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टहला क्षेत्र के अनेक गांवों में आंवले के बगीचे से किसानों को हो रहा मोटा मुनाफा

राजगढ़. उपखंड के टहला क्षेत्र के कई गांवों में किसान अब आंवले के बगीचों से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। राजगढ़ पंचायत समिति के पूर्व प्रधान महन्त जयराम दास स्वामी ने बताया कि उन्होंने अपने गांव घाटड़ा में आन्ध्रप्रदेश से चकईयां किस्म के आंवले के 600 पौधे मंगवाकर सात बीघा भूमि में रोपे थे। इनसे […]

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राजगढ़. उपखंड के टहला क्षेत्र के कई गांवों में किसान अब आंवले के बगीचों से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। राजगढ़ पंचायत समिति के पूर्व प्रधान महन्त जयराम दास स्वामी ने बताया कि उन्होंने अपने गांव घाटड़ा में आन्ध्रप्रदेश से चकईयां किस्म के आंवले के 600 पौधे मंगवाकर सात बीघा भूमि में रोपे थे। इनसे अब एक बीघा भूमि में लगभग 150-200 क्विंटल आंवले का उत्पादन होता है और वर्तमान में बाजार में आंवले की कीमत 20-25 रुपए प्रति किलो है। उन्होंने अपने बगीचे का 5 माह के लिए ठेका दिया है, जिससे उन्हें करीब 6 लाख की आमदनी हो रही है।

महन्त जयराम दास स्वामी ने बताया कि उनके किए प्रयासों से प्रेरित होकर क्षेत्र के अन्य किसानों ने भी आंवले के पौधे अपने खेतों में लगाए हैं। धौंली खान गांव में पप्पू शर्मा ने 10 बीघा भूमि में 1000 पेड़ हैं। पप्पू बलाई के 3 बीघा भूमि में 250 पेड़ हैं।इसी तरह जयसिंहपुरा में नारायण सहाय मीना ने 8 बीघा भूमि में 600 पौधे लगाए थे जो पेड़ बन चुके हैं। किशन मीना की 10 बीघा भूमि में 800 पेड़ आंवले के हैं। जयराम मीना के 4 बीघा भूमि में 400 पेड़ हैं। मल्लाना में अभिमन्यु मीना ने 5 बीघा बगीचे में 400 पौधे लगाए हैं। इसके अलावा पाराशर में 4 बीघा बगीचे में 300 और पालपुर में जगदीश मीना ने 3 बीघा बगीचे में 300 पौधे लगाए थे जो पेड़ बन गए। इन सभी किसानों ने आंवले के बगीचों से अच्छा मुनाफा कमाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। क्षेत्र के कई अन्य स्थानों पर भी आंवले के पौधों का रोपण कर बगीचे लगाए जा रहे हैं।आंवले से उत्पादों का निर्माण और सप्लाई

महन्त जयरामदास स्वामी ने बताया कि आंवले से दवाइयों का पाउडर, अचार, साबुन, कैंडी, मुरब्बा, रस सहित अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं। ये उत्पाद दिल्ली, उत्तर प्रदेश, जयपुर, उत्तराखंड जैसे स्थानों पर सप्लाई किए जाते हैं।बगीचे की सही देखभाल और ठेके का लाभ

जयरामदास स्वामी का कहना है कि आंवले के पौधे 25-25 फीट की दूरी पर लगाए जाने चाहिए, ताकि पौधों को सही से पानी मिल सके और उत्पादन में वृद्धि हो सके। उन्होंने अपने बगीचे में पौधे 20-20 फीट की दूरी पर लगाए थे। अधिकांश बगीचों वाले आंवले के पेड़ों का ठेका देते हैं, जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हो रही है। यदि किसान खुद आंवला बेचें, तो उन्हें और भी अधिक मुनाफा मिल सकता है।