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अरूणाचल प्रदेश के परमिट पर बैतूल में दौड़ रही थी बस, आरटीओ ने दस हजार का जुर्माना ठोका

-रात की जांच में यात्री बसों की लापरवाही उजागर, बसों में अग्निशमन जैसे बुनियादी इंतजाम भी नदारद। बैतूल। जिले में यात्री बसों के संचालन में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। रविवार रात परिवहन विभाग द्वारा की गई सघन जांच में यह लापरवाही साफ तौर पर सामने आ गई। बस स्टैंड सहित भोपाल-नागपुर […]

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-रात की जांच में यात्री बसों की लापरवाही उजागर, बसों में अग्निशमन जैसे बुनियादी इंतजाम भी नदारद।

बैतूल। जिले में यात्री बसों के संचालन में नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। रविवार रात परिवहन विभाग द्वारा की गई सघन जांच में यह लापरवाही साफ तौर पर सामने आ गई। बस स्टैंड सहित भोपाल-नागपुर फोरलेन पर की गई इस कार्रवाई में कुल 9 यात्री बसों की जांच की गई, जिनमें से एक बस अरुणाचल प्रदेश के परमिट पर बैतूल जिले में संचालित पाई गई। यह बस किसी साहू ट्रैवल्स की बताई जा रही है, जिसने ऑल इंडिया परमिट का सहारा लेकर स्थानीय स्तर पर संचालन कर रखा था। परिवहन नियमों के अनुसार ऑल इंडिया परमिट का मतलब यह नहीं होता कि बस को किसी भी जिले में नियमित रूप से चलाया जाए, लेकिन जांच में सामने आया कि इस शर्त का सीधा उल्लंघन किया जा रहा था। इस मामले में आरटीओ द्वारा बस पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया, जो नियम उल्लंघन की गंभीरता के मुकाबले काफी कम माना जा रहा है।
जांच में शामिल अन्य आठ बसों की स्थिति भी चिंताजनक रही। इनमें से अधिकांश बसों में यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े बुनियादी इंतजाम नहीं थे। कहीं अग्निशमन यंत्र पूरी तरह गायब थे तो कहीं निर्धारित मानकों से छोटे सिलेंडर लगाए गए थे। यह स्थिति तब है, जब बसों में आग लगने की घटनाएं देशभर में समय-समय पर जानलेवा साबित होती रही हैं। जिला परिवहन अधिकारी अनुराग शुक्ला ने बताया कि जांच के दौरान परमिट, अग्निशमन यंत्र, आपातकालीन खिडक़ी, चालक केबिन के पास खिडक़ी समेत अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच की गई। कई बसों में ड्राइवर पार्टिशन दरवाजा नियमों के खिलाफ पाया गया, जिसे तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए। स्लीपर कोच में लगे स्लाइडर हटाने और एफडीएसएस लगाने के लिए बस ऑपरेटरों को एक महीने का समय दिया गया है। इसके साथ ही ग्रीन जोन में न्यूनतम 10 किलोग्राम के अग्निशामक यंत्र रखने, चेसिस विस्तार वाली बस बॉडी को तत्काल परिचालन से हटाने, तथा बसों के पंजीकरण के समय फॉर्म 22/2-ए और अनुमोदित परीक्षण एजेंसी की मंजूरी अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि सवाल यह उठता है कि जब ऐसी गंभीर खामियां एक ही रात की जांच में सामने आ जाती हैं, तो पहले ये बसें कैसे बेखौफ सडक़ों पर दौड़ रही थीं।