
ashoknagar district hospital (file photo)
mp news: मध्यप्रदेश के अशोकनगर शहर के निजी अस्पताल में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने डॉक्टरों और परिजनों के होश उड़ा दिए हैं। यहां एक महिला ने एक ऐसे बच्चे को जन्म दिया है, जो शारीरिक रूप से बेहद जटिल और दुर्लभ चुनौतियों से जूझ रहा है। जन्मजात विकृति ऐसी है कि बच्चे का न तो मलद्वार है और न ही यूरिन का रास्ता। इसके अलावा मासूम के दोनों पैर भी टेढ़े हैं। बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत भोपाल रैफर किया गया था, लेकिन किन्हीं कारणों से परिजन उसे वापस अशोकनगर ले आए। फिलहाल मासूम को जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में भर्ती किया गया है। डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ चौबीसों घंटे उसकी निगरानी कर रहे हैं, लेकिन बच्चे की शारीरिक संरचना ने उनके सामने बड़ी दुविधा खड़ी कर दी है।
चिकित्सा विज्ञान कहता है कि नवजात के लिए मां का पहला गाढ़ा दूध (कोलेस्ट्रम) जीवन रक्षक होता है और उसे हर दो घंटे में स्तनपान कराना जरूरी है। लेकिन इस मासूम के मामले में डॉक्टर बेबस हैं। शरीर में निकासी का रास्ता न होने के कारण उसे मां का दूध नहीं दिया जा रहा है। क्योंकि यदि उसे दूध पिलाया गया तो पेट फूलने और जहर फैलने का खतरा बढ़ सकता है। फिलहाल मासूम को केवल ड्रिप के जरिए जिंदा रखने की कोशिश की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि बच्चा अभी बहुत छोटा है। निकासी का रास्ता बनाने के लिए जटिल सर्जरी की आवश्यकता है, लेकिन मासूम का शरीर अभी इतने बड़े ऑपरेशन को सहने की स्थिति में नहीं दिख रहा है। बिना पोषण (दूध) के बच्चा कमजोर हो रहा है और बिना ऑपरेशन के उसे पोषण देना जानलेवा साबित हो सकता है। तमाम मुश्किलें हैं जिसके कारण बच्चे की जान खतरे में है।

Published on:
10 Feb 2026 10:25 pm
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