ATM News: देश में चलन में मौजूद नकदी रिकॉर्ड 42.54 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई है, लेकिन ATM इंडस्ट्री का कहना है कि मशीनों तक पर्याप्त कैश नहीं पहुंच रहा।
Cash in Circulation: क्या आपको भी इन दिनों एटीएम से कैश निकालने में दिक्कत हुई है? एटीएम पर गए और वहां नकदी नहीं थी? दरअसल, एटीएम ऑपरेटर्स के संगठन ने नकदी की कमी की शिकायत की है। दूसरी तरफ देश में नकदी की कोई कमी नहीं है। उल्टा हाल यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में घूम रही नकदी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। अब सवाल उठ रहा है कि जब सिस्टम में रिकॉर्ड कैश मौजूद है तो फिर कुछ ATM खाली होने की नौबत क्यों आ रही है?
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 22 मई तक देश में चलन में मौजूद कुल नकदी 42.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यह एक साल पहले के मुकाबले करीब 12 फीसदी ज्यादा है। इसके बावजूद ATM ऑपरेटर्स का कहना है कि उन्हें मशीनों में भरने के लिए जरूरत के मुताबिक नकदी नहीं मिल रही है।
ATM ऑपरेटर्स, कैश लॉजिस्टिक्स कंपनियों और इससे जुड़ी सर्विसेस देने वाली संस्थाओं के संगठन CATMi ने इस मुद्दे को लेकर इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) को पत्र लिखा है। इंडस्ट्री के अनुमान के अनुसार मार्च और अप्रैल दोनों महीनों में ATM भरने के लिए करीब 94,000 करोड़ रुपये की जरूरत थी। लेकिन मार्च में केवल 61,000 करोड़ रुपये और अप्रैल में करीब 54,000 करोड़ रुपये ही उपलब्ध हो पाए।
दरअसल, ATM चलाना अब पहले जितना आसान और सस्ता नहीं रहा। मशीनों में नियमित रूप से कैश पहुंचाना, सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना, तकनीकी रखरखाव करना और नकदी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना लगातार महंगा होता जा रहा है। ईंधन की कीमतें बढ़ी हैं, कर्मचारियों का खर्च बढ़ा है और नकदी परिवहन की लागत भी ऊपर चली गई है। दूसरी तरफ कमाई का जरिया कमजोर पड़ रहा है। RBI के आंकड़े बताते हैं कि एटीएम से होने वाले लेनदेन में लगातार गिरावट आ रही है। मई महीने में ATM ट्रांजैक्शन घटकर 44.65 करोड़ रह गए, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 49.84 करोड़ था। निकासी की कुल रकम में भी कमी आई है।
एटीएम के यूज में गिरावट की सबसे बड़ी वजह UPI और डिजिटल भुगतान का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल माना जा रहा है। लोग अब छोटी-बड़ी खरीदारी से लेकर बिल पेमेंट तक के लिए मोबाइल से भुगतान कर रहे हैं। नतीजा यह हुआ कि ATM का इस्तेमाल कम हो गया। हालांकि, मशीनों की संख्या और उनका रखरखाव लगभग पहले जैसा ही है। यानी खर्च वही है लेकिन उपयोग कम हो रहा है।
अगर यह स्थिति आगे बढ़ती है तो सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो सकती है जिनकी रोजमर्रा की जिंदगी अभी भी नकदी पर टिकी हुई है। ग्रामीण और छोटे शहरों की तस्वीर अलग है। कई बुजुर्ग, पेंशनधारक, किसान, छोटे दुकानदार और सरकारी योजनाओं के लाभार्थी आज भी नकदी निकालने के लिए ATM पर निर्भर रहते हैं। ऐसे इलाकों में अगर किसी ATM में कैश खत्म हो जाए तो दूसरा ATM कई किलोमीटर दूर हो सकता है। इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल भुगतान की सीमित पहुंच भी समस्या को बढ़ा सकती है।
RBI के नियमों के तहत बैंकों की जिम्मेदारी है कि ATM में समय पर नकदी उपलब्ध कराई जाए। यदि लंबे समय तक या बार-बार किसी इलाके में ATM खाली रहने की शिकायतें आती हैं, तो नियामक कार्रवाई और जुर्माना भी लगाया जा सकता है। हालांकि, किसी एक ATM में कभी-कभार नकदी खत्म होना बड़ी समस्या नहीं माना जाता। RBI की नजर उन मामलों पर रहती है जहां बड़ी संख्या में ग्राहक प्रभावित हो रहे हों।