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गर्मी में तीसरी फसल का दावा, मूंग से मूंगफल्ली की ओर मोडऩे की कवायद

300 हेक्टेयर में मूंगफल्ली उत्पादन का लक्ष्य, किसानों पर पड़ेगा डिफरेंस का बोझ। बैतूल। गर्मी के मौसम में किसानों को तीसरी फसल का अवसर देने के दावे के साथ कृषि विभाग ने इस बार मूंग की जगह मूंगफल्ली उत्पादन को बढ़ावा देने की रणनीति बनाई है। नेशनल मिशन ऑन ऑयल सीड्स के तहत जिले के […]

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300 हेक्टेयर में मूंगफल्ली उत्पादन का लक्ष्य, किसानों पर पड़ेगा डिफरेंस का बोझ।

बैतूल। गर्मी के मौसम में किसानों को तीसरी फसल का अवसर देने के दावे के साथ कृषि विभाग ने इस बार मूंग की जगह मूंगफल्ली उत्पादन को बढ़ावा देने की रणनीति बनाई है। नेशनल मिशन ऑन ऑयल सीड्स के तहत जिले के पांच विकासखंडों में 300 हेक्टेयर क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन मूंगफल्ली उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है। विभाग का तर्क है कि मूंग की खेती में रासायनिक दवाओं के अत्यधिक उपयोग से फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी और मूंग जहरीली होती जा रही थी, इसलिए किसानों को मूंग से डायवर्ट कर मूंगफल्ली की ओर लाया जा रहा है।
लक्ष्य बड़ा, तैयारी सीमित?
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार रबी सीजन में जिले में पहले से ही 237 हेक्टेयर में मूंगफली उत्पादन होता रहा है। ऐसे में गर्मी के मौसम में 300 हेक्टेयर का नया लक्ष्य कागजी तौर पर आकर्षक जरूर दिखता है, लेकिन जमीनी हकीकत कई सवाल खड़े करती है। गर्मी में सिंचाई, बिजली आपूर्ति और लागत पहले से ही किसानों के लिए चुनौती बनी रहती है। ऐसे में तीसरी फसल का जोखिम उठाने के लिए किसान कितने तैयार होंगे, यह स्पष्ट नहीं है।
बीज निशुल्क, लेकिन पूरा नहीं
योजना के तहत एक हेक्टेयर के लिए किसानों को प्रमाणित मूंगफल्ली बीज नि:शुल्क देने की बात कही जा रही है, लेकिन इसमें भी पूरी राहत नहीं है। बीज की पूरी कीमत सरकार वहन नहीं करेगी, बल्कि डिफरेंस अमाउंट किसानों को स्वयं चुकानी होगी। यानी राहत के नाम पर किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। मौजूदा समय में जब लागत, खाद और कीटनाशकों के दाम पहले से बढ़े हुए हैं, तब यह शर्त किसानों की भागीदारी को सीमित कर सकती है।
बीज वितरण की जिम्मेदारी वीसीपी पर
जिले के शाहपुर, घोड़ाडोंगरी, आठनेर, प्रभात पट्टन और भैंसदेही विकासखंडों में कुल 471 किसानों का चयन किया गया है। 300 हेक्टेयर क्षेत्र में मूंगफल्ली उत्पादन के लिए विभिन्न चयनित वैल्यू चेन पार्टनर (वीसीपी) के माध्यम से बीज वितरण किया जाएगा। हालांकि नोट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि चयनित वीसीपी कार्य नहीं करते हैं, तो अन्य वीसीपी के माध्यम से बीज वितरण कराया जाएगा, जो व्यवस्था की अनिश्चितता को दर्शाता है।बड़ा सवाल यह है कि क्या गर्मी में मूंगफल्ली किसानों को वास्तविक लाभ दे पाएगी या यह भी एक और प्रयोग बनकर रह जाएगा।
मूंगफल्ली के लिए चयनित किसान और रकबा
ब्लॉक कृषक रकबा
शाहपुर 108 30,000
घोड़ाडोंगरी 89 40,000
आठनेर 100 100,000
प्रभातपट्टन 103 80,000
भैंसदेही 71 50,000
योग 471 300,000
इनका कहना

  • मूंग की जगह किसानों को मूंगफल्ली लगाने के लिए प्रेरित किया गया है। हमनें पंाच ब्लॉकों में 471 किसानों का चयन किया हैं जिनके द्वारा 300 हेक्टेयर क्षेत्र में मूूंगफल्ली का उत्पादन किया जाएगा।
  • आनंद बड़ोनिया, डीडीए कृषि विभाग बैतूल।
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