
सांसद डॉ. के. सुधाकर ने प्रेस वार्ता कर राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की और भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर वापस लेने का आग्रह किया।
मालूर तालुक के टेकल होबली स्थित अगलाकोटे गांव में सरकारी स्कूल के लिए दान की गई करीब 50 एकड़ भूमि पर दो निजी कंपनियों द्वारा कब्जा किए जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। इस मुद्दे पर सांसद डॉ. के. सुधाकर Dr. K. Sudhakar ने प्रेस वार्ता कर राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की और भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराकर वापस लेने का आग्रह किया।
डॉ. सुधाकर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के तीन साल पूरे हो चुके हैं और इस दौरान प्रशासन भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है। चपरासी से लेकर प्रधान सचिव तक बिना पैसे दिए तबादले और पदोन्नति नहीं हो रही। जनप्रतिनिधि सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि शिद्लघट्टा और चिंतामणि जैसे इलाकों में उद्योग लगाने और रोजगार देने का झांसा देकर किसानों से सस्ते दामों पर जमीनें खरीदी जा रही हैं। देवनहल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के 20 किमी दायरे में बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण हो रहा है।
सांसद ने बताया कि डोड्डबल्लापुर, नेलमंगला और होसकोटे में किसानों को खेती के लिए उपजाऊ भूमि नहीं मिल रही है। जंगमकोटे में ढाई हजार एकड़ भूमि अधिग्रहण से किसान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के औद्योगिक विकास मॉडल का हवाला देते हुए कहा कि कर्नाटक सरकार गांवों को बर्बाद कर रही है। किसानों से 50-60 लाख रुपये में जमीन खरीदकर तीन महीने में एक करोड़ रुपए में बेची जा रही है।
डॉ. सुधाकर ने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता टी.जी. श्रीनिवासुलु ने वर्ष 1955-56 में अगलाकोटे गांव के सर्वे नंबर 2, 7, 8, 10, 18, 60, 61, 63 और 64 की भूमि शिक्षा विभाग को दान की थी। यह दानपत्र के माध्यम से सरकारी स्कूल के लिए दिया गया था, जिसमें स्पष्ट लिखा था कि भूमि का उपयोग किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि औद्योगिकीकरण के बाद रियल एस्टेट माफिया सक्रिय हुआ और निर्दोष लोगों की जमीनें हड़प ली गईं। इसी क्रम में स्कूल की लगभग 50 एकड़ भूमि पर अतिक्रमण कर उसे यूनाइटेड एस्टेट्स (आर. गंगाधर) और यूनाइटेड ग्रीन वुड्स (एम. पंचाक्षरय्या हिरेमठ) को दे दिया गया।
उन्होंने कहा कि मीडिया में रिपोर्ट आने के बावजूद सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। पिछली सरकार में 9,000 कक्षाएं बनाई गई थीं, लेकिन पिछले तीन वर्षों में एक भी नई कक्षा नहीं बनी। उल्टा, स्कूल की जमीन पर कब्जा हो गया।
डॉ. सुधाकर ने राजस्व मंत्री कृष्ण बैरेगौड़ा से तत्काल जांच कर दोषियों पर आपराधिक मामले दर्ज करने, भूमि अनुदान रद्द करने और शिक्षा विभाग व राजस्व विभाग के बीच समन्वय कर सभी दस्तावेजो की समीक्षा करने की मांग की।यदि मूल्यवान भूमि वापस ली जाती है तो वे केंद्र सरकार से बात कर वहां शैक्षणिक संस्थान स्थापित कराने का प्रयास करेंगे। उन्होंने इस मुद्दे को संसद में भी उठाने की बात कही।
Updated on:
28 Jan 2026 06:25 pm
Published on:
28 Jan 2026 06:24 pm
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