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Alwar News: हनुमान सर्किल से भूगोर तिराहा के बीच बना रेलवे ओवरब्रिज होगा फोरलेन, 111 करोड़ आएगी लागत

एनएच 248ए पर हनुमान सर्किल से भूगोर तिराहा के बीच बना रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) अब फोरलेन होगा। इस मार्ग को भी चौड़ा किया जाएगा। इस कार्य पर 111 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

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हनुमान सर्किल से भूगोर तिराहे के बीच बने इस ओवरब्रिज को फोरलेन किया जाएगा। फोटो: पत्रिका

अलवर। एनएच 248ए पर हनुमान सर्किल से भूगोर तिराहा के बीच बना रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) अब फोरलेन होगा। इस मार्ग को भी चौड़ा किया जाएगा। इस कार्य पर 111 करोड़ रुपए खर्च होंगे। पीडब्ल्यूडी एनएच ने यह प्रस्ताव तैयार करके केंद्र सरकार को भेजा है। इस मार्ग पर रिडकोर का भी हक है। ऐसे में जहां आवश्यकता होगी, वहां पीडब्ल्यूडी एनएच इस एजेंसी की भी मदद लेगा। जयपुर से दिल्ली मार्ग एनएच 248ए अलवर में उमरैण होते हुए कटीघाटी से भूगोर तिराहा, हनुमान सर्किल होते हुए दिल्ली रोड तक जाता है।

पिछले चार से पांच साल में इस हाईवे पर वाहनों की संख्या दोगुनी हो गई। साथ ही, कटीघाटी का घुमाव भी वाहनों की रफ्तार रोकता है। इसे देखते हुए अलवर के भूगोर तिराहे से हनुमान सर्किल तक 5.6 किमी लंबे मार्ग को फोरलेन करने का प्रस्ताव लाया गया। इसके बीच में फौजी राज ढाबे के पास ओवरब्रिज बना हुआ है जो टूलेन है। इसे भी फोरलेन बनाया जाएगा। मार्ग में आ रहे अतिक्रमण भी हटाए जाएंगे। पीडब्ल्यूडी एनएच के पास अपनी खुद की जमीन भी इस मार्ग पर है। ऐसे में अधिग्रहण की जरूरत नहीं होगी।

कटीघाटी में पहले ही अंडरपास प्रस्तावित

उमरैण से कटीघाटी आ रहे इस मार्ग को सीधे भूगोर तिराहे पर उतारा जाएगा, जिससे घुमाव खत्म हो जाएगा। कटीघाटी में अंडरपास बनाया जाएगा। इसका प्रस्ताव भी पीडब्ल्यूडी एनएच ने तैयार कर लिया है, जिसकी राशि केंद्र सरकार को वहन करनी है।

केंद्र सरकार को भेजा प्रस्ताव

पीडब्ल्यूडी एनएच के एक्सईएन वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि हनुमान सर्किल से भूगोर तिराहे तक मार्ग को फोरलेन किया जाएगा। साथ ही, एक ओवरब्रिज को भी फोरलेन किया जाएगा। इस पर 111 करोड़ रुपए खर्च होंगे। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। जल्द मंजूरी की उम्मीद है।

काली मोरी अंडरपास: सुरक्षा दीवार नहीं बनी, बारिश में घुसेगा पानी

इधर, प्री-मानसून की बारिश दस्तक देने लगी है। मानसून इसी महीने के आखिरी सप्ताह में दस्तक देगा। ऐसे में काली मोरी अंडरपास में पानी घुसने की आशंका है। जानकारों का कहना है कि पानी घुसने से मिट्टी का कटाव हो सकता है, जिससे हादसे की आशंका बनेगी। इस समय पीडब्ल्यूडी ने अंडरपास का काम बंद किया हुआ है। केवल बॉक्स के ऊपर सुरक्षा दीवार का एक हिस्सा जरूर तैयार किया, लेकिन उससे जलभराव नहीं रुक सकेगा।

काली मोरी अंडरपास का निर्माण चार साल बाद शुरू हुआ। करीब 50 फीसदी कार्य पूरा हो गया। इसके बाद पीडब्ल्यूडी को काम में तेजी लाते हुए सुरक्षा दीवार का कार्य पूरा करना था, ताकि बारिश का पानी इसके अंदर प्रवेश न कर सके। साथ ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम तैयार करते, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हो पाया। कई दिन से काम बंद है, जबकि इसे आगे बढ़ाना था। जानकारों का कहना है कि कोटा में अंडरपास की मिट्टी धंसने से दो इंजीनियरों की जान चली गई। इस हादसे के बाद पीडब्ल्यूडी को जागना चाहिए, लेकिन काम में तेजी को देखकर नहीं लगता कि विभाग पर इसका असर हुआ है।