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कर्नाटक में हर साल 89 हजार से अधिक नए कैंसर मामले

-बेंगलूरु पर सबसे ज्यादा बोझ कर्नाटक में हर साल अनुमानित 89,125 नए कैंसर मामले सामने आ रहे हैं। राज्य Karnataka में इस समय करीब 2.5 लाख लोग कैंसर के साथ जीवन बिता रहे हैं। इस बढ़ते स्वास्थ्य संकट में बेंगलूरु की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। किदवई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी (केएमआइओ) के निदेशक डॉ. नवीन […]

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किदवई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी

बेंगलूरु में तंबाकू से जुड़े कैंसर पुरुषों में 36 फीसदी और महिलाओं में 15 फीसदी मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि बेंगलूरु में कैंसर के मामलों में हर साल औसतन एक फीसदी की वृद्धि हो रही है।

-बेंगलूरु पर सबसे ज्यादा बोझ

कर्नाटक में हर साल अनुमानित 89,125 नए कैंसर मामले सामने आ रहे हैं। राज्य Karnataka में इस समय करीब 2.5 लाख लोग कैंसर के साथ जीवन बिता रहे हैं। इस बढ़ते स्वास्थ्य संकट में बेंगलूरु की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। किदवई मेमोरियल इंस्टीट्यूट ऑफ ऑन्कोलॉजी (केएमआइओ) के निदेशक डॉ. नवीन टी. ने बेंगलूरु के लिए जनसंख्या आधारित कैंसर पंजीयन के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पुरुषों में फेफड़े (9.7 फीसदी), प्रोस्टेट (6.9 फीसदी), पेट (6.5 फीसदी) और मुंह (6.4 फीसदी) के कैंसर सबसे आम हैं। वहीं महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे अधिक (31.5 फीसदी) है। इसके बाद गर्भाशय ग्रीवा (9.1 फीसदी), अंडाशय (6.4 फीसदी) और मुंह (4.3 फीसदी) के कैंसर प्रमुख हैं।

तंबाकू से जुड़े कैंसर चिंता का विषय

शहर में तंबाकू Tobacco से जुड़े कैंसर Cancer पुरुषों में 36 फीसदी और महिलाओं में 15 फीसदी मामलों के लिए जिम्मेदार हैं। आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि बेंगलूरु में कैंसर के मामलों में हर साल औसतन एक फीसदी की वृद्धि हो रही है।

किदवई में हर साल 22 हजार नए मरीज

राज्य के सबसे बड़े तृतीयक कैंसर उपचार केंद्रों में शामिल केएमआइओ में हर वर्ष करीब 22,176 नए कैंसर मरीज पंजीकृत होते हैं, जबकि 3.7 लाख से अधिक फॉलो-अप के लिए पहुंचते हैं। पुरुष मरीजों में मुंह, फेफड़े, जीभ और ग्रासनली, जबकि महिलाओं में स्तन, गर्भाशय ग्रीवा, मुंह और अंडाशय के कैंसर अधिक देखे जा रहे हैं।

बच्चों में ल्यूकेमिया सबसे आम

डॉ. नवीन ने बताया कि 31.2 फीसदी मामले तंबाकू से जुड़े कैंसर के हैं। वहीं शून्य से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में कैंसर के मामले 3.8 फीसदी हैं, जिनमें ल्यूकेमिया सबसे आम है।

जीवनशैली में बदलाव से बचाव संभव

डॉ. नवीन ने कहा कि कैंसर को लेकर डरने की जरूरत नहीं है। कई कैंसर जीवनशैली में सुधार, तंबाकू और शराब से दूरी, एचपीवी टीकाकरण और नियमित जांच से रोके जा सकते हैं। प्रारंभिक अवस्था में कैंसर की पहचान होने पर मरीज शीघ्र स्वस्थ हो सकता है। अत्याधुनिक सुविधाओं के माध्यम से मरीजों को समुचित उपचार दिया जा रहा है।