नरेगा (वीबी-जी राम जी) में काम बंद होता जा रहा है। प्रदेश की 446 ग्राम पंचायतों में नरेगा का काम बंद हो गया है। केंद्र सरकार की ओर से जारी नई गाइडलाइन जुलाई से शुरू होनी वाली है। उससे पहले ही काम बंद होना चिंता का विषय है। हालांकि सरकार का कहना है कि नई गाइडलाइन के अनुसार मजदूरों को ज्यादा काम मिलेगा।
नरेगा (वीबी-जी राम जी) की केंद्र सरकार की ओर से जारी नई गाइडलाइन जुलाई से शुरू होनी वाली है। उससे पहले ही प्रदेश की 446 ग्राम पंचायतों में नरेगा का काम बंद हो गया है। कुछ जिलों को छोड़ दें तो ज्यादातर जगहों पर भी स्थिति अच्छी नहीं कही जा सकती। अलवर में भी महज 17 हजार से अधिक मजदूरों को कार्य दिया गया है। कोरोना काल में यह रिकॉर्ड काफी अच्छा था, लेकिन अब कम होता जा रहा है।
प्रदेश के धौलपुर, झुंझुनूं जिले मजदूरों को काम देने में सबसे पीछे चल रहे हैं। सर्वाधिक काम देने वाले जिलों में भीलवाड़ा है, जहां 2 लाख से अधिक मजदूरों को काम दिया गया है। अजमेर, बांसवाड़ा में योजना के तहत मजदूरों से खूब काम करवाया जा रहा है। प्रदेश में 11309 ग्राम पंचायतों में 10863 ग्राम पंचायतों में काम चल रहा है। इनमें 17 लाख 55 हजार 565 मजदूर कार्य कर रहे हैं।
भीलवाड़ा जिला 2 लाख 67 मजदूरों को हर माह काम देकर नंबर एक पर है। डूंगरपुर 1 लाख 44 हजार 647 मजदूरों को काम देकर दूसरे नंबर पर है। तीसरे नंबर पर अजमेर जिला है, जहां 1 लाख 25 हजार 903 लोगों को रोजगार दिया गया। चौथे नंबर पर बांसवाड़ा है। यहां पर 1 लाख 13 हजार मजदूरों को काम दिया गया। उदयपुर का आंकड़ा 98 हजार 276 का है। सरकार ने इन जिलों में किए जा रहे कार्यों को आधार मानकर अन्य जिलों को भी काम करने की सीख दी है ताकि अधिक से अधिक मजदूरों को कार्य मिल सके।
अलवर में 17 हजार 61 मजदूरों को काम मिला है। झुंझुनूं में 8471 लोगों को ही काम मिला। यह जिला मजदूरों को काम देने में सबसे पीछे है। धौलपुर में भी 11679 ही मजदूरों को काम मिल पाया। सीकर का रिकॉर्ड भी अधिक अच्छा नहीं है। यहां भी केवल 12,464 मजदूरों को काम दिया गया है। जयपुर में 27,345 मजदूरों को काम मिला। जोधपुर में 51 हजार मजदूरों को काम देने में सफल रहा।
प्रदेश सरकार ने नरेगा की जगह बीवी जी राम जी योजना की गाइडलाइन एक जुलाई से लागू करने जा रही है। ऐसे में सभी जिलों से सरकार ने कहा है कि वह नरेगा के सभी कार्य पूरे कर दें ताकि नई गाइड लाइन के मुताबिक नई योजना को आगे बढ़ाया जा सके। इसको लेकर अलवर में भी तैयारी चल रही है। सीईओ सालुखे गौरव रविंद्र ने कहा कि योजना के तहत लंबित कार्यों को पूरा करवाया जा रहा है।