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Alwar News : थाने पहुंचा युवक बोला-अच्छे से होटल में तुरंत रूम बुक कराओ… शक होने पर पुलिस ने फर्जी आईपीएस को पकड़ा

उत्तर प्रदेश का एक युवक भिवाड़ी के पुलिस थाने में पहुंचा और बोला-मैं आईपीएस अधिकारी सौरभ तोमर हूं। मेरे लिए किसी अच्छे से होटल में तुरंत रूम बुक कराओ, रात को ठहरना है। शक होने पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

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अलवर

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kamlesh sharma

Jan 17, 2026

फोटो पत्रिका नेटवर्क

अलवर। उत्तर प्रदेश का एक युवक भिवाड़ी के पुलिस थाने में पहुंचा और बोला-मैं आईपीएस अधिकारी सौरभ तोमर हूं। मेरे लिए किसी अच्छे से होटल में तुरंत रूम बुक कराओ, रात को ठहरना है। शक होने पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। यह युवक फर्जी आईपीएस (भारतीय पुलिस सेवा) का अधिकारी बनकर सरकारी कर्मचारियों-अधिकारियों पर रौब झाड़ता था। टोल टैक्स एवं अन्य सरकारी-निजी सेवाओं का गलत फायदा उठाता था। आरोपी का नाम सौरभ तोमर है। पेशे से यह सॉफ्टवेयर डेवलपर है और उत्तरप्रदेश के बागपत जिले के कांडेरा रमाला गांव निवासी है। पुलिस ने इसके कब्जे से एक कार, एआईजी व एसपीजी का फर्जी परिचय पत्र (आई कार्ड) तथा एक डमी वायरलेस हैंडसेट जब्त किया है।

ऐसे खुली पोल

थानाधिकारी सचिन शर्मा ने बताया कि 16 जनवरी को हेड कांस्टेबल सुनील कुमार डीओ ड्यूटी पर तैनात था। इसी दौरान रात्रि साढ़े नौ बजे एक युवक थाने पहुंचा, जिसने कार्गो पेंट में वायरलेस हैंडसेट टांगा हुआ था। युवक ने अपना परिचय सौरभ तोमर आईपीएस राजस्थान कैडर बताया। वर्तमान में एसपीजी में डेपुटेशन पर असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल रैंक बताया। राजकार्य में भिवाड़ी आना बताया, रात्रि होने की वजह से विश्राम के लिए होटल में कमरा बुक कराकर रुकवाने के लिए कहा। उसने हेड कांस्टेबल से गाड़ी से सामान उतारने को कहा।

गाड़ी में सामान बिखरा हुआ था, जिसमें एक निजी कंपनी का परिचय पत्र था, जो कि सौरभ तोमर का था। उसमें को-फाउंडर और सीटीओ लिखा था और मोबाइल नंबर लिखा हुआ था। गाड़ी में सौरभ का आधार कार्ड, पासपोर्ट, बैंक पासबुक मिली। सभी दस्तावेज में घर का अलग-अलग पता मिला। गाड़ी में केबल, लैपटॉप और अन्य सामान बिखरा होने पर उक्त युवक के आईपीएस अधिकारी होने पर पुलिस को शक हो गया।

पूछताछ में बताया पूरा सच

शक होने पर पुलिस डीओपी राजस्थान की सिविल लिस्ट में आइपीएस अधिकारी के विवरण में जानकारी देखी। इसमें उक्त नाम का कोई अधिकारी नहीं मिला। सौरभ तोमर से पदस्थापन के संबंध में जरूरी जानकारी लेने पर वह खुद को आईपीएस की जगह सीआइएसएफ कमांडेंट बताने लगा। सख्ती से पूछने पर बताया कि वह आईपीएस अधिकारी नहीं है। टोल टैक्स बचाने एवं विभिन्न कार्यालयों में सरकारी कर्मचारियों अधिकारियों पर रौब झाड़ने के लिए फर्जी आइपीएस बनकर घूमता था।