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यूपी के इस जिले में चला बुलडोजर, रेलवे की जमीन से हटाए जा रहे 150 से ज्यादा अतिक्रमण, छावनी में तब्दील हुआ इलाका

बरेली। बारादरी थाना क्षेत्र स्थित ईट पजाया चौराहे पर मंगलवार को रेलवे प्रशासन और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई से हड़कंप मच गया। रेलवे की बेशकीमती जमीन पर वर्षों से किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए सुबह से ही बुलडोजर गरजने लगे। झुग्गी-झोपड़ियों से लेकर पक्के मकानों तक बने करीब 150 अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जा रहा है।

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बरेली। बारादरी थाना क्षेत्र स्थित ईट पजाया चौराहे पर मंगलवार को रेलवे प्रशासन और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई से हड़कंप मच गया। रेलवे की बेशकीमती जमीन पर वर्षों से किए गए अवैध कब्जों को हटाने के लिए सुबह से ही बुलडोजर गरजने लगे। झुग्गी-झोपड़ियों से लेकर पक्के मकानों तक बने करीब 150 अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया जा रहा है।

कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए इलाके को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया। मौके पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) और स्थानीय पुलिस बल की भारी तैनाती की गई है। सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त के बीच रेलवे के दो बुलडोजर लगातार अवैध ढांचों को जमींदोज कर रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर स्तर पर सतर्कता बरती जा रही है।

नोटिस के बावजूद नहीं हटाया कब्जा

रेलवे अधिकारी अखिलेश कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई है। अवैध कब्जेदारों को पहले ही कई बार नोटिस जारी कर जमीन खाली करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन चेतावनी के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटाया गया। मजबूरन रेलवे और प्रशासन को बलपूर्वक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करनी पड़ी।

विरोध की कोशिश, लेकिन कार्रवाई रही जारी

जैसे ही बुलडोजर ने अवैध निर्माणों पर प्रहार किया, कुछ स्थानीय लोगों ने विरोध करने की कोशिश की। हालांकि, भारी पुलिस बल की मौजूदगी के चलते विरोध बेअसर रहा और कार्रवाई निर्बाध रूप से जारी रही। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी सूरत में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अतिक्रमण हटने के बाद तेज होंगे विकास कार्य

रेलवे प्रशासन का कहना है कि जमीन को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त कराने के बाद यहां रेलवे से जुड़े विकास कार्यों और प्रस्तावित परियोजनाओं को गति दी जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई से न केवल रेलवे की जमीन मुक्त होगी, बल्कि क्षेत्र के विकास को भी नया रास्ता मिलेगा।