
Aaj Ka Panchang 1 Feb 2026 : रविवार का पंचांग 1 फरवरी 2026
Aaj Ka Panchang 1 Feb 2026 : आज माघ मास की माघी पूर्णिमा है, जो स्नान-दान, व्रत और पुण्य कर्मों के लिए विशेष मानी जाती है। आज रविपुष्य योग, सर्वार्थसिद्धि योग और राजयोग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे दिन अत्यंत शुभ फलदायी रहेगा। पंचांग के अनुसार आज शुभ चौघड़िया, राहुकाल, दिशा शूल, तिथि, नक्षत्र, योग-करण, व्रत-त्योहार, मेले तथा आज जन्मे बच्चों की राशि और स्वभाव की विस्तृत जानकारी यहां दी गई है। दैनिक कार्य, यात्रा, पूजा-पाठ और शुभ आरंभ से पहले आज का पंचांग अवश्य देखें।
| विवरण श्रेणी | पंचांग विवरण (Details) |
| विक्रम संवत् | 2082 |
| संवत्सर का नाम | सिद्धार्थ |
| शक संवत् | 1947 |
| हिजरी सन् | 1447 |
| मुस्लिम मास | 12 साबान |
| अयन | उत्तरायण |
| ऋतु | शिशिर ऋतु |
| मास (महीना) | माघ |
| पक्ष | शुक्ल |
आज दिन में चर का चौघड़िया 8.38 से 9.58 तक रहेगा, लाभ व अमृत के चौघड़िये क्रमशः 9.58 से 12.40 तक रहेंगे. शुभ का चौघड़िया 2.01 से 3.22 तक रहेगा. इन चौघड़ियों में शुभ कार्य प्रारम्भ किए जा सकते हैं।
दिशा शूल - आज पश्चिम दिशा में दिशा शूल रहेगा । इसलिए आज पश्चिम दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए।
उपाय - यदि पश्चिम दिशा में यात्रा करना आज आवश्यक हो और टालना संभव ना हो तो यात्रा प्रारंभ करने से पूर्व शुद्ध घी अथवा शिखरन या खीर खाकर, जल से भरे कलश का शगुन लेकर यात्रा प्रारंभ करें।
राहु काल वेला - (मध्यमान से) दिन 4.30 से 6.00 तक
उपाय - राहु काल में शुभ कार्यों का प्रारंभ नहीं करना चाहिए। यदि कार्य को टाला जाना संभव ना हो तो मिष्ठान्न का सेवन करके ही कार्य प्रारंभ करें। इससे राहुकाल का दुष्प्रभाव कम होगा।
तिथि – पूर्णिमा तिथि रात्रि 3.39 तक होगी तदुपरान्त प्रतिपदा तिथि होगी ।
नक्षत्र – पुष्य नक्षत्र रात्रि 11.58 तक होगा तदुपरान्त अश्लेषा नक्षत्र होगा ।
योग – प्रीति योग दिन 10.19 तक रहेगा तदुपरान्त आयुष्मान योग रहेगा ।
करण – विष्टि करण सायं 4.46 तक रहेगा तदुपरान्त बव करण रहेगा।
विशिष्ट योग - सर्वार्थसिदधि, रविपुष्य व राजयोग सूर्योदय से रात 11-58 तक ।
व्रत / दिवस विशेष – भद्रा दिन 4-46 तक, माघी पूर्णिमा, सत्य पूर्णिमा व्रत, माघ स्नान समाप्त, होलिका रोपण, गुरु रविदास जयंती, मुख्य मेला वेणेश्वर डूगरपुर (राज.), मरु महोत्सव जैसलमेर (राज.) व मेला मस्तुआणां समाप्त (पं.), अग्नि उत्सव (उड़ी.), रविपुष्य योग, गंडमूल प्रारंभ रात्रि 11-58 से,
चन्द्रमा – आज सम्पूर्ण दिन रात्रि कर्क राशि में होगा ।
| तिथि एवं दिन | प्रमुख त्यौहार एवं उत्सव | ग्रह गोचर (बदलाव) | शुभ योग एवं विशिष्ट समय |
| 2 फरवरी (सोमवार) | दस्तकार दिवस; ब्रज महोत्सव (भरतपुर) प्रारंभ | — | गंडमूल: संपूर्ण दिन-रात; कुमारयोग: रात्रि 10:48 से 01:53 तक |
| 3 फरवरी (मंगलवार) | शब-ए-बारात (मुस्लिम त्यौहार) | बुध का कुंभ राशि में प्रवेश (रात्रि 09:52); शुक्र बाल्यत्व समाप्त (रात्रि 09:15) | गंडमूल: रात्रि 10:11 तक; राजयोग: रात्रि 10:11 से प्रारंभ |
| 4 फरवरी (बुधवार) | विश्व कैंसर दिवस; विवाह मुहूर्त (उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र) | हर्षल (Uranus) मार्गी (सुबह 08:05) | भद्रा: दोपहर 12:25 से रात्रि 12:10 तक; राजयोग: रात्रि 10:13 तक |
| 5 फरवरी (गुरुवार) | चतुर्थी व्रत; विवाह मुहूर्त (उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र) | शुक्र का कुंभ राशि में प्रवेश (रात्रि 01:11) | चन्द्रोदय (जयपुर): रात्रि 09:41 |
| 6 फरवरी (शुक्रवार) | — | सूर्य का धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश (दोपहर 02:05) | कुमारयोग: सूर्योदय से रात्रि 12:24 तक |
| 7 फरवरी (शनिवार) | — | बुध का शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश (शाम 04:31) | महापात योग: रात्रि 09:37 से 02:22 तक; सर्वार्थसिद्धि योग: रात्रि 02:28 से प्रारंभ |
| 8 फरवरी (रविवार) | श्री नाथ जी पाटोत्सव (नाथद्वारा, राज.) | बुध का पश्चिम में उदय (शाम 06:17) | भद्रा: दोपहर 03:58 तक; रवियोग: अंतरात्रि 05:03 तक |
आज जन्म लेने वाले बच्चे – आज जन्म लेने वाले बच्चों की राशि कर्क होगी ।
आज रात्रि 11.58 तक जन्म लेने वाले बच्चों का पुष्य नक्षत्र होगा तदुपरान्त अश्लेषा नक्षत्र होगा ।
आज जन्मे बच्चों का रजत पाद होगा ।
आज जन्म लेने वाले बच्चों के प्रथम नामाक्षर हु, हे, हो, डा, डी, डू पर रखे जा सकते हैं।
कर्क राशि के स्वामी चन्द्र हैं. यह जल प्रधान राशि है. ये बहुत भावुक होते हैं. भावनाओं के आवेग में बहने के करण चंचल प्रकृति के और बार बार निर्णय बदलने वाले हो सकते हैं. सुन्दर व आकर्षक होते है. व्यवहार मिलनसार होता है. कला, संगीत, साहित्य प्रेमी, कल्पनाशील, धार्मिक, दयालु, सहृदय, ईमानदार होते हैं. ऐसे बच्चे सभी के मनोभावों को आसानी से समझने वाले होते हैं. ये प्राकृतिक सौंदर्य, कला-संगीत व् साहित्य में विशेष रूचि रखते हैं तथा सौंदर्यानुभूति भी विशेष रूप से रखते हैं। ऐसा जातक परिस्थितियों के अनुसार ढ़ल जाने वाला, प्यार सम्बन्धो में सच्चा, ईमानदार और सहृदय-दयालु प्रकृति का होता हैं। ऐसा जातक दिल से जिस काम को करना चाहे कर ही लेता हैं। इनके आय के साधन एक से अधिक होते हैं। इनकी कल्पना शक्ति प्रबल होती हैं। अन्य पुरुष के भावो को शीघ्र समझ लेने की विशेष क्षमता होती हैं।
पुष्य नक्षत्र में जन्मे जातक सतर्क, कार्य निपुण, तीव्र बुद्धि वाले, अत्यधिक भावुक और संवेदनशील होते हैं। ये बहुत गुणवान, विद्वान, शास्त्रज्ञ, साहित्यप्रेमी, घैर्यवान, जनप्रिय, नियमपालक, व्यवस्थाप्रिय, धनी और चतुर होते हैं। इन्हें प्राचीन पुस्तकें, पौराणिक ज्ञान और पुरातत्त्व में विशेष रूचि होती है। शिक्षा व प्रशिक्षण सम्बन्धी कार्य, उत्खनन, तेल, पेट्रोल, कोयला, पेट्रोल पम्प, वन विभाग, कृषि, कुआं, नहर, खाई. तालाब, सुरंग की खुदाई एवं निर्माण, जेलर व न्यायाधीश, भूमिगत कार्य एवं जलीय पदार्थों से सम्बन्धित व्यवसाय में अच्छी उन्नति करते हुए देखा जा सकता है।
अश्लेशा नक्षत्र में जन्मे व्यक्तियों का प्राकृतिक गुण सांसारिक उन्नति में प्रयत्नशीलता है। ये त्वरित उत्तर देने वाले, उत्तम वक्ता एवं स्तरीय लेखक होते हैं। विनोदीस्वभाव वाले, कई भाषाओँ के ज्ञाता, कला, संगीत व साहित्य में रुचि वाले, यात्राप्रिय, अविश्वासी, कृतज्ञ, आलसी, स्वार्थीं हो सकते हैं। ये लोग व्यापार, विक्रय प्रतिनिधि, कलाकार, संगीतकार, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, पत्रकार, लेखक, टाइपिस्ट, लेखाकार, ऑडिटर, दुभाषिया़ राजदूत, गाइड, परिचारिका, नर्स, ज्योतिषी, गणितज्ञ, जलदाय विभाग, वस्त्र निर्माण इंजीनियर, ठेकेदार, सूत, कागज, पेन, स्टेशनरी का व्यापार करते हुए उन्नति पाते हैं।
Published on:
31 Jan 2026 01:09 pm
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