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चना उत्पादन में बढ़ी अजमेर की चमक,MSP पर नहीं हो पाती पूरी खरीद, किसान खुले बाजार में बेचने को मजबूर

Ajmer shines in gram Production: अजमेर जिले में रबी की फसल में 50 फीसदी तक भागीदारी रखने वाला चना किसान के जीवन में चमक नहीं बिखेर पा रहा है। अच्छे मुनाफे की आस में चने की बंपर बुवाई करने वाले किसान को इसके पूरे दाम तक नहीं मिल पा रहे।

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कृषि उपज मंडी में चने की बिकवाली, पत्रिका फोटो

कृषि उपज मंडी में चने की बिकवाली, पत्रिका फोटो

Ajmer shines in gram Production: अजमेर जिले में रबी की फसल में 50 फीसदी तक भागीदारी रखने वाला चना किसान के जीवन में चमक नहीं बिखेर पा रहा है। अच्छे मुनाफे की आस में चने की बंपर बुवाई करने वाले किसान को इसके पूरे दाम तक नहीं मिल पा रहे।

सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चने की खरीद करती है, लेकिन पूरा चना नहीं खरीदा जाने से किसान इसे खुले बाजार में कम दाम में बेचने को मजबूर है। एजेंट और व्यापारी इसी चने को उनसे खरीदकर इसके अन्य उत्पाद तैयार कर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। इस चने से बनी दाल, बेसन, नमकीन समेत अन्य खाद्य पदार्थ कई गुना अधिक दामों पर बिक रहे हैं।

इस वर्ष 3 लाख हेक्टेयर से ज्यादा बुवाई

जिले में इस वर्ष 3 लाख 24 हजार 901 हेक्टेयर में रबी की फसलों की बुवाई की गई है। इसमें से 1 लाख 61 हजार 997 हेक्टेयर क्षेत्र में चने की बुवाई की गई है। अन्य दालों की मात्र 38 हैक्टेयर में बुवाई हुई है। खाद्यान्न में 65 हजार 100 हेक्टेयर में गेहूं, 25 हजार 808 हेक्टेयर में जौ की बुवाई हुई है। इसी तरह 54 हजार 999 हेक्टेयर में सरसों, 1890 हेक्टेयर में तारामीरा, 219 हेक्टेयर में अन्य रबी तिलहन, 14 हजार 950 हेक्टेयर में हरा चारा व अन्य की बुवाई की गई है। उल्लेखनीय है कि क्या चने की फसल 15 अक्टूबर के आस-पास बुवाई के बाद 25 मार्च तक तैयार होती है।

इन गांवों में अधिक बुवाई

जिले के चना उत्पादन में अग्रणी गांवों में सराना, बोराड़ा, काशीर, सांदोलिया, नागोला, पनाहेड़ा, एकलसिंहा, बडली, शोकलिया, सनोद, लोहरवाड़ा, भटियानी, खीरियां, बड़गांव, जोतायां, टांटोटी, फतेहगढ़, मरायला, बेगलियास, कोटड़ी, जाजोता, करेवड़ी आदि गांव शामिल हैं। अरांई, सरवाड़, भिनाय, केकड़ी, मसूदा, बिजयनगर उपखंड जहां चने के बड़े उत्पादक रहे हैं, वहीं इस साल अच्छी बरसात होने से रूपनगढ़ क्षेत्र में भी किसानों ने चने की बुवाई में रुझान दिखाया है।

बेचने में आती है दिक्कत

जानकारी के अनुसार इतने बढ़े स्तर पर चने का उत्पादन करने के बाद भी किसान को चना बेचने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर चने की खरीद करती है। इसकी अवधि लगभग 90 दिन होती है, लेकिन ऑनलाइन टोकन में नंबर नहीं आने समेत विभिन्न कारणों से लगभग 45 दिन ही खरीद हो पाती है। इसमें लघु सीमांत किसान 25 क्विंटल तक चना बेच सकता है। इसमें 45 दिन बाद कोटा बढ़ाया जाता है। इसे बढ़ाकर 40 क्विंटल तक किया जा सकता है, लेकिन किसानों का कहना है कि यह मात्रा भी काफी कम है। क्योंकि लघु सीमांत किसान के लिए 2 हेक्टेयर भूमि का निर्धारण है। ऐसे में यदि किसान की 2 हेक्टेयर में औसतन 60 क्विंटल चने की पैदावार हुई तो वह अपना पूरा चना एमएसपी पर नहीं बेच पाता और यह सस्ते दामों पर खुले बाजार में बेचना पड़ता है।

अन्य प्रदेशों में भेजते हैं माल

केकड़ी में तैयार हो रही दालें गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश समेत देश के कई अन्य राज्यों में भेजी जा रही हैं।

चने से बनने वाले उत्पाद

  • चना दालबेसन
  • नमकीन- पापड़

-बेसन की मिठाई

केकड़ी में हैं 10 से अधिक मिल

जिले में केकड़ी क्षेत्र में 5 बड़ी समेत 10 से अधिक दाल मिल हैं। इनमें दालों को साफ करने, छीलने (दाल बनाने), पॉलिश करने और पैक करने का काम होता है। इससे कच्ची दालें खाने योग्य तैयार दालों में बदल जाती हैं। इनमें चने, मूंग व उड़द की दालें प्रमुख हैं।