17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

icon

वीडियो

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

बाड़मेर न्यूज: 35 किमी पीछा कर खेत से लेपर्ड को पकड़ा, रेस्क्यू के दौरान वन रक्षक पर हमला

कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार वन विभाग की टीम ने 35 किलोमीटर पीछा कर कुंदनपुरा गांव के एक खेत से लेपर्ड को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।

2 min read
Google source verification
leopard attack

Photo- Patrika

धोरीमन्ना (बाड़मेर). उपखंड के जालबेरी सरहद क्षेत्र में लेपर्ड के आने से पूरे इलाके में दहशत फैल गई। करीब दो दिन की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार वन विभाग की टीम ने 35 किलोमीटर पीछा कर कुंदनपुरा गांव के एक खेत से लेपर्ड को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। रेस्क्यू के दौरान लेपर्ड ने अचानक हमला कर दिया।

इसमें वन रक्षक महेश कुमार के हाथ और भुजा पर चोट आई। हालांकि, मौके पर मौजूद एक स्थानीय ग्रामीण पर भी हमला किया, लेकिन वह सुरक्षित रहा। घायल वनरक्षक को प्राथमिक उपचार दिया गया। इधर, लेपर्ड के रेस्क्यू के बाद जालबेरी, कुंदनपुरा और आसपास के गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली। पिछले दो दिनों से खेतों में काम बंद था और लोग घरों से बाहर निकलने में डर रहे थे।

ग्रामीणों ने बुधवार दोपहर को धोरीमन्ना के जालबेरी गांव और भूणियां क्षेत्र में लेपर्ड को घूमते हुए देखा। सूचना के बाद धोरीमन्ना और बाड़मेर से आई वन विभाग की संयुक्त टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। भीड़ इकट्ठा होने के कारण लेपर्ड घबरा गया और मौके से भागकर एक पेड़ पर चढ़कर छुप गया। अंधेरा हो जाने के कारण रात में रेस्क्यू संभव नहीं हो सका। अधिकारियों के अनुसार लेपर्ड रात में 15 से 20 किलोमीटर तक विचरण करता है, जिससे उसकी ट्रैकिंग और चुनौतीपूर्ण हो गई।

पगमार्क के सहारे शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन

गुरुवार सुबह से वन विभाग की टीम ने पगमार्क के आधार पर लेपर्ड का पीछा करना शुरू किया। टीम जालबेरी से माजीपुरा तक पहुंची, इसी दौरान सूचना मिली कि लेपर्ड कुंदनपुरा गांव के पास देखा गया है। वन विभाग ने इलाके में दो पिंजरे लगाए, लेकिन लेपर्ड खेतों में खड़ी फसलों के बीच छिपा रहा, जिससे उसे पकड़ना मुश्किल हो गया।


ट्रेंक्यूलाइज कर किया


गुरुवार दोपहर करीब 4 बजे लेपर्ड कुंदनपुरा गांव के एक खेत में दिखाई दिया। बायतु वन विभाग के क्षेत्रीय वन अधिकारी रूपाराम विश्नोई ने स्थिति को देखते हुए लेपर्ड को ट्रेंक्यूलाइज किया। दवा लगने के बाद लेपर्ड भागते हुए फसलों के खेत में घुस गया, जहां कुछ दूरी पर जाकर बेहोश हो गया। इसके बाद टीम ने उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर लिया।

मेडिकल जांच के बाद होगा सुरक्षित स्थान पर रिहा

लेपर्ड को धोरीमन्ना लाया गया, यहां से उसे बाड़मेर ले जाया गया। जहां उसकी मेडिकल जांच की जाएगी। वन विभाग के अनुसार जांच पूरी होने के बाद रेंज अधिकारी यह तय करेंगे कि लेपर्ड को किस सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा।


पगमार्क का पीछा कर खोज निकाला


क्षेत्रीय वन अधिकारी श्रीराम विश्नोई ने बताया कि मुख्य वन संरक्षक सविता दहिया के निर्देशन में टीम ने लगभग कई 35 किलोमीटर तक लेपर्ड के पगमार्क का पीछा किया।

रेस्क्यू ऑपरेशन में शामिल रहे

क्षेत्रीय वन अधिकारी रूपाराम विश्नोई, क्षेत्रीय वन अधिकारी बाड़मेर जगदीश विश्नोई, वनपाल रामजीवन गोदारा, वनपाल ओमप्रकाश, वनरक्षक महेश कुमार, धोली विश्नोई, नारणाराम नामा।