित अधिवेशन के पहले दिन विवि की कुलपति डॉ. अमी उपाध्याय ने कहा कि भारतीय भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार और संस्कृति […]

less than 1 minute read
Google source verification
Baou

Ahmedabad. डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ओपन यूनिवर्सिटी में शुक्रवार को ‘भारतीय भाषा परिवार’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन का शुभारंभ हुआ।

शिक्षा मंत्रालय की भारतीय भाषा समिति के सहयोग से आयोजित अधिवेशन के पहले दिन विवि की कुलपति डॉ. अमी उपाध्याय ने कहा कि भारतीय भाषाएं केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कार और संस्कृति की जीवंत विरासत हैं, जो विविधता में एकता को सशक्त बनाती हैं।

गुजरात साहित्य अकादमी के अध्यक्ष भाग्येश झा ने भाषा को सामूहिक चेतना का प्रतिबिंब बताया।

बिरसा मुंडा ट्राइबल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. मधुकरभाई पड़वी ने आदिवासी बोलियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि लिपि के अभाव में इन्हें गौण मानना उचित नहीं है, क्योंकि ये ज्ञान-वहन का सशक्त माध्यम हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. रवि प्रकाश टेकचंदानी तथा गुजरात साहित्य अकादमी के महामात्र प्रो . जयेंद्रसिंह जादव ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

दो शोध ग्रंथों का विमोचन

उद्घाटन सत्र के प्रारंभ में भारतीय भाषा समिति द्वारा तैयार किए गए दो महत्वपूर्ण शोधग्रंथ ‘भारतीय भाषा परिवार: अ न्यू फ्रेमवर्क इन लिंग्विस्टिक्स’ और ‘कलेक्टेड स्टडीज ऑन भारतीय भाषा परिवार: पर्सपेक्टिव्स एंड होराइजन्स’ का अतिथियों ने विमोचन किया। प्रो. योगेंद्र पारेख ने स्वागत किया, डॉ. अर्चना मिश्रा ने कार्यक्रम का संचालन किया, डॉ. बिंदितारानी बेहेरा ने आभार व्यक्त किया।