What is Monsoon : राजस्थान में मानसून का बेसब्री से इंतजार है। मौसम विभाग के नए अपडेट के अनुसार मानसून 15-20 जून के बीच राजस्थान में प्रवेश कर सकता है। जानिए मानसून क्या है और कैसे ये बारिश लाता हैं!
What is Monsoon : राजस्थान में मानसून का बेसब्री से इंतजार है। मौसम विभाग के नए अपडेट के अनुसार इस बार मानसून 15 से 20 जून के बीच राजस्थान में प्रवेश कर सकता है। जानिए मानसून क्या है और कैसे ये बारिश लाता हैं! दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत की अर्थव्यवस्था कृषि अपश्चिम या और भारत की जीवन रेखा है। दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर जेहन में सवाल उठता है कि यह कहां बनता है और कैसे बारिश लाता है।
दरअसल में हवाओं के मौसमी परिवर्तन और उनसे होने वाली वर्षा की प्रणाली को मानसून कहते हैं। देश की कुल बारिश की 70-75 फीसदी मानसून ही लाता है। गर्मियों में भारतीय उपमहाद्वीप तेजी से गर्म होता है, जिससे उत्तर भारत में हवाओं का निम्न दबाव का क्षेत्र बनता है। वहीं हिंद महासागर पर उच्च दबाव रहता है। इस दबाव के अंतर के कारण दक्षिण-पश्चिम दिशा से नम हवाएं भारतीय भूमि की ओर खिंचकर आती हैं।
हवाएं अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर आती हैं, जिससे भारी बारिश होती है। मानसून हवाओं के दो मुख्य रूट अरब सागर और बंगाल की खाड़ी की शाखा है। अरब सागर में ये हवाएं केरल से शुरू होकर मुंबई, गुजरात, राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ती है। बंगाल की खाड़ी की तरफ से ये हवाएं अंडमान-निकोबार से शुरू होकर पूर्वोत्तर राज्यों, बंगाल, बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ती है।
भविष्य में मौसम की स्थिति जैसे वर्षा, तापमान, आर्द्रता, हवा की गति और दिशा का वैज्ञानिक अनुमान मौसम पूर्वानुमान कहलाता है। आइएमडी समुद्री सतह के तापमान, वायुमंडलीय दबाव, अल नीनो-ला नीना तथा अन्य वैश्विक मौसमीय कारकों का विश्लेषण करके पूर्वानुमान तैयार करता है। किसान बुवाई, सिंचाई, उर्वरक उपयोग, फसल सुरक्षा और कटाई से संबंधित निर्णय पूर्वानुमान के आधार पर बेहतर ढंग से कर सकते हैं।
केरल भारत का दक्षिण-पश्चिमी तटीय राज्य है, जो समुद्र के सबसे निकट स्थित है। इसलिए अरब सागर से आने वाली मानसूनी हवाएं सबसे पहले केरल पहुंचती हैं। आइएमडी वर्षा, हवाओं की दिशा, बादलों की स्थिति और अन्य मौसमीय मापदंडों के आधार पर केरल में मानसून के आगमन की आधिकारिक घोषणा करता है।
केरल पहुंचने की सामान्य तिथि 1 जून है। कई बार तय समय से कुछ दिन पहले या कुछ देरी से भी पहुंचता रहा है। इस बार यह तीन दिन देरी से पहुंचा। केरल में प्रवेश के बाद हवाओं की गति की अनुकूलता से मानसून 15 जुलाई तक पूरे भारत को कवर कर लेता है।
मानसून ट्रफ निम्न वायुदाब की एक लंबी पट्टी होती है जो मानसून के दौरान उत्तर भारत में विकसित होती है और वर्षा को प्रभावित करती है। वायुदाब एक ऐसा क्षेत्र जहां आसपास के क्षेत्रों की तुलना में कम होता है। यह बादलों और वर्षा के विकास में सहायक होता है। डिप्रेशन निम्न वायुदाब का अधिक संगठित और मजबूत रूप, जो भारी वर्षा का कारण बन सकता है।
अलनीनो में प्रशांत महासागर के जल का असामान्य रूप से गर्म हो जाना। इससे भारतीय मानसून कमजोर हो सकता है। ला नीना में प्रशांत महासागर के जल का सामान्य से अधिक ठंडा होना। इससे भारत में सामान्य या बेहतर वर्षा की संभावना बढ़ती है।
मौसम विभाग के अनुसार मानसून 15 से 20 जून के बीच मध्यप्रदेश, गुजरात व राजस्थान में प्रवेश कर सकता है। 5 जुलाई तक पूरे देश को कवर कर लेगा। इससे पहले देश के अलग-अलग हिस्सों में प्री-मानसून की बारिश होगी। मानसून 13 सितंबर से लौटना शुरू होगा।