Middle East Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर तेज हो गया है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान की करीब 24 अरब डॉलर की जब्त संपत्तियों से पश्चिम एशिया में हुए हमलों के नुकसान की भरपाई की योजना बनाई है। इसी बीच इजरायल के लेबनान और हिजबुल्लाह ठिकानों पर हमलों से क्षेत्र में हालात और गंभीर हो गए हैं, जिससे व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।
US on Iran frozen assets: अमेरिका अब ईरान के जब्त किए गए करीब 24 बिलियन डॉलर के फंड्स का इस्तेमाल पश्चिम एशिया में अपने मित्र देशों को हुए नुकसान की भरपाई में कर सकता है। डोनाल्ड ट्रंप सरकार चाहती है कि क्षेत्र में हमलों की आर्थिक कीमत ईरान चुकाए। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि खाड़ी देशों से यह आकलन किया जाए कि युद्ध में हुए नुकसान को सही करने के लिए उन्हें कितनी रकम की जरूरत पड़ेगी। जब्त ईरानी संपत्तियों में विदेशी बैंकों में जमा ईरानी फंड, तेल टैंकर और अन्य संपत्तियां शामिल हो सकती हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक इंटरव्यू में कहा कि वह समझौते से पहले ईरान की जब्त संपत्तियों को जारी नहीं करेंगे। समझौता होता तो वॉशिंगटन ईरान के साथ मिलकर यूरेनियम को हटाकर नष्ट करेगा। डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते के करीब होने का दावा किया और कार्रवाई की धमकी भी दी। वहीं ईरान के उपराष्ट्रपति रेजा आरेफ ने सेना और शीर्ष नेतृत्व में मतभेद होने के अमेरिकी दावे को नकारते हुए अफवाह करार दिया है।
इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर रविवार को बढ़े हमले किए। द.लेबनान के साथ राजधानी बेरूत पर बमबारी हुई। ईरान ने इन हमलों का दर्दनाक जवाब देने की धमकी दी है।
डोनाल्ड ट्रंप ने लेबनान में हिजबुल्लाह पर और सर्जिकल स्ट्राइक की वकालत की है। पिछले हफ्ते ही ट्रंप ने लेबनान पर हमलों को लेकर इजरायली पीएम को फटकार लगाई थी। वहीं ताजा बयान से लेबनान में युद्ध और भड़कने की आशंका बढ़ गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि यह किसी नए युद्ध की शुरुआत नहीं, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया एक आवश्यक कदम था। उन्होंने इस धारणा को भी खारिज किया कि इस कार्रवाई के जरिए उन्होंने नए युद्धों से दूर रहने के अपने पुराने चुनावी वादे का उल्लंघन किया है।
एक विशेष साक्षात्कार में ट्रंप से पूछा गया कि क्या ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई उनके उस लंबे समय से दोहराए गए वादे के विपरीत है, जिसमें उन्होंने अमेरिका को नए सैन्य संघर्षों से दूर रखने की बात कही थी।
इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। उनके अनुसार, एक शक्तिशाली और संभावित रूप से खतरनाक देश को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना आवश्यक था, क्योंकि उनका मानना है कि ऐसे हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि उनका प्राथमिक दायित्व अमेरिका के हितों और सुरक्षा की रक्षा करना है तथा उनकी नीति हमेशा 'अमेरिका फर्स्ट' रही है।