
साध्वी प्रेम बाईसा को दी गई समाधि (फोटो- पत्रिका)
Sadhvi Prem Baisa: भजन गायिका साध्वी प्रेम बाईसा का शुक्रवार को उनके पैतृक गांव परेऊ में राजकीय और धार्मिक विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। जोधपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद उनके पार्थिव देह को उनके द्वारा ही स्थापित 'शिव शक्ति धाम' आश्रम में समाधि दी गई। इस दौरान माहौल गमगीन रहा और हजारों की संख्या में श्रद्धालु व साधु-संत मौजूद रहे।
अंतिम विदाई में शामिल होने के लिए विभिन्न अखाड़ों और मठों से बड़े धर्मगुरु पहुंचे। मेवाड़ महामंडलेश्वर ईश्वरीय नंदगिरी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, प्रेम बाईसा केवल एक पिता की संतान नहीं, बल्कि पूरे सनातन धर्म की बेटी थी। उन्होंने बचपन से ही धर्म के वस्त्र धारण कर सनातन का प्रचार किया।
साध्वी की मृत्यु को लेकर साधु-संतों और परिजनों ने गहरा संदेह जताया है। ईश्वरीय नंद गिरी जी ने 'इंजेक्शन' से हुई मौत के जिक्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि मेडिकल विभाग को इसकी बारीकी से जांच करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बाईसा हमेशा खुशमिजाज रहती थीं, ऐसे में उनकी अचानक मौत समझ से परे है।
साध्वी के पिता विरमनाथ ने भी अपनी बेटी के लिए न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो भी इस घटना के लिए दोषी है, उसे सख्त सजा मिलनी चाहिए। साध्वी के पिता ने भावुक होकर मीडिया के सामने गलत इंजेक्शन लगाने से मौत होने को बात कही। पिता ने कहा कि हर तरह की मेडिकल जांच करवाने के लिए तैयार हूं, प्रशासन जो कहेगा वहां साइन करने को तैयार हूं। डॉक्टर के गलत इंजेक्शन के बाद ही तबियत खराब हुई और मौत हो गई।
28 जनवरी को जोधपुर में हुए निधन के बाद पोस्टमॉर्टम कर शव कल देर रात परेऊ लाया गया। जैसे ही एंबुलेंस आश्रम पहुंची, पिता विरमनाथ अपनी बेटी के पार्थिव शरीर को देख बिलख पड़े। इस दौरान परेऊ सरपंच बांकाराम सहित अन्य ग्रामीणों ने उन्हें ढाढस बंधाया। पूरी रात आश्रम में भजनों का दौर चलता रहा और सुबह विधि-विधान के साथ समाधि की रस्म पूरी की गई।
साध्वी प्रेम बाईसा का जीवन संघर्ष और भक्ति से भरा रहा। मूलतः परेऊ निवासी प्रेम बाईसा ने मात्र 2 वर्ष की आयु में अपनी मां को खो दिया था। पिता विरमनाथ उन्हें जोधपुर के गुरुकृपा आश्रम ले गए, जहां संत राजाराम जी महाराज और संत कृपाराम जी महाराज के सान्निध्य में उन्होंने शिक्षा ली।
अपने मधुर भजनों और भागवत कथा के कारण वे कम समय में ही देश-विदेश में लोकप्रिय हो गईं। जोधपुर के पाल रोड स्थित उनके 'साधना कुटीर' आश्रम के उद्घाटन में बाबा रामदेव सहित कई दिग्गज संत पहुंचे थे। साध्वी के निधन से परेऊ गांव और उनके अनुयायियों में गहरा शोक है। अब सबकी नजरें पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर टिकी हैं, ताकि मौत के असली कारणों का खुलासा हो सके।
समाधि के दौरान जसनाथी संप्रदाय मठाधीश महंत मोटनाथ महाराज, जूना अखाड़ा महामंडलेश्वर ईश्वरीनंद गिरी मेवाड़, चेतनगिरी मोकलसर, कथाव्यास कौशिक महाराज जोधपुर, संत रामप्रकाश महाराज, संत प्रेमहरि महाराज, नागेंद्र भारती महाराज, गतपत भारती महाराज पाटोदी, संत अक्रिया महाराज जोधपुर, कथावाचक बलदेव शास्त्री, तगभारती महाराज कुडी़ मठ, जेठनाथ महाराज कोलू, जोगभारती महाराज दूधवा और पूरनाथ महाराज सहित सैकड़ों की संख्या में भक्त समाधि स्थल पर मौजूद रहे।
Published on:
30 Jan 2026 02:59 pm
बड़ी खबरें
View Allबाड़मेर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
