3 फ़रवरी 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गर्मी से पहले पानी की चिंता: माचना डैम का जलस्तर गिरा तो लाखापुर जलाशय से छोड़ा पानी

एक ओर 18 किमी दूर से पानी लाने की कवायद, दूसरी ओर शहर के बीचोंबीच हजारों लीटर पानी बर्बाद। बैतूल। गर्मी की औपचारिक शुरुआत भी नहीं हुई है और बैतूल नगरपालिका की जल आपूर्ति व्यवस्था की कमजोरी सामने आने लगी है। माचना डैम का जलस्तर घटते ही मंगलवार को नगर पालिका को लाखापुर जलाशय की […]

2 min read
Google source verification
betul news

एक ओर 18 किमी दूर से पानी लाने की कवायद, दूसरी ओर शहर के बीचोंबीच हजारों लीटर पानी बर्बाद।

बैतूल। गर्मी की औपचारिक शुरुआत भी नहीं हुई है और बैतूल नगरपालिका की जल आपूर्ति व्यवस्था की कमजोरी सामने आने लगी है। माचना डैम का जलस्तर घटते ही मंगलवार को नगर पालिका को लाखापुर जलाशय की याद आ गई। आनन-फानन में नगरपालिका की टीम लाखापुर पहुंची और वहां से माचना नदी में पानी छोड़ा गया। यह पानी करीब 18 किलोमीटर का सफर तय कर चार से पांच दिनों में माचना डैम तक पहुंचेगा। जलशाखा के अधिकारी और कर्मचारियों को इसकी निगरानी में लगाया गया है। सबसे अहम सवाल यह है कि फरवरी के पहले सप्ताह में ही लाखापुर का सहारा क्यों लेना पड़ा? जबकि नगरपालिका दावा करती है कि डैम की ऊंचाई बढ़ाने और जलसंचय के लिए तमाम इंतजाम किए गए हैं। पिछले तीन महीनों से ताप्ती बैराज और माचना डैम के भरोसे पूरे शहर को पानी दिया जा रहा था, लेकिन अचानक माचना डैम का जलस्तर गिर गया। इसके पीछे नदी के दोनों किनारों में मौजूद खेत मालिकों द्वारा मोटर पंप लगाकर नदी का पानी चोरी किया जाना है। जिसकी शिकायत भी एक पार्षद द्वारा की गई थी, लेकिन समय रहते पानी की चोरी नहीं रोकी गई। जिसकी वजह से नदी का जलस्तर नीचे चला गया। नगरपालिका के पास ताप्ती बैराज से पानी लेने का विकल्प अभी भी मौजूद है। जलशाखा प्रभारी धीरेंद्र राठौर के अनुसार माचना डैम का जलस्तर कम होने के कारण लगभग 1 एमसीएम पानी लाखापुर से लिया जा रहा है, जो तीन से चार दिनों में डैम तक पहुंचेगा। यह बयान स्थिति की गंभीरता को और उजागर करता है।
लीकेज बढ़ा रही जलसंकट की स्थिति
विडंबना यह है कि एक तरफ दूर-दराज से पानी लाने की मशक्कत हो रही है, वहीं दूसरी ओर शहर के सबसे व्यस्त इलाके थाना चौक से कमानी गेट के बीच पिछले दो महीनों से पाइपलाइन लीकेज बनी हुई है। जैसे ही जलापूर्ति शुरू होती है, सडक़ पर पानी की तेज धार बहने लगती है और कुछ ही देर में सडक़ तालाब में तब्दील हो जाती है। स्थानीय लोगों का अनुमान है कि रोजाना हजारों लीटर पानी इस लीकेज से व्यर्थ बह रहा है। चिंता की बात यह है कि न तो नगर पालिका के अधिकारी इस लीकेज को लेकर गंभीर हैं और न ही मैदानी कर्मचारी। सवाल यह है कि जब पानी की इतनी किल्लत है तो बर्बादी पर चुप्पी क्यों?