
पूर्व GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह फोटो सोर्स वायरल वीडियो
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में इस्तीफा देने वाले अयोध्या के जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह एक बार फिर चर्चा में हैं। चर्चा है कि इस्तीफे के बाद उन्हें पुलिस लखनऊ ले गई। इस बीच उन पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र और अवैध वसूली जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। जिससे मामला और गहरा गया है।
अयोध्या में तैनात जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने मंगलवार दोपहर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के कुछ ही घंटों बाद मंगलवार रात करीब 9 बजे पुलिस उन्हें अपने साथ लेकर लखनऊ रवाना हो गई। सूत्रों के अनुसार, उन्हें उनके परिवार के पास ले जाया गया है। कुछ पत्रकारों ने फोन पर संपर्क करने की कोशिश की। लेकिन उनका फोन बंद मिला।
48 वर्षीय प्रशांत कुमार सिंह के इस्तीफे के बाद विवाद और तेज हो गया। उनके सगे भाई विश्वजीत सिंह ने आरोप लगाया कि प्रशांत ने दिव्यांग कोटे का गलत इस्तेमाल कर नौकरी हासिल की थी। उनका कहना है कि प्रशांत का दिव्यांगता प्रमाण पत्र फर्जी है। यह मामला सामने आने के बाद बुधवार सुबह प्रमुख सचिव कामिनी रतन चौहान ने राज्यकर आयुक्त नितिन बंसल से पूरे प्रकरण की रिपोर्ट तलब की।
आयुक्त कार्यालय के अधिकारी जल्दबाजी में शासन पहुंचे। अधिकारियों ने बताया कि प्रशांत कुमार के खिलाफ वर्ष 2020-21 से एक शिकायत की जांच चल रही है। उस समय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग से रिपोर्ट मांगी गई थी। लेकिन रिपोर्ट न मिलने के कारण जांच आगे नहीं बढ़ पाई। अब विभाग ने अयोध्या सहित उन सभी जिलों से जानकारी मांगी है। जहां-जहां प्रशांत की तैनाती रही है। साथ ही उनके गृह जिले मऊ से भी रिपोर्ट मांगी गई है। अधिकारियों का कहना है कि मामला सार्वजनिक होने के बाद जांच में तेजी लाई जाएगी। और आरोप सही पाए जाने पर कार्रवाई तय है।
इस बीच अयोध्या के एक कपड़ा व्यापारी लक्ष्मण दास ने भी प्रशांत कुमार सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। व्यापारी का कहना है कि 2 अप्रैल को प्रशांत अपनी टीम के साथ उनकी दुकान पर पहुंचे थे। सर्वे के नाम पर कथित तौर पर 8 लाख रुपये की मांग की गई। गाली-गलौज कर धमकाया गया। इस मामले में व्यापारी ने अदालत में याचिका दाखिल की है।
प्रशांत कुमार सिंह के भाई ने वर्ष 2021 में भी उनके फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत की थी। यह शिकायत पिछले चार वर्षों से लंबित बताई जा रही है। शिकायत से जुड़ा पत्र सीएमओ मऊ द्वारा महानिदेशक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं और स्टेट मेडिकल बोर्ड को भेजा गया था। जिसमें प्रशांत के साथ उनकी बहन का नाम भी दर्ज है।
इस्तीफे के बाद प्रशांत कुमार पत्नी से फोन पर बात करते समय भावुक हो गए थे। उन्होंने कहा था कि वे पिछले दो दिनों से सो नहीं पाए थे। मुख्यमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणी से उन्हें गहरी पीड़ा हुई। उनका कहना था कि वे उसी सरकार के तहत काम करते हैं। जिससे उन्हें वेतन मिलता है। ऐसे में अपमान सहन करना उनके लिए संभव नहीं था।
Published on:
28 Jan 2026 05:54 pm

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