
Aaj Ka Panchang 10 February 2026 :आज का पंचांग 10 फरवरी 2026 (फोटो सोर्स: Patrika Design Team)
Aaj Ka Panchang 10 February 2026: आज का पंचांग मंगलवार, 10 फरवरी 2026 को दिनभर के शुभ-अशुभ समय की विस्तृत जानकारी देता है। इसमें तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहुकाल, चौघड़िया, दिशा शूल और विशेष मुहूर्त शामिल हैं। साथ ही आज जन्म लेने वाले बच्चों की राशि, नामाक्षर और स्वभाव की जानकारी भी दी गई है, जिससे आप अपने दिन की बेहतर योजना बना सकें।
| क्रम संख्या | विवरण (विवरण) | जानकारी |
|---|---|---|
| 1 | विक्रम संवत् | 2082 |
| 2 | संवत्सर नाम | सिद्धार्थ |
| 3 | शक संवत् | 1947 |
| 4 | हिजरी सन् | 1447 |
| 5 | मु. मास | 21 सावान |
| 6 | अयन | उत्तरायण |
| 7 | ऋतु | शिशिर ऋतु |
| 8 | मास | फाल्गुन |
| 9 | पक्ष | कृष्ण |
आज चर का चौघड़िया 9.56 से 11.19 तक रहेगा, लाभ व अमृत के चौघड़िये क्रमशः 11.19 से 2.04 तक रहेंगे. शुभ का चौघड़िया 3.26 से 4.48 तक रहेगा. इन चौघड़ियों में शुभ कार्य प्रारम्भ किए जा सकते हैं।
दिशा शूल - आज उत्तर दिशा में दिशा शूल रहेगा । इसलिए आज उत्तर दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए।
उपाय - यदि उत्तर दिशा में यात्रा करना आज आवश्यक हो और टालना संभव ना हो तो यात्रा प्रारंभ करने से पूर्व गुड़, केले अथवा काञ्जीबड़ा का सेवन करके, शुभ शगुन लेकर यात्रा प्रारम्भ करें।
राहु काल वेला - (मध्यमान से) दिन 3.00 से 4.30 तक
उपाय - राहु काल में शुभ कार्यों का प्रारंभ नहीं करना चाहिए। यदि कार्य को टाला जाना संभव ना हो तो मीठे पेय पदार्थ सेवन करके ही कार्य प्रारंभ करें। इससे राहुकाल का दुष्प्रभाव कम होगा।
तिथि – अष्ठमी तिथि प्रातः 7.28 तक होगी तदुपरान्त नवमी तिथि होगी ।
नक्षत्र – विशाखा नक्षत्र प्रातः 7.55 तक होगा तदुपरान्त अनुराधा नक्षत्र होगा ।
योग – ध्रुव योग रात्रि 1.42 तक रहेगा तदुपरान्त व्याघात योग रहेगा ।
करण – कौलव करण प्रातः 7.28 तक रहेगा तदुपरान्त तैतिल करण रहेगा।
व्रत / दिवस विशेष – अष्टमी तिथि वृद्धि, (विवाह मुहर्त्त अनुराधा नक्षत्र में)
चन्द्रमा – आज सम्पूर्ण दिन रात्रि वृश्चिक राशि में होगा ।
आज जन्म लेने वाले बच्चे – आज जन्म लेने वाले बच्चों की राशि वृश्चिक होगी ।
आज प्रातः 7.55 तक जन्म लेने वाले बच्चों का विशाखा नक्षत्र होगा तदुपरान्त अनुराधा नक्षत्र होगा ।
आज जन्मे बच्चों का ताम्र पाद होगा ।
आज जन्म लेने वाले बच्चों के प्रथम नामाक्षर तो, न, नी, नू, ने पर रखे जा सकते हैं।
वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल होता हैं। ऐसे जातक स्थिर प्रवृति के होते हैं। ये जिद्दी, साहसी, उत्साही, व्यवहार-कुशल, स्पष्टवादी, परिश्रमी, कर्तव्यनिष्ट, ईमानदार, समझदार, ज्ञानी, साहसी, दृढ़संकल्प, शीघ्र उत्तेजित हो जाने वाले व अपनी मेंहनत से कार्य करने वाले होते हैं। ऐसे जातक जिस कार्य को करने का निश्चय कर लेते हैं उसे दृढ़तापूर्वक पालन करने का प्रयास भी करते हैं। ये केमिस्ट, इंजिनियर, वकील, पुलिस, सेना-विभाग, अध्यापन, ज्योतिष, अनुसंधानकर्ता के क्षेत्र में विशेष सफलता प्राप्त करते हैं।
Published on:
09 Feb 2026 12:32 pm
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