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रेस्क्यू अभियान की लाइव ड्रिल: फेमेक्स के तहत स्कूलों में उतरी एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की संयुक्त टीम

बच्चों को रेस्क्यू अभियान में किए जाने वाले बचाव कार्यों की दी जानकारी। बैतूल। जिले में संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारी को परखने और आमजन को रेस्क्यू प्रक्रिया से रूबरू कराने के उद्देश्य से बुधवार को जवाहर नवोदय विद्यालय प्रभातपट्टन एवं संदीपनी विद्यालय मुलताईं में एनडीआरएफ एवं एसडीईआरएफ की संयुक्त टीम द्वारा फेमेक्स के […]

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बच्चों को रेस्क्यू अभियान में किए जाने वाले बचाव कार्यों की दी जानकारी।

बैतूल। जिले में संभावित आपदाओं से निपटने की तैयारी को परखने और आमजन को रेस्क्यू प्रक्रिया से रूबरू कराने के उद्देश्य से बुधवार को जवाहर नवोदय विद्यालय प्रभातपट्टन एवं संदीपनी विद्यालय मुलताईं में एनडीआरएफ एवं एसडीईआरएफ की संयुक्त टीम द्वारा फेमेक्स के अंतर्गत रेस्क्यू अभियान आधारित जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान रेस्क्यू टीमों ने स्कूल परिसर में वास्तविक परिस्थितियों जैसी लाइव मॉक ड्रिल के माध्यम से आपदा के समय बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया। बाढ़ की स्थिति में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने, भूकंप के दौरान घायल व्यक्तियों के रेस्क्यू, आग लगने की स्थिति में त्वरित निकासी और प्राथमिक उपचार की प्रक्रिया को व्यवहारिक रूप से समझाया गया।
रेस्क्यू अभियान के दौरान टीम ने सर्पदंश की स्थिति में पीडि़त को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने, प्राथमिक उपचार देने और अफवाहों से बचने की जानकारी दी। वहीं वर्षा ऋतु में नदी, नालों एवं रपटों में अचानक बाढ़ आने की स्थिति में क्या सावधानियां अपनानी चाहिए, इस पर विशेष जोर दिया गया। वज्रपात के समय खुले स्थान, पेड़ों के नीचे अथवा बिजली के खंभों के पास खड़े न रहने जैसे क्या करें-क्या न करें की जानकारी भी दी गई। एनडीआरएफ एवं एसडीईआरएफ के जवानों ने रेस्क्यू उपकरणों का उपयोग करते हुए बताया कि आपदा के समय शुरुआती कुछ मिनट सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और सही निर्णय कई जिंदगियों को बचा सकता है। विद्यार्थियों को यह भी सिखाया गया कि घबराहट के बजाय टीमवर्क और अनुशासन के साथ कैसे काम किया जाए। इस रेस्क्यू आधारित प्रशिक्षण में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। बच्चों ने रेस्क्यू ड्रिल को नजदीक से देखकर उत्साह के साथ सवाल भी पूछे। प्रशासन का कहना है कि इस तरह के अभियान से भविष्य में आपदाओं के दौरान जनहानि को कम करने में मदद मिलेगी।

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