R Ashwin on Test Cricket: पूर्व खिलाड़ी रविचंद्रन अश्विन ने भारत के टेस्ट क्रिकेट को बचाने की लड़ाई पर चिंता जताई है। उनका ये बयान तब आया है, जब भारतीय टेस्ट क्रिकेट काफी मुश्किल दौर से गुजर रहा है।
R Ashwin on Test Cricket: भारत के पूर्व ऑफ स्पिन ऑलराउंडर आर अश्विन का मानना है कि टेस्ट क्रिकेट का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि फर्स्ट-क्लास क्रिकेट को युवा खिलाड़ियों के लिए आकर्षक बनाया जाए। क्रिकइन्फो ऑनर्स अवार्ड्स 2026 में बोलते हुए अश्विन ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट को बचाने की चुनौती भारत से कहीं आगे तक फैली हुई है और यह ग्लोबल खेल के सामने एक बड़ा मुद्दा है।
अश्विन की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब भारत की टेस्ट टीम मुश्किल दौर से गुजर रही है। 2024 में न्यूजीलैंड और 2025 में दक्षिण अफ्रीका से लगातार घरेलू मैदान पर मिली हार ने सबसे लंबे फॉर्मेट में टीम के प्रदर्शन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। इंग्लैंड में कड़ी मेहनत से मिली 2-2 से सीरीज ड्रॉ के अलावा भारत पिछले दो सालों में टेस्ट क्रिकेट में लगातार संघर्ष कर रहा है।
भारतीय टीम के प्रदर्शन में यह गिरावट कई बड़े खिलाड़ियों के बाहर जाने के साथ हुई है। रोहित शर्मा, विराट कोहली और चेतेश्वर पुजारा के साथ अश्विन खुद इस फॉर्मेट से हट गए हैं, जिससे टीम शुभमन गिल की कप्तानी में पुनर्निर्माण के फेज में है। इस सदी के टॉप-25 क्रिकेटरों में शामिल होने के बाद अश्विन ने उभरते हुए खिलाड़ियों के लिए घरेलू टेस्ट क्रिकेट को और फायदेमंद बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि फर्स्ट-क्लास क्रिकेट को खिलाड़ियों के लिए काफी आकर्षक होना चाहिए। बीसीसीआई ने सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव करके एक कोशिश की है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि टेस्ट क्रिकेट सिर्फ भारत की समस्या है, यह ग्लोबल है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या खिलाड़ियों को टेस्ट क्रिकेट अपनाने के लिए काफी बढ़ावा दिया जा रहा है?
अश्विन ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट की डिमांड मैदान पर फैंस जो देखते हैं, उससे कहीं ज्यादा है। पांच-दिन के मैच खेलने का फिजिकल और मेंटल स्ट्रेन, बहुत ज्यादा ट्रैवल और लगातार रिकवरी की जरूरत के साथ, इस फॉर्मेट को एक चैलेंजिंग करियर चॉइस बना सकता है।
उन्होंने कहा कि यह एक मुश्किल काम है, जब खिलाड़ी कुछ महीने खेलकर अच्छी कमाई कर सकते हैं। फिर भी, टेस्ट क्रिकेट खेलने और अपने शरीर को दांव पर लगाने के बाद, मैं कह सकता हूं कि एक मुश्किल टेस्ट मैच के आखिर में जो एहसास होता है, उसकी तुलना किसी और चीज से नहीं की जा सकती। इसकी जगह कोई नहीं ले सकता। अगर आप टेस्ट क्रिकेट को लेकर सीरियस हैं, तो युवा क्रिकेटरों को थोड़े पुराने जमाने के कोच से ट्रेनिंग लेनी चाहिए।