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लोकसभा में कम वोट प्रतिशत ने उड़ाई नींद…समझिए अब क्या है जीत-हार का गणित

लोकसभा चुनाव के पहले चरण में भाजपा और कांग्रेस की तैयारियां धरी रह गई। निर्वाचन विभाग भी तमाम प्रयासों के बावजूद वोट प्रतिशत नहीं बढ़ा पाया। कोई भी यह नहीं भांप पाए कि आखिर जनता के मन में चल क्या रहा है ? पार्टियां दावे करती रही कि हमने मतदाता को पोलिंग स्टेशन तक लाने का प्लान तैयार कर लिया है।

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अलवर

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Umesh Sharma

Apr 21, 2024

अलवर।

लोकसभा चुनाव के पहले चरण में भाजपा और कांग्रेस की तैयारियां धरी रह गई। निर्वाचन विभाग भी तमाम प्रयासों के बावजूद वोट प्रतिशत नहीं बढ़ा पाया। कोई भी यह नहीं भांप पाए कि आखिर जनता के मन में चल क्या रहा है ? पार्टियां दावे करती रही कि हमने मतदाता को पोलिंग स्टेशन तक लाने का प्लान तैयार कर लिया है। इस बार सर्वाधिक मतदान होगा।
अब मतदान प्रतिशत घटा तो दोनों ही पार्टियों की नंद उड़ी हुई है। पिछले कई चुनावों की पड़ताल करें तो यह बात सामने आ रही है कि वोटिंग प्रतिशत बढ़ने में हमेशा भाजपा को फायदा होता आया है। लेकिन इसका एक पहलू यह भी है कि जब सरकार के खिलाफ एंटी इनकमबेंसी होती है, तब भी लोग ज्यादा वोटिंग करते हैं। कम वोटिंग प्रतिशत रहने पर कांग्रेस को फायदा मिलता आया है। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि कम वोटिंग मतलब जनता की सरकार के प्रति आस्था है। हालांकि कई मौकों पर ये मिथक टूटते भी नजर आए हैं।

दोनों पार्टियों को जीत की आशा

कम वोटिंग प्रतिशत रहने पर भी भाजपा को जीत की पूरी आशा है। भाजपा नेता बाकायदा वोटों का गणित बताकर जीत का दावा कर रहे हैं। यह जरूर कह रहे हैं कि जीत का अंतर बम्पर नहीं होगा, लेकिन जीत जरूर होगी। वहीं, कांग्रेस ने कम वोट प्रतिशत के आधार पर जीत का दावा किया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इतिहास उठाकर देख लीजिए जब भी वोटिंग प्रतिशत कम रहा है, सत्ता कांग्रेस के हाथ आई है।

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ये फैक्टर भी कर रहे काम

-कम वोटिंग प्रतिशत की वजह यह भी है कि लोगों के पास भाजपा और कांग्रेस के अलावा तीसरा कोई विकल्प नहीं था।
-धूप और गर्मी ने भी वोटर्स की राह रोकी। तीन दिन का लगातार अवकाश था, इसलिए बिना वोट दिए ही लोग घूमने निकल गए।
-मतों का ध्रुवीकरण नहीं हुआ, इस वजह से भी बम्पर वोटिंग नहीं हुई, जबकि विधानसभा चुनाव में ध्रुवीकरण देखने को मिला था।