
Azamgarh news, Pic- patrika
आजमगढ़ जिले के रानी की सराय थाना क्षेत्र में वर्ष 2003 में हिरासत में हुई मौत के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब 22 वर्षों तक चले मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने तत्कालीन थानाध्यक्ष जेके सिंह को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश जय प्रकाश पांडेय की अदालत ने बुधवार को सुनाया।
मामले में सह आरोपी रहे हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह की सुनवाई के दौरान ही वर्ष 2017 में मृत्यु हो चुकी है, जिसके चलते उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त हो गई थी।
अभियोजन के अनुसार, 29 मार्च 2003 को रानी की सराय थाना पुलिस ने एफसीआई कर्मचारी हरिलाल यादव को बैटरी चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर थाने की हवालात में बंद किया था। इसी दौरान गोली लगने से हरिलाल यादव की मौत हो गई थी। घटना के बाद हिरासत में मौत का मामला दर्ज हुआ।
मृतक के पुत्र जितेंद्र यादव ने नगर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि जब वह रात में अपने पिता के लिए खाना लेकर थाने पहुंचे, तभी तत्कालीन थाना प्रभारी जेके सिंह के निर्देश पर हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह ने उनके पिता को गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मामले की विवेचना बाद में सीबीसीआईडी को सौंप दी गई। जांच पूरी होने के बाद फरवरी 2005 में चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की गई थी। इसके बाद से लगातार मुकदमे की सुनवाई चलती रही।
अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर जेके सिंह को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही, गाली-गलौज से संबंधित धारा 504 के मामले में एक वर्ष का सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया गया है।
फैसले के बाद न्यायालय परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। मामले को लेकर जिले में चर्चा का माहौल बना हुआ है।
Published on:
04 Feb 2026 07:39 pm
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