
फोटो पत्रिका
Plastic Waste Recycling: अलवर जिले के रामगढ़ व राजगढ़ ब्लॉक की 150 से अधिक महिलाओं ने प्लास्टिक कचरा निस्तारण की मिसाल कायम की है। इन महिलाओं ने करीब तीन माह में 10 हजार किलो से अधिक प्लास्टिक कचरा एकत्रित किया और री-साइक्लिंग करके उससे पाइप, टाइल्स, बोर्ड, बेंच और दूसरे टिकाऊ उत्पाद बनाए।
इसके लिए रामगढ़ में प्लांट लगाया गया है। ये उत्पाद अलवर, भरतपुर व आसपास के जिलों में बिक्री के लिए भेजे जा रहे हैं। ये महिलाएं एमसीबी प्लास्टिक 15 रुपए किलो, पॉलीथिन बैग 8 रुपए किलो, प्लास्टिक नाली पाइप 7 रुपए किलो, मिश्रित प्लास्टिक 5 रुपए किलो की दर से खरीद रही हैं। इनके प्लास्टिक पाइप की मजबूती अच्छी-खासी कंपनियों के पसीने छुड़ा रही है।
इन महिलाओं ने जिला परिषद के सहयोग से प्लास्टिक री-साइक्लिंग (पुनर्चक्रण) का प्लांट खड़ा कर लिया और पाइप से लेकर तमाम उत्पाद बनाकर अलवर व आसपास के शहरों में बिक्री को भेज रही हैं। यह मॉडल जिले के अन्य ब्लॉकों में भी लागू करने की तैयारी है।
अलवर में 90 हजार से अधिक राजीविका के महिला स्वयं सहायता समूह हैं, जो किसी न किसी कार्य में जुटे हुए हैं। रामगढ़ में करीब 18 हजार महिलाएं समूहों से जुड़ी हैं। यहां क्लस्टर मैनेजर निशा चावला को जिला परिषद ने प्लास्टिक कचरा प्रबंधन पर काम करने की ट्रेनिंग दी और फिर निशा ने प्लास्टिक री-साइक्लिंग का प्लांट खड़ा कर लिया। अपने साथ करीब 150 महिलाओं को जोड़ा।
प्लास्टिक कचरा कम करने का अभियान महिला सशक्तीकरण और नवाचार की दिशा में एक आंदोलन है। महिलाएं बदलाव के प्रतीक के रूप में उभर रही हैं। प्लास्टिक कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदलने की इस पहल से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं ग्रामीण इलाकों में आजीविका पैदा कर रहा है।
स्वयं सहायता समूह की महिलाएं घर-घर जाकर प्लास्टिक कचरा एकत्रित कर उससे होने वाले नुकसान के बारे में लोगों को बता रही हैं। लोग इस प्लास्टिक को जलाने या खुले में फेंकने की जगह, इन्हें महिलाओं को बेच कर पैसा कमा रहे हैं।
ये हुए लाभ
Updated on:
02 Feb 2026 07:27 pm
Published on:
02 Feb 2026 07:26 pm
बड़ी खबरें
View Allअलवर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
